Reading Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 6 चतुर चित्रकार कविता Chatur Chitrakar Kavita Poem Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Chatur Chitrakar Kavita Class 5 Summary in Hindi
Chatur Chitrakar Class 5 Hindi Summary
चतुर चित्रकार का सारांश – Chatur Chitrakar Summary in Hindi
कवि रामनरेश त्रिपाठी ने ‘चतुर चित्रकार’ कविता में प्रकृति प्रेमी चित्रकार की सूझ-बूझ और चतुराई को दर्शाया है। सुनसान स्थान पर चित्र बना रहे चित्रकार का सामना शेर से हो जाता है। कुछ देर डरने के बाद, चित्रकार हिम्मत जुटाता है और चित्र बनवाने के लिए मनाता है। उचित अवसर देखकर चित्रकार उस स्थान से भागकर अपनी जान बचाता है।

विपत्ति के समय बुद्धि और धैर्य के साथ काम लेना चाहिए।
चतुर चित्रकार हिंदी भावार्थ Pdf Class 5
Chatur Chitrakar सप्रसंग व्याख्या
1. चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र ।
उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश,
नदी, पहाड़, पेड़ पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।
फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप,
बोला – सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप ।
उकडू-मुकडू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर,
बड़े ध्यान से लगा देखने, चित्रकार की ओर ।
चित्रकार ने कहा- हो गया, आगे का तैयार,
अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।
शब्दार्थ :
- सुनसान – जहाँ कोई न हो ।
- यम राजा – मृत्यु के देवता ।
- होश – सुधबुध ।
- चुपचाप – मौन रहना ।
- उकडू-मुकडू – घुटने मोड़कर बैठना ।
व्याख्या – सुनसान जगह पर चित्रकारी करते हुए चित्रकार के सामने शेर आ जाता है। शेर को देखते ही चित्रकार घबरा जाता है। कुछ क्षण बाद हिम्मत करके वह जंगल के सरदार शेर से बैठने के लिए कहता है और उसका सुंदर चित्र बनाने की पेशकश करता है। चित्रकार की बात सुनकर शेर अपने शरीर के अंगों को समेटकर बैठ जाता है।
2. बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर.
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर |
बहुत देर तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर,
बैठे-बैठे लगा सोचने, इधर हुई क्यों देर ?
झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस,
चित्रकार ने नाव पकड़कर ली जी भर के साँस ।
जल्दी-जल्दी नाव चलाकर निकल गया वह दूर,
इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर ।
शेर बहुत खिसियाकर बोला, नाव जरा ले रोक,
कलम और कागज तो ले जा, रे कायर डरपोक ।
चित्रकार ने कहा तुरंत ही, रखिए अपने पास,
चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास ।
शब्दार्थ :
- पीठ फिराकर – किसी स्थिति पर से ध्यान हटाना, विमुख (अलग) होना ।
- आँख मूँदकर – बिना सोच-समझे।
- बाँस-एक पौधा ।
- झुंझलाहट – खीज, चिड़ जाना ।
- खिसियाकर- अप्रसन्न होना, नाराज़ होना ।
व्याख्या -शेर जब पीछे की ओर मुड़ता है तो चित्रकार चुपचाप उस जगह से भाग जाता है। शेर को पता चलता है कि उसे धोखा दिया गया है, तो वह क्रोधित हो जाता है और चित्रकार को कायर कहकर पुकारता है।