By going through these Sanskrit Class 6 Notes and NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 7 Hindi Translation Summary Explanation Notes अतिथिदेवो भव students can clarify the meanings of complex texts.
Class 6 Sanskrit Chapter 7 Summary Notes अतिथिदेवो भव
अतिथिदेवो भव Class 6 Summary
भारतीय संस्कृति में अतिथि का हमेशा ही महत्त्व रहा है। हमारे देश में न केवल मनुष्य अपितु अन्य प्राणियों को भी अतिथिभाव से पूजा जाता है । ‘अतिथि देवो भव’ इस कथन से अतिथि की सेवा का भाव हम सभी में जागृत होता है। प्रस्तुत पाठ में बिल्ली एवं उसके बच्चों के माध्यम से ‘अतिथि देवो भव’ की शिक्षा दी गई है।
राधिका के घर की छत पर विशिष्ट अतिथि (बिल्ली एवं उसके चार बच्चे) आए हैं। वह दिनभर उनकी ही चिंता एवं सेवा में लगी रहती है। वह उसके बच्चों का नामकरण भी करती हैं। वह उसे (बिल्ली को) खीर खिलाती है। इन समस्त क्रियाकलापों को देखकर उसकी दादी उसे शिक्षा देती है कि अतिथि हमारे भगवान हैं, यह सोचकर उनकी सेवा करो ।
भारतीय संस्कृति में अतिथियों का बहुत महत्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ अर्थात् अतिथि देवता के समान होता है। यह मान्यता हमारी संस्कृति में अनादिकाल से चली आ रही है। हमारे देश में न केवल मनुष्य बल्कि दूसरे प्राणियों को भी अतिथि के भाव से पूजा जाता है।
वैदिक परंपरा में पाँच प्रकार के यज्ञों- ब्रह्मयज्ञ, देव यज्ञ, पितृ यज्ञ, बलिवैश्वदेव यज्ञ और अतिथि यज्ञ की बात कही गई है। इन्हें पंच महायज्ञ कहा गया है। इस प्रकार अतिथि सेवा पञ्च महायज्ञों में आती है । ‘अतिथिदेवो भव’ इस वचन से अतिथिसेवा का भाव सबमें जागृत होता है। यहाँ पाठ में कथा के माध्यम से अतिथि के महत्व को बताया गया है।
अतिथिदेवो भव Class 6 Notes
पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ
(1)
राधिका एषु दिनेषु कूर्दमाना एव चलति । यतः गृहे नूतनाः अतिथयः सन्ति । ते च विशिष्टाः सन्ति । माता, पुत्रौ, पुत्र्यौ च मिलित्वा ते तत्र पञ्च सन्ति । अहोरात्रं तस्याः चिन्ता एकत्र एव । गृहस्य छद्याः उपरि । तत्र एव तस्याः मनः अस्ति । कुतूहलम् अस्ति, के ते इति ? ते न अन्ये, काचित् मार्जारी तस्याः चत्वारः शावकाः च । आम्, ते एव विशिष्टाः अतिथयः । सा तु तेषां नामानि अपि चिन्तितवती – तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः च इति ।
शब्दार्थाः : (Word Meanings) :
कूर्दमाना – कूदती हुई (Jumping),
गृहे – घर में (In the house),
नूतना: – नये (New),
मिलित्वा – मिलकर (Together),
अहोरात्रं – दिन-रात (Day and night),
छद्याः उपरि – छत के ऊपर (On the roof),
मार्जारी – बिल्ली (Cat),
शावकाः – बिल्ली के बच्चे (Kitten)।
सरलार्थ-
राधिका इन दिनों में कूदती हुई ही चलती है। क्योंकि घर में नए अतिथि (मेहमान) हैं और वे खास हैं। माता, दो पुत्र और दो पुत्रियाँ ये सब मिलाकर पाँच हैं। दिन-रात उसकी एक ही चिंता है घर की छत के ऊपर ही उसका (राधिका का) मन है। उत्सुकता हो रही है, वे सब कौन हैं? वे कोई और नहीं, कोई एक बिल्ली और उसके चार बच्चे हैं। हाँ, वे ही विशेष अतिथि हैं। उसने तो उनके नाम भी सोच लिए । तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम ।

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(2)
तन्वी आकृत्या सुन्दरी, मृद्वी स्पर्शेन अतीव कोमला । शबल: चित्रवर्णः तथा च भीमः किञ्चित् स्थूलः । मार्जारी कदा गच्छति, कदा आगच्छति एतत् सर्वम् अपि राधिका जानाति । सा मार्जार्यै क्षीरं ददाति । मार्जारी पिबति । अनन्तरं सा सधन्यवादं राधिकां पश्यति। किन्तु शावकानां समीपं राधिका गच्छति चेत् मन्दं मन्दं पृष्ठतः आगच्छति । राधिकां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति । पितामही राधिकायाः कार्यकलापान् दृष्ट्वा हसति ।
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
मन्दं मन्दम् – धीरे-धीरे (Slowly),
पृष्ठतः – पीछे-पीछे (From the back),
कार्यकलापान् – गतिविधियों को (Activities),
दृष्ट्वा – देखकर (Having Seen)।
सरलार्थ-
तन्वी शरीर से बहुत सुन्दर है, मृद्वी छूने में बहुत ही कोमल है। शबल रंग-बिरंगा है और भीम थोड़ा मोटा । बिल्ली कब जाती है, कब आती है, यह सब भी राधिका जानती है। वह बिल्ली के लिए दूध देती है। बिल्ली दूध पीती है। उसके बाद वह धन्यवाद के साथ राधिका को देखती है। किंतु राधिका बच्चों के पास जाती है तो वह धीरे-धीरे पीछे से आ जाती है। राधिका को देखकर बच्चे डरते नहीं हैं। दादी राधिका के कामों को देखकर हँसती है।


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(3)
सा राधिकां वदति-राधिके ! अतिथयः कदा आगच्छन्ति इति न जानीमः । किन्तु यदा ते अत्र आगच्छन्ति तदा तेषाम् एतादृशी सेवा करणीया। राधिका पितामह्याः कण्ठं परितः मालाम् इव हस्तौ स्थापयन्ती पृच्छति – अस्तु, करोमि । किन्तु किमर्थम् ? पितामही वदति-‘अतिथिदेवो भव’ । अर्थात् अतिथिः अस्माकं देवः अस्ति इति चिन्तयतु । तस्य आदरेण सेवां करोतु । राधिका आदिनं मन्त्रम् इव वारं वारं वदति – अतिथिदेवो भव । अतिथिदेवो भव । अनन्तरं सा तन्वीं मृद्वीं शबलं भीमं च वात्सल्येन वदति – जानन्ति किम् ? अतिथिदेवो भव ।
भवन्तः अपि वदन्तु – ‘ अतिथिदेवो भव’ |
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
एतादृशा: – इस तरह के (Like these),
स्थापयन्ती – डालती हुई (Putting),
किमर्थम् – क्यों/किसलिए (Why),
आदिनम् – दिन भर (Whole day),
वारं वारम् – बार – बार (Again and again)।
सरलार्थ –
वह राधिका से बोलती है- राधिका ! अतिथि कब आते हैं यह हम नहीं जानते हैं। परन्तु जब वे यहाँ आते हैं तब उनकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। राधिका दादी के गले के चारों ओर माला के समान अपने हाथों को रखती हुई पूछती है – ऐसा ही करूंगी परन्तु किसलिए? दादी बोलती है – ‘अतिथि देवता के समान होते हैं’ अर्थात् अतिथि हमारे देवता हैं, ऐसा सोचो। उसकी आदर से सेवा करो। राधिका दिनभर मन्त्र के समान बार-बार बोलती है – ‘अतिथि देवो भव ।’ अतिथि देवता के समान हैं। इसके बाद वह तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम को प्यार से बोलती है- जानते हो क्या? अतिथि देवता हैं।
आप सब भी बोलो अतिथि देवता हैं।

वयं शब्दार्थान् जानीम:
