Reading Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 12 गंगा की कहानी Ganga Ki Kahani Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Ganga Ki Kahani Class 5 Summary in Hindi
Ganga Ki Kahani Class 5 Hindi Summary
गंगा की कहानी का सारांश – Ganga Ki Kahani Summary in Hindi
प्रस्तुत पाठ जीवनदायनी माँ गंगा पर आधारित है। मुख्य रूप से यह पाठ बताता है कि माँ गंगा जब हिमालय से निकलती है तो बहुत ही शीतल, निर्मल और स्वच्छ होती है, परंतु जैसे-जैसे वह अपनी यात्रा में आगे बढ़ती जाती है वह मैली होती जाती है। हिमालय पर जहाँ से गंगा निकलती है उस स्थान को गोमुख कहा जाता है। वहीं से नीचे गंगोत्री धाम है। यह एक पवित्र स्थल है। वहाँ से गंगा आगे बढ़ती है, वह कभी पत्थरों से टकराती है तो कभी पहाड़ों को चीरती हुई कल-कल की ध्वनि के साथ आगे बढ़ती है। गंगा अपनी कहानी बताते हुए कहती है कि ” मेरे तट पर अनेक आश्रम और औद्योगिक नगर बसे हैं। अनेक कारखाने मेरे तट पर चल रहे हैं जो मेरे जल का उपयोग अपने हित में करते हैं और फिर मुझे ही गंदे पानी और पदार्थों से दूषित कर देते हैं।

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गंगा बताती है कि प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात् हरिद्वार में ‘कुंभ’ लगता है। इसी प्रकार प्रत्येक बारह वर्ष में ‘संगम’ इलाहाबाद में भी कुंभ मेला लगता है। गंगा बताती है कि वह पहाड़ों से उतरकर हरिद्वार पहुँचती है फिर कानपुर से होती हुई संगम पहुँचती है। उसके पश्चात् काशी से आगे बढ़ती हुई, बिहार, पटना, भागलपुर, पश्चिम बंगाल और कलकत्ता होती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर समुद्र से मिल जाती है। अपने इतने लंबे सफर में माँ गंगा का चाँदी जैसा चमकीला रूप दूषित हो जाता है, जिसका कारण केवल और केवल हम मनुष्य हैं जो नदियों को दूषित कर उसका रूप बिगाड़ते हैं । परंतु अब मनुष्य को अपनी गलती का एहसास हो रहा है और रहा है और मनुष्य माँ गंगा तथा अन्य नदियों को स्वच्छ बनाने के अभियान में जुट गया है और यह एक नेक कदम है इससे उसका अपना भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
माँ गंगा ‘जीवनदायिनी’ है। इसकी स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है। जब माँ गंगा स्वच्छ रहेंगी, तभी हम भी स्वस्थ व सुरक्षित रहेंगे।
गंगा की कहानी शब्दार्थ
पृष्ठ 143
- धारा – नदी का बहाव ।
- जनपद – जिला ।
- हिमनद – बर्फ की नदी (बर्फ का पिंड) ।
- भव्य – शानदार ।
- ढुलकती – लुढ़कती।
- निखरना – साफ, निर्मल होना ।
पृष्ठ 144
- सींचना – पानी से गीला करना ।
- संगम – जहाँ दो या दो से अधिक नदियाँ मिलती हैं।
- प्रत्येक – हर एक ।
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पृष्ठ 145
- तीर्थ – पूजनीय स्थल ।
- मटमैला – मिट्टी मिला हुआ / दूषित ।
- दूषित – गंदा ।
- शुद्ध-साफ ।
- प्रयास – कोशिश ।
- आरंभ – शुरू |
- प्रतीक्षा – इंतजार |
- निर्मल – साफ ।