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Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं Question Answer
ऐसी भी बातें होती हैं Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 4 Question Answer – Class 9 Hindi ऐसी भी बातें होती हैं Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 74-82)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
लता जी ने अपने पिता जी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर:
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
तर्क – लता जी ने स्पष्ट कहा है कि उनके पिता ने उन्हें स्वाभिमान, सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना
सिखाया।
प्रश्न 2.
पिता जी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का ता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर-
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
तर्क – पिता के निधन के बाद अपनी छोटी उम्र और संघर्षों के बावजूद उन्होंने पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उठाई, जो उनके कर्तव्य बोध को दर्शाता है।
प्रश्न 3.
“बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर:
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
तर्क – ‘मंगलागौर’ जैसे उत्सवों में सामूहिक गायन और नृत्य यह बताते हैं कि संगीत समाज को जोड़ने और उत्सवों को जीवंत बनाने का माध्यम है।
प्रश्न 4.
“गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” – इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर:
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क – यह कहावत स्पष्ट करती है कि मनुष्य का शरीर (गाँव) भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन उसके द्वारा किए गए महान कार्य और उसका नाम (कीर्ति) सदा जीवित रहते हैं।
प्रश्न 5.
कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर:
(ग) आत्मीय
तर्क – लता जी कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों को अपने घर के सदस्य जैसा मानती थीं और उनके साथ ज़मीन पर
बैठकर बातें करती थीं।
प्रश्न 6.
लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर:
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्क – क्योंकि संगीत के सुर सच्चे हों तो मेघराग गाने से वर्षा होना या दीपक राग गाने से दीये जलना असंभव नहीं।
प्रश्न 7.
पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यत: कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर:
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
तर्क – पूरे साक्षात्कार में वे अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर और प्रशंसकों को देती हैं। उन्होंने सादगी से अपना जीवन जीया और कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
प्रश्न 1.
“पिता जी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’ … इसके बाद वे कहते थे कि अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे?
(संकेत – यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर:
यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के बीच एक बहुत ही सुंदर संतुलन का प्रतीक है।
• अनुशासन – घर में अनुशासन इतना गहरा था कि डंडे या डाँट की जरूरत नहीं पड़ती थी, केवल एक नजर ही काफी थी। पिता जी का प्रश्न “समझ गए न?” बच्चों के मन में आत्म मंथन पैदा करता था। जब बच्चे कहते थे “हाँ, समझ गए”, तो इसका मतलब था कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और वे भविष्य में उसे न दोहराने का अनुशासन सीख चुके हैं।
• स्नेह और सहजता – अनुशासन के तुरंत बाद पिताजी का यह कहना कि “अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो”, यह उनके असीम स्नेह को दर्शाता है। वे अनुशासन के नाम पर बच्चों का बचपन या उनकी खुशी नहीं छीनते थे। गलती का अहसास कराने के बाद वे उन्हें वापस उनके खेल और स्वाभाविक जीवन में भेज देते थे, जिससे बच्चों के मन में डर या कुंठा नहीं बैठती थी।
यह संतुलन बच्चों को यह सिखाता था कि गलतियाँ होने पर सुधार जरूरी है, लेकिन सुधार के बाद जीवन फिर से सामान्य और खुशहाल हो सकता है। उनके पिता का यह तरीका भय के बजाय सम्मान और समझ पर आधारित था। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि एक आदर्श परिवार में अनुशासन है जरूरी है ताकि बच्चे सही संस्कार सीख सकें, लेकिन वह अनुशासन स्नेह की छाया में होना चाहिए ताकि बच्चों का मानसिक विकास और उनका बचपन बाधित न हो।
प्रश्न 2.
लता मंगेशकर पर अपने पिता जी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर:
लता मंगेशकर के व्यक्तित्व और उनके संगीत के सफर पर उनके पिता जी (पंडित दीनानाथ मंगेशकर) का बहुत गहरा प्रभाव था। उनके जीवन में संगीत के प्रति जो समर्पण है, वह पिता जी के संस्कारों की ही देन है। उनके पिता जी संगीत को एक ‘साधना’ मानते थे। उनके व्यक्तित्व में जो अनुशासन था, वह पिता जी की ही सिखाई हुई जीवनशैली का हिस्सा था। उन्होंने सीखा कि किसी भी कला को गंभीरता और पूरी एकाग्रता के साथ ही सिद्ध किया जा सकता है। पिता जी के सिखाने का तरीका ऐसा था कि वे बच्चों को उनकी गलती का अहसास कराते थे और फिर उन्हें सहज भी कर देते थे। इससे लता जी के व्यक्तित्व में विनयशीलता आई और अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ने का गुण विकसित हुआ।
कार्यों में पिता जी का प्रभाव-
लता जी की गायकी में सुरों का जो पक्कापन और शुद्धता है, वह उनके पिता जी के शास्त्रीय संगीत के ज्ञान का प्रभाव है। पिता जी खुद एक प्रख्यात शास्त्रीय गायक और नाट्य संगीतकार थे, जिसका असर लता जी की गायन शैली पर साफ दिखता है।
पिता जी के असामयिक निधन के बाद, लता जी ने बहुत छोटी उम्र में पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उठाई। यह साहस और अडिग रहने की शक्ति उन्हें अपने पिता के आदर्शों से ही मिली थी। उन्होंने अपने भाई-बहनों को भी संगीत में स्थापित करने में वही भूमिका निभाई, जो उनके पिता निभाना चाहते थे।
लता जी के अनुसार, उनकी आवाज में जो ‘अदाकारी’ और ‘भाव’ हैं, वे उनके पिता जी के संगीत की ही विरासत हैं। उनके कार्यों में झलकता पूर्णतावाद और व्यवहार में सादगी, सीधे तौर पर पंडित दीनानाथ मंगेशकर जी के मार्गदर्शन का परिणाम हैं।
प्रश्न 3.
मैंने अपने पिता जी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया। ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर:
लता जी के लिए इसका अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि अपने पिता की उस शास्त्रीय गरिमा और संगीत की
शुद्धता को जीवित रखना था। इसमें एक बड़ा उत्तरदायित्व यह भी जुड़ा था कि वे अपनी गायकी की शुद्धता और मर्यादा को इस तरह बनाए रखें कि उनके पिता के नाम को और अधिक सम्मान मिले।
नाम बढ़ाने का एक और अर्थ परिवार का सहारा बनना भी था। उन्होंने अपनी मेहनत से न केवल शोहरत कमाई, बल्कि अपने भाई-बहनों को भी संगीत में स्थापित किया। अपने पिता के प्रति यह उनकी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि थी।
प्रश्न 4.
किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर:
लता जी के अपने सहयोगियों (संगीतकारों और कोरस गायकों) के साथ संबंध अत्यंत मधुर और मानवीय थे। निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है-
- वरिष्ठों के प्रति आदर – वे दीवाली जैसे त्योहारों पर सुबह-सुबह संगीतकारों के घर मिठाई लेकर आशीर्वाद लेने जाती थीं।
- सहकर्मियों के प्रति समानता – कोरस की लड़कियों को वे ‘घर जैसा’ मानती थीं। उनमें किसी भी प्रकार का अहंकार नहीं था, वे उनके साथ स्टूडियो में ज़मीन पर बैठकर सहज संवाद करती थीं। इतनी बड़ी कलाकार होने के बावजूद उनमें कोई ‘स्टारडम’ नहीं था।
वे मानती थीं कि एक सफल गीत केवल मुख्य गायक की मेहनत नहीं, बल्कि संगीतकार, वादक और कोरस के सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है। वे अपने सहयोगियों के संघर्ष और उनकी प्रतिभा को पूरा महत्व देती थीं।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि
साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए-

प्रश्न 1.
“मुझे अपने गाने और रेकार्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर:
एकाग्रता, समर्पण, साधना।
प्रश्न 2.
“अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
उत्तर:
स्वाभिमान, आत्मविश्वास दृढ़ता, स्पष्टता।
प्रश्न 3.
“आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
उत्तर:
विनम्रता, कृतज्ञता।
प्रश्न 4.
“मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
उत्तर:
दार्शनिकता, स्पष्टवादिता।
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मेरे प्रश्न
नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो) –
“संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।”
इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे-
1. लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?
2. लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
3. लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?
आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं।
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो) –
प्रश्न 1.
उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
उत्तर:
प्रश्न (क) : ‘मंगलागौर उत्सव की क्या विशेषताएँ थीं?
प्रश्न (ख) : महाराष्ट्र के लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच कौन-सा भाव मुख्य रूप से झलकता था?
प्रश्न (ग) : ‘मंगलागौर’ पर्व में स्त्रियों की भूमिका कैसी होती है?
प्रश्न 2.
उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
उत्तर:
प्रश्न (क) : तकनीकी प्रगति की तुलना में पुराने संगीतकारों के बारे में लता जी के क्या विचार थे?
प्रश्न (ख) : लता जी ने पुराने संगीतकारों की किन खूबियों को ‘अद्वितीय’ माना है?
प्रश्न (ग) : लता जी पुराने संगीतकारों के बारे में क्या सोचती थीं?
मेरे अनुभव मेरे विचार
अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रश्न 1.
“अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
उत्तर:
‘सही बात पर अकेले खड़ा होना’ एक ऐसा अनुभव है जो इनसान के आत्म-सम्मान और नैतिक साहस को दर्शाता है। इस प्रश्न का उत्तर लिखने के लिए आप इन संकेतों का उपयोग कर सकते हैं-
• आप एक ऐसी स्थिति के बारे में सोचें जहाँ बहुमत गलत था, लेकिन आप सच के साथ थे।
(संकेत – मान लीजिए आपकी कक्षा के कुछ छात्रों ने स्कूल की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और सजा से बचने के लिए किसी ऐसे निर्दोष विद्यार्थी का नाम ले दिया जो चुप रहता था। भले ही आपके दोस्त भी उस समूह में शामिल थे, पर आपने सच बोलने का फैसला किया।)
• अकेले खड़े होने पर मन में जो हलचल होती है, उसे लिखें।
(संकेत – शुरू में मन में यह डर आना कि ‘सब मुझे अपना दुश्मन समझेंगे’ या ‘मैं अकेला पड़ जाऊँगा।’ दोस्तों का साथ छूटने का डर और खुद पर संदेह होना।)
• आपने अपनी बात को कैसे साबित किया?
(संकेत – बिना चिल्लाए या डरे, शांति से शिक्षक या बड़ों के सामने वास्तविक तथ्यों को रखना। यह समझाना कि गलत का साथ देना भी गलती करने जैसा ही है।) अंत में जब सच्चाई सामने आई, तो भले ही कुछ दोस्त नाराज हुए हों, लेकिन शिक्षकों और अन्य लोगों की नजरों में आपका सम्मान बढ़ गया। आपने सीखा कि ‘सच का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन वह गलत नहीं होता।’
प्रश्न 2.
“बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।”
आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
उत्तर:
मेरे पिताजी सदैव मेरे आदर्श रहे हैं। वे सदा थोड़े में खुश रहने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने मुझे हमेशा सच्चाई और परिश्रम के मार्ग पर चलकर लक्ष्य हासिल करना सिखाया। वे अक्सर कहते हैं कि “यदि फूलों पर चलना सीखा है तो काँटों पर चलना भी सीखो क्योंकि परिस्थितियाँ कभी एक सी नहीं रहतीं।” उनकी इस बात ने मेरे दिल में घर कर लिया। मैं समझ चुकी थी कि जीवन में यदि सफल होना है तो केवल जीत ही नहीं, अपितु हार भी स्वीकार करनी होगी। मैंने पिताजी द्वारा सिखाए गए कायदे – जैसे सच्चाई पर चलना, झूठ नहीं बोलना, मेहनत करना और जो कुछ पास है उसमें संतुष्ट होना आदि सभी को न केवल स्वीकार किया, अपितु अपने गुणों में शामिल कर जीवन का हिस्सा भी बना लिया। अब इन्हें पिताजी या माताजी द्वारा याद दिलाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये तो स्वतः ही मेरे आचरण में एकसार हो चुके हैं और मुझे हर कदम पर मजबूत बनाते हैं।
प्रश्न 3.
“पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।”
आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी भी पारंपरिक उत्सव को मनाने का उद्देश्य केवल रस्मों को निभाना नहीं, बल्कि परिवार और समाज के साथ जुड़ाव महसूस करना होता है। यदि मैं ‘होली’ के पर्व की बात करूँ, तो इसे हम एक बहुत ही विशेष और प्रकृति के अनुकूल तरीके से मनाते हैं-
हम बाजार के रासायनिक रंगों के बजाय घर पर ही ‘टेसू (पलाश) के फूलों को पानी में भिगोकर प्राकृतिक रंग तैयार करते हैं। इसके अलावा, चंदन और गुलाल का उपयोग किया जाता है। यह हमें प्रकृति के करीब लाता है और स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित रहता है।
इस पाठ में जिस प्रकार ‘मंगलागौर’ जैसे उत्सवों में सामूहिक गीतों का वर्णन है, वैसे ही हमारे यहाँ होली पर ‘फाग’ और ‘लोकगीत’ गाने की परंपरा है। मोहल्ले के सभी लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं, ढोलक बजती हैं और पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। यह न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि आपसी सौहार्द बढ़ाने का माध्यम भी है।
उत्सव को विशेष बनाने के लिए हम इस दिन कुछ समय निकालकर पड़ोस की बस्ती के बच्चों के साथ खुशियाँ साझा करते हैं। उन्हें घर की बनी ‘गुझियाँ और मिठाइयाँ’ खिलाते हैं, उनके साथ रंग खेलते हैं, जो उत्सव के आनंद को दोगुना कर देता है।
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए हम मुख्य रूप से ‘तिलक होली’ या ‘सूखी होली’ खेलने को प्राथमिकता देते हैं। यह समाज के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी को दर्शाता है। जब हम अपनी परंपराओं को आधुनिक मूल्यों; जैसे- पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक सेवा के साथ जोड़ते हैं, तो वह पर्व और भी गरिमामय बन जाता है।
प्रश्न 4.
“बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।”
पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
उत्तर:
आज के परिवेश के आधार पर उत्सवों को मनाने की परंपराओं में आए बदलावों को हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं-
लता जी के बचपन से अब तक आए प्रमुख बदलाव:
- लता जी के समय में उत्सवों (जैसे मंगलागौर) में महिलाएँ स्वयं पारंपरिक गीत गाती थीं और सामूहिक नृत्य करती थीं। आज इन उत्सवों में ‘लाइव’ गायन की जगह रेकॉर्डेड म्यूजिक डीजे और लाउडस्पीकर ने ले ली है।
- पहले त्योहारों पर पूरा मोहल्ला और रिश्तेदार एक जगह जमा होते थे और हफ्तों तक तैयारियाँ चलती थीं। अब भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण त्योहार केवल लोग व्यक्तिगत रूप से मिलने के बजाय सोशल मीडिया पर शुभकामनाएँ देना पसंद करते हैं।
- पुराने समय में रंगों, फूलों और मिट्टी के दीयों जैसी प्राकृतिक चीजों का महत्त्व था। अब उनकी जगह केमिकल वाले रंगों, प्लास्टिक की सजावट और बिजली की झालरों ने ले ली है।
अनुमानित बातचीत के आधार पर उत्सवों में आए बदलाव:
- पहले घरों में महिलाएँ मिलकर गुझिया, मठरी या विशेष पकवान बनाती थीं। अब समय की कमी के कारण लोग बाजार से रेडीमेड मिठाइयाँ और डिब्बाबंद भोजन खरीदना अधिक पसंद करते हैं।
- पहले त्योहारों का अर्थ खेल-कूद, गपशप और साथ बैठकर खाना होता था। अब त्योहारों पर भी लोग मोबाइल और सोशल मीडिया पर फोटो डालने और वीडियो बनाने में अधिक व्यस्त रहते हैं।
- पहले के उत्सवों में सादगी और भक्ति का भाव अधिक था। आज त्योहारों में प्रदर्शन और शोर-शराबा ज्यादा बढ़ गया है। सादगीपूर्ण ‘मंगलागौर’ जैसे कार्यक्रमों का स्थान अब ‘ग्रैंड पार्टियों’ ने ले लिया है।
- पहले लोग घर की बनी चीजें या फल उपहार में देते थे। अब महँगे गैजेट्स, गिफ्ट वाउचर या कैश देने का चलन बढ़ गया है।
बेशक तकनीक और आधुनिकता ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, लेकिन त्योहारों के पीछे का ‘नि:स्वार्थ सौहार्द’ और ‘सामूहिकता’ का भाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। लता जी के बचपन के प्रसंग हमें उन्हीं पुराने मूल्यों और परंपराओं की याद दिलाते हैं, जहाँ कला और प्रेम का सुंदर संगम था।
विधा से संवाद
साक्षात्कार की पड़ताल
प्रश्न 1.
“ऐसी भी बातें होती हैं” एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर:


प्रश्न 2.
“मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।”
इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है – क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर:
लता जी का कथन “मैं कोशिश करूँगी…” यह दर्शाता है कि यह एक आत्मीय बातचीत है। यद्यपि यह एक औपचारिक साक्षात्कार है, परंतु लता जी की विनम्रता, पुरानी यादों को साझा करने का तरीका और “दीदी” जैसे संबोधन इसे एक आत्मीय संवाद बना देते हैं। यहाँ ज्ञान का अहंकार नहीं, बल्कि अपनी जीवन यात्रा को साझा करने का सरल भाव है।
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आपका साक्षात्कार
“आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।”
प्रस्तुत पाठ में विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
उत्तर:
यदि मैं वहाँ होता / होती, तो लता जी से ये प्रश्न पूछता / पूछती-
प्रश्न : इतनी ख्याति मिलने के बाद क्या कभी आपको ऐसा लगा कि आपका बचपन कहीं खो गया है?
कारण : यह जानने के लिए कि एक महान कलाकार व्यक्तिगत बलिदान को किस दृष्टि से देखता है।
प्रश्न : “रियाज़ के दौरान जब कोई कठिन राग सिद्ध नहीं होता था, तब आप खुद को कैसे प्रेरित करती थीं?”
कारण : उनकी कार्य-प्रणाली और धैर्य को समझने के लिए।
प्रश्न : आपने अपने संघर्ष के दिनों में खुद को कैसे प्रेरित रखा?
कारण : क्योंकि यह युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
प्रश्न : आज के नए गायकों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी?
कारण : मार्गदर्शन के लिए।
प्रश्न : आपको अपने जीवन का सबसे यादगार गीत कौन-सा लगता है?
कारण : उनकी पसंद जानने के लिए।
प्रश्न : क्या कभी ऐसा समय आया जब आपने हार मानने का सोचा?
कारण : संघर्ष को समझने के लिए।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1.
“एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।”
सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से….. रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?
(संकेत – भोजन, यात्रा भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
उत्तर:
लता मंगेशकर जी के शुरुआती संघर्ष के दिनों को देखते हुए, एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो की भागदौड़ भरे उनके एक दिन की कल्पना कुछ इस प्रकार की जा सकती है:
लता जी का एक काल्पनिक और संघर्षपूर्ण दिन-
1. सुबह की शुरुआत और रियाज : दिन की शुरुआत भोर में ही हो जाती होगी। घर की जिम्मेदारियों और भाई-बहनों की देखरेख के साथ-साथ, वे अपने स्वर को साधने के लिए कुछ घंटे रियाज करती होंगी। इसके बाद, हाथ में टिफिन और पानी की बोतल लेकर वे काम की तलाश या रेकॉर्डिंग के लिए निकलती होंगी।
2. यात्रा और भाड़े की चुनौती : लता जी अकसर लोकल ट्रेन और बसों में सफर करती होंगी। चिलचिलाती धूप या भारी बारिश में एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक पहुँचने के लिए उन्हें घंटों यात्रा करनी पड़ती होगी। स्टूडियो के बीच यात्रा करते समय भी उनका दिमाग शांत नहीं बैठता होगा। वे कठिन शब्दों के उच्चारण और उर्दू के अल्फाजों को सही तरह से बोलने का अभ्यास चलती ट्रेन या बस में भी करती रहती होंगी।
अपनी कम कमाई में से बस और ट्रेन का भाड़ा बचाना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती रही होगी, ताकि वे घर के लिए पैसे बचा सकें।
3. भोजन : एक गायक के लिए गला सबसे महत्वपूर्ण होता है। स्टूडियो की भागदौड़ में उन्हें अक्सर भूखा-प्यासा रहना पड़ता होगा। बाहर का खाना गले के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए वे घर का सादा भोजन ही पसंद करती होंगी। कई बार रेकॉर्डिंग के लंबे घंटों के बीच उन्हें केवल चाय या पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता होगा।
4. सुरक्षा : उस जमाने में एक युवा लड़की के लिए फिल्म इंडस्ट्री के माहौल में अकेले यहाँ-वहाँ जाना आसान नहीं था। देर रात रेकॉर्डिंग खत्म होने के बाद अकेले घर लौटना असुरक्षित महसूस होता होगा, लेकिन अपने परिवार की ज़िम्मेदारी और पिता के नाम को आगे बढ़ाने के संकल्प के कारण उनमें हिम्मत आ जाती होगी। 5. मानसिक और शारीरिक थकान दिन भर में कई संगीत निर्देशकों से मिलना, बार-बार रिहर्सल करना और एक ही गाने को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए कई टेक देना उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से थका देता होगा।
प्रश्न 2.
“पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाज़ों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रेकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।”
अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिसमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
उत्तर:
ऐसे अनेक कार्य होते हैं जिनमें विभिन्न स्तरों पर सहयोग की आवश्यकता होती है। जैसे-घर आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय आदि में विभिन्न प्रकार के कार्य सामूहिक होते हैं।
घर – घर में प्रायः सभी कार्य आपसी सहयोग से होते हैं जैसे- धन कमाना, खाना बनाना, सफाई इत्यादि। इसके अतिरिक्त जन्मदिन मनाना, विवाह की वर्षगाँठ मनाना अथवा दुखद परिस्थितियों में भी आपसी सहयोग से कार्य होता है।
आस-पड़ोस – कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान, सामूहिक रूप से किसी के सुख-दुख में शामिल होना इत्यादि सामूहिक सहयोग के कार्य होते हैं।
समुदाय – समुदाय में प्रायः संचालित करने वाला वर्ग मिलकर प्रत्येक कार्य को रूप देते हैं जैसे- कोई सांस्कृतिक कार्य का आयोजन, स्वच्छता एवं जागरूक आयोजन, पर्व इत्यादि हेतु मेले व अन्य कार्यक्रम का आयोजन, स्वास्थ्य संबंधी शिविर इत्यादि का आयोजन। प्रस्तुत सभी कार्य सहयोग से पूर्ण होते हैं।
विद्यालय – विद्यालय में तो सभी कार्य सहयोग से होते हैं। अध्यापकों का बच्चों को मिलकर पढ़ाना अनेक उत्सवों में बच्चों का मिलकर भाग लेना, मिलकर पढ़ना, परीक्षा देना, खेल में भाग लेना इत्यादि।
विशेष – देखा जाए तो आपसी सहयोग से ही यह दुनिया चलती है। अकेले व्यक्ति से न तो परिवार निर्मित होगा और न ही विद्यालय, समुदाय या समाज।
शास्त्रीय संगीत
प्रश्न 1.
“फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।”
रागदारी वाले गायन का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए-

उत्तर:
राग : स्वरों का वह विशिष्ट समूह जो मन को प्रसन्न करे और जिसमें निश्चित नियम हों।
सुर : संगीत की मूल ध्वनि (सा, रे, ग, म, प, ध, नि)।
बंदिश : शास्त्रीय संगीत की वह रचना जिसमें शब्दों और सुरों को ताल में बाँधा जाता है।
अभंग : महाराष्ट्र के संतों द्वारा रचित भक्ति गीत (विशेषकर विट्ठल भक्ति)।
सोहर : संतान के जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले मांगलिक गीत।
फाग : होली के उत्सव पर गाए जाने वाले लोकगीत।
बधावा : खुशी के अवसर पर बधाई के रूप में गाए जाने वाले गीत।
प्रश्न 2.
“त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।” आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
गीत जीवन में हर्षोल्लास के प्रतीक होते हैं विशेषकर जब घर में जन्मोत्सव अथवा विवाह के शुभ अवसर होते हैं तो ये गीत वातावरण में रंग भर देते हैं। हमारे घर में भी जब बड़ी बहन का विवाह तय हुआ तो विवाह के दिन मामा जी भात लेकर आए तब उन्हें दरवाजे पर ही रोक कर पहले उनका तिलक व आरती का कार्यक्रम हुआ फिर भात का गीत गाया गया, जो इस प्रकार था –
नई चाल को भात
उढ़इयो मेरे भाइय
ससुर को चाहे जो ले आना
सास है तब तू
लहंगा लाईयो भातइया नई चाल ……..
जेठ को चाहे जो ले आना
जेठानी है नखरेबाज तू
सूट लइयो भातइया नई चाल ………
देवर को चाहे जो ले आना
देवरानी है फैशनदार तू
प्लाजो लइयो भातइया नई चाल ……..
नन्देऊ को चाहे जो ले आना
नंद है गुस्सेबाज तू
जींस लइयो भातईया नई चाल ………
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साइबर सुरक्षा
प्रश्न 1.
“आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।”
आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज / ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
https://cybercrime.gov.in/UploadMedia/CyberSafety Hindi.Pdf
उत्तर:
आज के डिजिटल युग में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ जहाँ एक वरदान है, वहीं इसके गलत इस्तेमाल से ‘वॉयस क्लोनिंग’ जैसी धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। ठग अब एआई का उपयोग करके आपके परिचितों, रिश्तेदारों या अधिकारियों की आवाज की हूबहू नकल कर लेते हैं और आपात स्थिति का झाँसा देकर पैसे ऐंठते हैं।
‘साइबर सुरक्षा’ के नियमों का पालन करते हुए हम इस प्रकार के खतरों से बच सकते हैं-
- अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ एक ‘गुप्त कोड’ या ‘सेफ वर्ड’ तय करें। यदि कभी कोई ऐसी कॉल आए, जिसमें पैसे की माँग की जा रही हो, तो उस व्यक्ति से वह गुप्त कोड पूछें। यदि वह कोड नहीं बता पाता, तो समझ जाएँ कि वह आवाज़ नकली है।
- यदि आपको किसी प्रियजन की आवाज़ में कॉल आए कि वे मुसीबत में हैं, तो घबराएँ नहीं। तुरंत उस कॉल को काटें और उस व्यक्ति के ‘मूल नंबर’ पर कॉल करके सच्चाई का पता लगाएँ।
- ठग अकसर आपको बातों में उलझाए रखते हैं ताकि आप सोचने का समय न पा सकें। उनसे कहें कि आप 5 मिनट में कॉल करते हैं। यह समय आपको स्थिति का आकलन करने और सुरक्षा जाँच करने का मौका देगा।
- सोशल मीडिया पर अपनी आवाज के वीडियो या बहुत अधिक व्यक्तिगत जानकारी (जैसे-बैंक विवरण, पता आदि) साझा करने से बचें। ठग अकसर इन वीडियो से आपकी आवाज़ का नमूना लेकर उसकी नकल कर लेते हैं।
- किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजान ईमेल अटैचमेंट को न खोलें, क्योंकि ये आपके फोन या कंप्यूटर से डेटा चुराने का जरिया हो सकते हैं।
- अपने सभी सोशल मीडिया और बैंकिंग ऐप्लीकेशन पर (2FA) चालू रखें। इससे यदि किसी के पास आपकी कुछ जानकारी पहुँच भी जाए, तो भी वे आपके खातों तक आसानी से नहीं पहुँच सकें।
- यदि आपके साथ या किसी परिचित के साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत भारत सरकार के साइबर अपराध पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
• विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक में दिए लिंक को खोलकर सुरक्षा नियम पढ़ सकते हैं।
हम ऐसे भी बोलते हैं
“ वे बस हमको गंभीरता से देखते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।”
प्रश्न 1.
क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव ) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
उत्तर:
हाँ, हमारे पिताजी ऐसे व्यक्ति थें जो हमें डाँटते नहीं थें और जब कभी हम ज्यादा शरारत करते तो बस गुस्से से घूरते थें और हाथ के इशारे से चुपचाप बैठकर पढ़ने के लिए कहते थें। तब हम दोनों बहन-भाई शरारत छोड़कर चुपचाप पढ़ने बैठ जाते। वैसे हमारे पापा हमें बहुत प्यार करते थें।
प्रश्न 2.
यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
(संकेत – धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)
उत्तर:
यदि कोई व्यक्ति बोल नहीं सकता, इस कारण वह अपनी बात इशारों से समझा रहा है, तो हम उससे सहानुभूति रखते हुए धैर्य से उसकी बात को समझने का प्रयास करेंगे। उसके द्वारा कही गई बात को जिज्ञासापूर्वक जानना चाहेंगे। हम उसके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करेंगे और उसे यकीन दिलाएँगे कि हम उसकी बात समझना चाहते हैं। हम केवल यकीन ही नहीं दिलाएँगे, अपितु उसकी बातों को ध्यानपूर्वक समझेंगे भी।
सृजन
प्रश्न 1.
“अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ”, कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940-50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
उत्तर:
डायरी लेखन
दिनांक : 15 मार्च, 1950
स्थान : मुंबई (बॉम्बे)
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे अद्भुत दिन रहा। मेरे पास टाइम मशीन थी, जिससे मैं 1949 के समय में पहुँच गया / गई। वहाँ मेरी मुलाकात महान गायिका लता मंगेशकर जी से हुई।
सुबह का समय था। लता जी बहुत सादे कपड़ों में थीं- सफेद साड़ी, बिना किसी आडंबर के उनके चेहरे पर सादगी और आत्मविश्वास झलक रहा था। घर का वातावरण भी बहुत साधारण था। उन्होंने सुबह रियाज किया। उनकी मधुर आवाज सुनकर मन मंत्रमुग्ध हो गया।
दोपहर में उन्होंने साधारण भोजन किया- रोटी, सब्जी और दाल। फिर वे जल्दी-जल्दी स्टूडियो के लिए निकल गई। वहाँ मैंने देखा कि वे कितनी मेहनत करती हैं। एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक जाना, घंटों रेकॉर्डिंग करना – यह सब बहुत कठिन था। शाम को वे बहुत थकी हुई थीं, फिर भी चेहरे पर संतोष था। उन्होंने बताया कि वे यह सब अपने परिवार के लिए करती हैं।
आज मैंने सीखा कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत, त्याग और समर्पण होता है। यह दिन मैं कभी नहीं भूलूँगा / भूलूँगी।
प्रश्न 2.
“आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है- आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
अनुच्छेद लेखन
लता जी के अंतिम संदेश पर प्रतिक्रिया
लता जी का यह संदेश “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं”- हमें जीवन की उस कड़वी सच्चाई से रूबरू कराता है जिसे हम अकसर भूल जाते हैं। उनकी आवाज हमारे लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। उनकी अमरता उनके पुरस्कारों में नहीं, बल्कि उन करोड़ों दिलों की धड़कनों में है जो उनके गीतों से सुकून पाते हैं। जब वे स्वयं को ईश्वर और प्रशंसकों की कृपा का पात्र मानती हैं, तो यह उनकी महानता और विनम्रता की पराकाष्ठा है। शरीर तो नश्वर है, पर उनके मधुर गीत हमारे मन मष्तिष्क को शांति और सुकून पहुँचाते रहेंगे। वे कल भी ‘भारत की आवाज’ थीं और हमेशा रहेंगी।
भाषा से संवाद
मुहावरे
“मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है – कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
• हाथ में आना
• हाथ का मैल होना
• हाथ से हाथ मिलाना
• हाथ साफ करना
• हाथ से निकल जाना
• हाथ धो बैठना
उत्तर:

हमारी भाषाएँ
प्रश्न 1.
“’गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।” आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त कहावत को पंजाबी और यू.पी. की भाषा में इस प्रकार कहेंगे-
1. पंजाबी : “पिंड गया तां नाव वी गई”
या
“बेला लंघ गया, मौका वी लंघ गया”
2. यू. पी. (पूर्वांचल / देहाती भाषा में:
“गाँव गवा दिहल, नावो छूट गइली”
3. गढ़वालीः “बखत ग्यो, मौका भी भी ग्यो”
प्रश्न 2.
लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए । अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
उत्तर:
(कुछ भाषाओं की कहावतों के उदाहरण)
1. पंजाबी कहावत
“जिहड़ा बोवे ओह ही काटे”
अर्थ : जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।
2. पहाड़ी कहावत
“बखत पै काम, बाद में नाम”
अर्थ : समय पर काम करना जरूरी है, तभी सम्मान मिलता है।
3. यू.पी. कहावत
“जैसा करब, वैसा भरब”
अर्थ : जैसा करोगे, वैसा फल पाओगे।
4. भोजपुरी
“जाके पाँव ना फाटे बिवाई, ऊ का जाने पीर पराई”
अर्थ : जिसके स्वयं दुख नहीं झेला, वह दूसरों का दर्द समझ नहीं सकता।
5. राजस्थानी
“घर रो भेदी लंका ढाए”
अर्थ : अपना ही व्यक्ति नुकसान कर देता है।
6. पंजाबी
“जित्थे दी खोती, ओथ्थे आ खलोती”
अर्थ : गलत व्यक्ति वहीं जाकर रुकता है जहाँ उसकी जगह होती है।
7. बुंदेलखंडी
“धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय”
अर्थ : धैर्य रखने से ही काम सफल होता है।
8. गढ़वाली
“एक हाथ से ताली नि बजदी”
अर्थ : किसी भी बात में दोनों पक्षों की भूमिका होती है।
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प्रश्न 3.
एक ‘सेतु चित्र’ बनाइए जिसमें दो – किनारे हों एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
उत्तर:

गतिविधियाँ
प्रश्न 1.
‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर ‘नाम रह जाता है..’ लिखिए और नीचे विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘नाम’ शब्द (जैसे- नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मिङ, पेरु, नामम् आदि) लिखिए। साथ ही कक्षा में सब विद्यार्थी मिलकर एक प्रतिज्ञा लें- ‘हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।’
उत्तर:

प्रश्न 2.
कागज पर एक पेड़ का चित्र बनाइए। इसे नाम दीजिए- भाषा – वृक्ष। इसकी जड़ में लिखिए- ‘भारतीय संस्कृति’; तने पर और शाखाओं पर लिखिए- हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि। हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़िए।
उत्तर:

प्रश्न 3.
समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लिए, एक विषय हो सकता है- ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।’
उत्तर:
यहाँ एक समाचार बुलेटिन का प्रारूप दिया गया है, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा (मराठी चूँकि पाठ लता मंगेशकर जी पर आधारित है) का मिश्रण है:
समाचार बुलेटिन : ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं-
• न्यूज एंकर : नमस्कार !आज के विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। मैं हूँ (आपका नाम) और आज हम बात करेंगे, उस शक्ति की जो सरहदों, धर्मों और भाषाओं की दीवारों को गिरा देती है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ‘कला’ की।
• संवाददाता : कला ही वह सूत्र है जो मानवता को एक साथ पिरोता है। ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ पाठ में हमने देखा कि कैसे सुरों की मलिका लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ से पूरी दुनिया को एक किया।
चाहे वो हिंदी सिनेमा के गीत हों या शास्त्रीय संगीत, कला हमेशा दिलों को जोड़ने का काम करती है। लता जी ने न केवल हिंदी, बल्कि भारत की लगभग हर क्षेत्रीय भाषा में अपनी कला का जादू बिखेरा।
लता दीदी हमेशा कहती थीं कि ‘संगीत हे ईश्वराचे रूप आहे आणि ते माणसांना एकमेकांशी जोडते’ यानी संगीत ईश्वर का रूप है और यह इंसानों को एक-दूसरे से जोड़ता है।
• समाचार प्रस्तुतकर्ता : बिल्कुल सही। जब कोई कलाकार मंच पर होता है, तो दर्शक उसकी जाति या भाषा नहीं, बल्कि उसकी साधना देखते हैं। भाषाएँ अलग हो सकती हैं, पर सुरों की कोई भाषा नहीं होती। कला वह पुल है जो हमें नफरत की खाई से पार ले जाकर प्रेम की ज़मीन पर खड़ा करती है।
ताजा समाचारों के लिए जुड़े रहिए- कला को प्यार दें, इंसानियत को जोड़ें।
धन्यवाद!
प्रश्न 4.
भाषाई स्मृति पोटली
अपने परिवार में प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओं के पाँच शब्द एकत्र कीजिए (जैसे- दादी मराठी बोलती हों, माँ हिंदी)। उन्हें एक ‘शब्द पोटली’ में कार्ड पर सजाइए।
उत्तर:


प्रश्न 5.
स्वर- कोलाज
उत्तर:

प्रश्न 6.
समय-रेखा
लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।
उत्तर:
लता मंगेशकर जी के जीवन की कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ और उनके वर्ष निम्नलिखित हैं-
- 1929 : 28 सितंबर को इंदौर में जन्म (बचपन का नाम ‘हेमा’ था, बाद में ‘लता’ रखा गया)।
- 1942 : पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर का निधन। इसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘पहिली मंगलागौर (मराठी) में अभिनय और गायन किया।
- 1943 : पहली बार हिंदी फिल्म ‘गजाभाऊ’ के लिए गाना गाया (‘माता एक सपूत की दुनिया बदल दे तू’)।
- 1948: फिल्म ‘मजबूर’ के गाने ‘दिल मेरा तोड़ा’ से उन्हें पहली बड़ी पहचान मिली, जो मास्टर गुलाम हैदर के निर्देशन में था।
- 1958 : फिल्म ‘मधुमती’ के गाने ‘आजा रे परदेशी’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
- 1963 : 27 जनवरी को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में प्रसिद्ध देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया, जिसे सुनकर नेहरू जी की आँखों में आँसू आ गए थे।
- 1969 : भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित।
- 1974 : दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने के लिए ‘गिनीज बुक ऑफ रेकार्ड्स’ में उनका नाम दर्ज हुआ।
- 1989 : भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
- 1999 : भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित।
- 2001 : उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न’ से नवाजा गया।
- 2022 : 6 फरवरी को 92 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हुआ। भारत सरकार ने उनके सम्मान में दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की।
भाषा संगम
“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”
नीचे ‘संगीत’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
संगीत (हिंदी); सङ्गीतम् (संस्कृत); संगीत (पंजाबी); मूसीकी, मौसिकी (उर्दू); मूसीकी, संगीत (कश्मीरी); संगीत ( सिंधी); संगीत कला (मराठी); संगीतकळा (ला) (गुजराती); संगीत (कोंकणी); संगीत (नेपाली); संगीत (बांग्ला); संगीत (असमिया); ईशै (मणिपुरी); संगीत (ओड़िआ); संगीतमु (तेलुगु); संगीतम्, इशै (तमिल); संगीतम् (मलयालम); संगीत (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
1. संगीत को संथाली और मैथिली भाषा में-
संथाली भाषा में (संगीत) – सैरंग
मैथिली भाषा में (संगीत) – संगीत

पंजाबी में : “ओह दिन घर विच संगीत दी सभा हुँदी सी”।
भोजपुरी में : “ओह दिन घर में संगीत के सभा होत रहत रहे”।
पूर्वांचल में : “उस दिन घर में गाना-बजाना होत रहा”।
राजस्थानी में : “ओ दिन घर में संगीत री सभा होत री।”
गुजराती में : “एक दिवस घरमा संगीतनी सभा चालती हती”।
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खोजबीन
लता मंगेशकर से जान-पहचान
प्रश्न 1.
“जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे।”
लता जी ने बचपन में मेडल पाने की कल्पना की और जीवन में अनगिनत पुरस्कार और मेडल प्राप्त भी किए। पता कीजिए कि उन्होंने जीवन भर में कौन-कौन से ‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त किए?
उत्तर:
उन्हें प्राप्त कुछ प्रमुख सम्मान निम्नलिखित हैं:
- भारत रत्न (2001) भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- पद्म विभूषण (1999) और पद्म भूषण (1969) : कला के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए।
- दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1989) : भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान।
- फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान (2010) : लीजन ऑफ ऑनर के नाइट।
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार : 3 बार (सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका)
- फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (1993)।
- विशेष पदक : जैसा कि उन्होंने साक्षात्कार में कहा था, उन्हें विभिन्न रियासतों और संगीत सभाओं से स्वर्ण पदक भी प्राप्त हुए थे।
विद्यार्थी इनके अलावा भी स्वयं खोजकर सूची बनाएँ।
प्रश्न 2.
पाठ में लता मंगेशकर ने कई फिल्मों और गीतों का उल्लेख किया है। इंटरनेट की सहायता से इनमें से किसी एक फिल्म और गीत को देखकर उसके विषय में अपने विचार लिखिए। आपको यह फिल्म और गीत कैसा लगा और क्यों?
उत्तर:
पाठ में वर्णित फिल्मों और गीतों में से मुझे ‘महल’ (1949) फिल्म का गीत ‘आएगा आने वाला सबसे अधिक प्रभावित करता है। इसके पीछे के मेरे विचार निम्नलिखित हैं-
फिल्म ‘महल’-
यह भारतीय सिनेमा की पहली ‘हॉरर’ या ‘सस्पेंस थ्रिलर ‘ फिल्मों में से एक मानी जाती है। इसकी कहानी पुनर्जन्म और एक पुराने महल में भटकती हुई आत्मा के इर्द-गिर्द घूमती है। इस फिल्म में अशोक कुमार और मधुबाला ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मधुबाला की सुंदरता और उनके रहस्यमयी किरदार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। उस दौर के हिसाब से इस फिल्म की लाइटिंग और छायांकन बहुत ही शानदार थी, जिसने महल के डरावने और रहस्यमयी माहौल को पर्दे पर बखूबी उतारा।
गीत ‘आएगा आने वाला’
लता जी की आवाज की जो ‘खनक’ और ‘स्पष्टता’ इस गीत में सुनाई देती है, उसने पार्श्वगायन के स्तर को बहुत ऊँचा उठा दिया। उनकी आवाज में एक अजीब-सी कशिश है जो सीधे दिल को छूती है। इस गीत का संगीत और गायन की शैली एक रहस्यमयी वातावरण पैदा करती है। गाने की शुरुआत में जिस तरह से ‘भटकाव’ और ‘इंतज़ार’ के भाव हैं, सुनने वाले को एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं।
यह फिल्म और गीत मुझे बहुत अच्छे लगे, क्योंकि मुझे रहस्यमयी कहानियाँ पसंद हैं। यह गीत मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि यह न केवल एक बेहतरीन रचना है, बल्कि यह एक महान कलाकार के कठिन परिश्रम और उनकी अद्भुत प्रतिभा का जीवंत प्रमाण भी है।
यदि आप पुरानी फिल्मों और रहस्यमयी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म एक ‘क्लासिक’ अनुभव प्रदान करती है।
प्रश्न 3.
अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ सुन सकते हैं।
https://youtu.be/CF_RqQF99Iw?si=7CG_ zpv8XW5Hprmi
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।
ऊपर दी गई इंटरनेट कड़ी पर क्लिक करें और गीत सुनें।