Students prefer NCERT Class 9 Hindi Book Ganga Solutions and Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 Question Answer झाँसी की रानी Kavita that are written in simple and clear language.
Class 9 Hindi Chapter 11 झाँसी की रानी Question Answer
झाँसी की रानी Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 11 Question Answer – Class 9 Hindi झाँसी की रानी Kavita Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 184-192)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान
(ख) विद्रोह की चिंगारी
(ग) स्वाधीनता का भय
(घ) भारत की युवावस्था
उत्तर:
(ख) विद्रोह की चिंगारी
तर्क – वर्षों की गुलामी से भारत शिथिल (बूढ़ा) हो चुका था। ‘नई जवानी’ का अर्थ है देशवासियों के मन में आजादी पाने का नया उत्साह और अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने का साहस पैदा होना।
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता
(ख) शोभायुक्त
(ग) सहिष्णुता
(घ) कठोरता
उत्तर:
(ख) शोभायुक्त
तर्क – ‘छबीली’ का अर्थ होता है सुंदर और चंचल । बचपन में लक्ष्मीबाई अपनी चपलता, सुंदरता और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण सबके मन को मोह लेती थीं।
प्रश्न 3.
“बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है-
(क) अंग्रेज़ों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना
उत्तर:
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
तर्क – यहाँ ‘दीप’ राजा गंगाधर राव का प्रतीक है। उनके निधन से झाँसी का राजकुल शोक में डूब गया और उत्तराधिकारी न होने के कारण राज्य का भविष्य अंधकारमय हो गया।
प्रश्न 4.
“इस स्वतंत्रता – महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन
(ग) 1857 की क्रांति
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
उत्तर:
(ग) 1857 की क्रांति
तर्क – यह कविता स्पष्ट रूप से ‘सन् सत्तावन’ (1857) के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन करती है। इसमें नाना
साहब, तात्या टोपे और कुँवर सिंह जैसे वीरों के बलिदान का वर्णन है।
प्रश्न 5.
“व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए
(ख) जनरल डलहौजी के लिए
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
(घ) ब्रिटिश राज के लिए
उत्तर:
(घ) ब्रिटिश राज के लिए
तर्क – ईस्ट इंडिया कंपनी (ब्रिटिश राज) शुरुआत में भारत में केवल व्यापार करने के बहाने आई थी और यहाँ के राजाओं से विनम्रतापूर्वक व्यापार की अनुमति माँगी थी। लेकिन धीरे-धीरे उन्होनें यहाँ की राजनीति में हस्तक्षेप किया और पूरे भारत पर अपना शासन स्थापित कर लिया।
![]()
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल साधारण बालिकाओं जैसे गुड़िया-खिलौने नहीं थे। वे नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना, सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना और शिकार खेलना पसंद करती थीं। उनके खिलौने बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी थे। वे बचपन से ही युद्ध कला में निपुण थीं।
प्रश्न 2.
“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर:
यह पंक्ति राजा गंगाधर राव की आकस्मिक मृत्यु और उसके बाद झाँसी पर आने वाले दुखों के संकट की ओर संकेत करती है। रानी का विधवा होना झाँसी के लिए ‘काली घटा’ के समान था क्योंकि अंग्रेजों की नजर अब झाँसी को हड़पने पर थी।
प्रश्न 3.
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर:
इस पंक्ति का महत्व यह है कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजाओं या सैनिकों का विद्रोह नहीं था, बल्कि इसमें अमीर (महल) और गरीब (झोंपड़ी) सभी वर्गों ने भाग लिया था। जब समाज के सभी वर्ग एक साथ मिल जाते हैं, तो वह एक शक्तिशाली जन आंदोलन बन जाता है। इस एकता ने अंग्रेजों की नींव हिला दी और भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना पैदा की।
प्रश्न 4.
“सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उत्तर:
यह अंग्रेजों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। वे भारत के राजघरानों की संपत्ति, जेवर और यहाँ तक कि रानियों के कीमती कपड़ों को भी अखबारों में विज्ञापन देकर नीलाम करते थे। इससे वे भारतीय शासकों का अपमान करना और अपना आर्थिक लाभ साधना चाहते थे।
प्रश्न 5.
“अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?

उत्तर:
लक्ष्मीबाई को अवतारी इसलिए कहा गया क्योंकि मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो वीरता दिखाई, वह किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं थी। उनमें अदम्य साहस, युद्ध कौशल, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर करने का जो जज्बा था, जो उन्हें देवी या दैवीय अवतार के समान पूजनीय बनाता है।
![]()
विधा से संवाद
कविता में कहानी
यह कविता लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और अपनी संरचना में एक कथात्मक कविता है। कथात्मक कविता ऐसी कविता को कहते हैं जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है। इस कविता में भी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त होने तक की कथा क्रम से देखने को मिलती है। पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ।
(संकेत – लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई: जीवन समय-रेखा-
- बचपन (छबीली का अवतार) – कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन के रूप में बचपन बीता। बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी ही उनके बचपन के खिलौने थे। वे बचपन से ही वीर शिवाजी की गाथाएँ सुनती थीं और युद्ध कला में निपुण थीं।
- झाँसी आगमन (विवाह) – उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ। वे झाँसी की रानी बनकर राजमहल में आईं, जहाँ खुशियों का आगमन हुआ।
- वैधव्य का दुख – विवाह के कुछ समय बाद ही राजा गंगाधर राव की आकस्मिक मृत्यु हो गई। रानी कम उम्र में ही विधवा हो गईं और झाँसी का राजमहल शोक में डूब गया। चूँकि उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए झाँसी ‘लावारिस’ हो गई।
- अंग्रेज़ों की चाल (हड़प नीति) – गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने झाँसी की लावारिस स्थिति का फायदा उठाया और अपनी हड़प नीति के तहत झाँसी पर कब्जा करने की कोशिश की।
- विद्रोह का संकल्प – जब अंग्रेज़ों ने झाँसी को हड़पने का प्रयास किया, तब रानी ने साहस दिखाया और कहा- “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।” उन्होंने महलों से निकलकर रणचंडी का रूप धारण किया और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।
- ऐतिहासिक युद्ध – 1857 की क्रांति के दौरान रानी ने कालपी, ग्वालियर और कई अन्य मोर्चों पर अंग्रेजों (विशेषकर जनरल ह्यू रोज) को कड़ी टक्कर दी। उन्होंने अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए कई शहरों को आजाद कराया।
- वीरगति – अकेले लड़ते हुए और शत्रुओं से घिर जाने के बाद भी वे डटी रहीं। अंत में वीरतापूर्वक लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अमर हो गया।
विषयों से संवाद
साझा साथ / साझा संघर्ष
प्रश्न 1.
“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था ? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।
उत्तर:
ब्रिटिश राज ‘हड़प नीति’ के कारण लावारिस का वारिस बन जाता था। इस क्रूर नीति को भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने लागू किया था।
इस नीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे-
- उत्तराधिकार पर प्रतिबंध – इस नीति के अनुसार, यदि किसी भारतीय रियासत के राजा की मृत्यु बिना किसी सगे वारिस के हो जाती थी, तो वह राज्य स्वतः ही ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बन जाता था।
- गोद लेने की मनाही – राजा को अपनी मृत्यु से पहले किसी बालक को गोद लेकर उसे अपना उत्तराधिकारी बनाने का अधिकार नहीं था। ब्रिटिश सरकार ऐसे दत्तक पुत्र को कानूनी वारिस नहीं मानती थी।
- ‘लावारिस’ का अर्थ – जब किसी राज्य का अपना कोई सगा वारिस नहीं होता था, तो अंग्रेज़ उसे ‘लावारिस’ घोषित कर देते थे और स्वयं उसके ‘वारिस’ बनकर उस पर कब्जा कर लेते थे।
- झाँसी के संदर्भ में – झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद उनकी कोई संतान नहीं थी। रानी लक्ष्मीबाई ने दामोदर राव को गोद लिया था, लेकिन लॉर्ड डलहौजी ने इस उत्तराधिकार को अवैध घोषित कर दिया। डलहौजी ने ‘हड़प नीति’ का सहारा लेकर झाँसी को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। इसी अन्याय के कारण रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध का नेतृत्व किया और वीरता की मिसाल कायम की।
प्रश्न 2.
इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
उत्तर:
सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता ‘झाँसी की रानी’ में लक्ष्मीबाई के साथ-साथ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कई महान क्रांतिकारियों का उल्लेख किया गया है। यहाँ उन वीरों की सूची और उनके योगदान का विवरण दिया गया है-
1857 की क्रांति के प्रमुख वीर और उनका योगदान
| वीर क्रांतिकारी का नाम | 1857 की क्रांति में योगदान |
| नाना धुंधूपंत (नाना साहब) | इन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया। वे पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के मुख्य रणनीतिकार थे। |
| तात्या टोपे | ये एक महान सेनापति थे जिन्होंने गुरिल्ला युद्ध शैली के माध्यम से अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। इन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की भी सहायता की थी। |
| अजीमुल्ला खाँ | ये नाना साहब के सलाहकार थे। इन्होंने क्रांति के प्रचार-प्रसार और योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। |
| अहमद शाह मौलवी | इन्हें ‘मौलवी अहमदुल्ला शाह’ के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने फैजाबाद में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और जबरदस्त प्रतिरोध किया। |
| ठाकुर कुँवर सिंह | बिहार के जगदीशपुर के जमींदार, जिन्होंने 80 वर्ष की आयु में भी अदम्य साहस दिखाते हुए अंग्रेजों से युद्ध किया और विजय प्राप्त की। |
| अजीजन बाई | कविता में ‘अजीजन’ का उल्लेख एक साहसी महिला के रूप में है, जिन्होंने विद्रोहियों का साथ दिया और स्वतंत्रता की वेदी पर खुद को समर्पित किया। |
प्रश्न 3.
यह कविता जिस समय और परिवेश में लिखी गई है, उसमें युद्ध और अन्य साहसिक कार्य करना सामान्यतः पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। नीचे कुछ ऐसे ही कार्यक्षेत्र दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली स्त्रियों के नाम और उनके विषय में लिखिए। आप चाहें तो इसमें अपनी समझ के अनुसार कुछ और कार्यक्षेत्र भी जोड़ सकते हैं।

उत्तर:
वर्तमान कार्यक्षेत्र में महिलाएँ:
| कार्यक्षेत्र | प्रसिद्ध महिला का नाम | संक्षिप्त विवरण |
| दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड) | हर्षिनी कान्हेकर | भारत की पहली महिला फायर फाइटर। |
| रेलगाड़ी चालक | सुरेखा यादव | भारत और एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर। |
| खेल के विभिन्न क्षेत्र | मैरी कॉम | मुक्केबाजी में विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। |
| व्यापार और प्रबंधन | फाल्गुनी नायर | ‘नायका’ की संस्थापक, सफल उद्यमी। |
| विज्ञान और तकनीक | टेसी थॉमस | ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध, अग्नि 4 प्रोजेक्ट की डायरेक्टर। |
| अंतरिक्ष विज्ञान | कल्पना चावला | अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय मूल की महिला। |
प्रश्न 4.
कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनके स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों / नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।

स्रोत – https://surveyofindia.gov.in/UserFiles/files/1-16-state%20boundary.pdf
उत्तर:
विद्यार्थी अपने शिक्षक की सहायता से कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित नाम जैसे- दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना, जबलपुर, कोल्हापुर, ग्वालियर, आदि को मानचित्र में चिह्नित करें।
![]()
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
शब्द एक अर्थ अनेक
प्रश्न 1.
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली थी”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। कविता में ‘नाना’ शब्द ‘नाना धुंधूपंत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अन्य अर्थों में भी होता है। जैसे- माता के पिता के लिए तथा अनेक के अर्थ में इस प्रकार अनेकार्थी शब्द वह शब्द है जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं। नीचे तालिका में दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए।
| काव्य-पंक्ति | अर्थ |
| • तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई | • नदी का किनारा, बाण, सीसा |
| • रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | • शास्त्र में लिखी व्यवस्था, प्रणाली, विधाता, तरीका |
| • रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | • युद्ध, संशय, युग्म |
| • हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | • किसी पदार्थ का गोल पिंड, रस्सी/सूत/बर्फ का गोला, तोप से दागने वाले गोले, नारियल |
| • मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | • आभा, गति, तेज चाकू (धार) |
उत्तर:
अनेकार्थी शब्द

प्रश्न 2.
“कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी”
“मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी”।
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों की वर्तनी पर ध्यान दीजिए। दोनों शब्दों की वर्तनी में थोड़ी भिन्नता है। कई बार रचनाकार कविता की लय, अर्थ की लय इत्यादि को ध्यान में रखते हुए भाषा के स्तर पर इस प्रकार का प्रयोग करते रहे हैं। इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
इसी पाठ्यपुस्तक की अन्य कविताओं में भी आपने ऐसा प्रयोग देखा होगा। जहाँ किसी शब्द की मानक वर्तनी से भिन्न वर्तनी का प्रयोग किया गया है। अपने शिक्षक के साथ इस विषय पर चर्चा कीजिए। चर्चा से उभरे बिंदुओं को लिखकर उन पर अपने शिक्षक के साथ पुनः चर्चा कीजिए कि ऐसे प्रयोग क्यों किए गए हैं?
उत्तर:
यहाँ रैदास के पदों से चुने गए कुछ प्रमुख शब्दों के मानक रूप और भाषायी विशेषताएँ दी गई हैं-
| कविता में प्रयुक्त पंक्ति | रेखांकित पद की मानक हिंदी वर्तनी | भाषायी विशेषता / कारण |
| जाकी अंग-अंग बास समानी। | वास (सुगंध) | ब्रज और पुरानी हिंदी के प्रभाव के कारण ‘व’ का ‘ब’ में परिवर्तन |
| जाकी जोति बरै दिन राती | बलना/जले | आंचलिक भाषायी पुट और लय के लिए प्रयुक्त। |
| प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती | रात | ‘बाती’ शब्द के साथ तुकबंदी बैठाने के लिए। |
| ऐसी भगति करै रैदासा। | भक्ति | उच्चारण को सरल बनाने और पद की गेयता बढ़ाने के लिए। |
| जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ, तुम सौ तोरी, कवन सौं जोरौ। | तोहूँ / जोडूं | पद की क्षेत्रीय लय और छंद को बनाए रखने के लिए। |
| तुम्हारे चरन कमल एक भरोसा। | भरोसा | अनुनासिकता जोड़कर गेयता लाने के लिए। |
ऐसे प्रयोगों के पीछे का तर्क
शिक्षक के साथ चर्चा के लिए आप इन बिंदुओं का उपयोग कर सकते हैं-
- काव्यगत स्वतंत्रता – कवियों के पास यह अधिकार होता है कि वे छंद की लय और तुकबंदी ठीक करने के लिए शब्दों को थोड़ा मोड़ सकें; जैसे- ‘बाती’ के साथ ‘राती’।
- गेयता – ये पद गाए जाने के लिए लिखे गए हैं। गाते समय शब्दों का उच्चारण लोक प्रचलित रूप में अधिक सहज होता है, इसलिए ‘भक्ति’ की जगह ‘भगति’ का प्रयोग मिलता है।
- ऐतिहासिक संदर्भ – पुराने समय में मानक हिंदी (खड़ी बोली) का स्वरूप आज जैसा स्थिर नहीं था। कवि अपनी स्थानीय बोलियों; जैसे ब्रज, अवधी, सधुक्कड़ी के प्रभाव में वर्तनी लिखते थे।
- भाव की सघनता – कभी-कभी मानक शब्द वह लोक-अनुभूति नहीं दे पाता जो एक आंचलिक शब्द देता है।
मुहावरे
“दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी”
उपर्युक्त पंक्ति में ‘दृढ़ निश्चय करने’ के अर्थ को व्यक्त करने के लिए ‘मन में ठान लेना’ वाक्यांश का प्रयोग हुआ है जो एक मुहावरा है। ‘मुहावरे’ ऐसे वाक्यांश होते हैं जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करते हैं। इनके प्रयोग से भाषा में सौंदर्य और प्रभाव उत्पन्न होता है।
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है।

उत्तर:
| काव्य पंक्ति | प्रयुक्त मुहावरा | नया वाक्य |
| 1. अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी | मुँह की खाना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। |
| 2. डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया | पैर पसारना | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अब धीरे-धीरे गाँवों में भी अपने पैर पसार रही हैं। |
| 3. राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया | पैरों ठुकराना | स्वाभिमानी व्यक्ति अन्याय की नौकरी को पैरों पर ठुकरा देता है। |
| 4. हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी | ज्योति जगाना | गांधी जी ने दांडी यात्रा के माध्यम से देशवासियों में आजादी की ज्योति जगाई। |
| 5. मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी | धूम मचाना | ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में धूम मचा दी। |
सृजन
प्रश्न 1.
लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।
उत्तर:
लक्ष्मीबाई की सखियों (काना और मंदरा) का पत्र
स्थान : झाँसी दुर्ग
दिनांक : 14 मार्च 1858
प्रिय सखी लक्ष्मीबाई (रानी माँ),
प्रणाम। कल सुबह होने वाले युद्ध के लिए हम दोनों पूरी तरह तैयार हैं। हमने गुप्तचरों से सूचना प्राप्त की है कि ह्यू रोज की सेना पूर्व दिशा से घेराबंदी करने की योजना बना रही है।
हमारी रणनीति यह है कि मैं (काना) दुर्ग के दक्षिणी द्वार का मोर्चा सँभालूँगी, जबकि मंदरा अपनी टुकड़ी के साथ पश्चिमी नाले के पास घात लगाकर बैठेगी। जैसे ही फिरंगी सेना आगे बढ़ेगी, हम उन पर दोनों ओर से प्रहार करेंगे। हमें अपनी ‘नारी सेना’ पर पूरा भरोसा है। रानी साहिबा, हम जानते हैं कि मार्ग कठिन है लेकिन हम अंतिम साँस तक झाँसी की रक्षा करेंगी। आपकी वीरता ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
आप निर्भय होकर मुख्य सेना का नेतृत्व करें। भवानी हमारी रक्षा करेंगी।
आपकी सखियाँ,
काना और मंदरा
प्रश्न 2.
युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए, जैसे- परीक्षा के एक दिन पूर्व की स्थिति या नौंवी कक्षा में पहला दिन आदि ।
उत्तर:
डायरी लेखन : परीक्षा से एक दिन पूर्व की स्थिति
दिनांक : 20 अप्रैल, 2026
समय : रात्रि 10:30 बजे
प्रिय डायरी,
आज का दिन मेरे लिए बहुत ही घबराहट और मानसिक ऊहापोह भरा रहा है। कल मेरी नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा का पहला दिन है और विषय है- ‘हिंदी’। हालाँकि मैंने पूरे साल पढ़ाई की है और सभी पाठ दोहरा लिए हैं, फिर भी मन में अजीब-सी बेचैनी है।
जैसे ही मैं किताब खोलता हूँ, मुझे लगता है कि सब कुछ याद है, लेकिन अगले ही पल मन में यह विचार आता है। कि कहीं मैं वह कठिन कविता या व्याकरण का कोई नियम भूल तो नहीं जाऊँगा? जैसा कि हमने अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़ा है कि रचनाकार लय के लिए वर्तनी बदल देते हैं, मुझे डर लग रहा है कि कहीं मैं मानक वर्तनी और काव्य वाली वर्तनी में भ्रमित न हो जाऊँ।
मम्मी ने मुझे बादाम वाला दूध दिया और समझाया कि शांत मन से परीक्षा देना ही सबसे बड़ी जीत है। पिता जी ने भी कहा कि परीक्षा केवल हमारे ज्ञान का परीक्षण है, डरने की बात नहीं। अब मैंने अपनी किताबें बंद कर दी हैं। कलम, प्रवेश-पत्र और ज्योमेट्री बॉक्स तैयार कर लिया है।
अब सोने की कोशिश करता हूँ ताकि कल सुबह ताजगी से उठ सकूँ। उम्मीद है कि कल का प्रश्न पत्र सरल होगा और मैं सब कुछ अच्छे से लिख पाऊँगा।
नाम – ……………
![]()
गतिविधियाँ
• शौर्य के समाचार
यह कविता रानी लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं, उनकी वीरता और पराक्रम से हमारा साक्षात्कार कराती है। कविता में वर्णित घटनाओं को एक समाचार वाचक की तरह समाचार के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत – “आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया….. ।”)
उत्तर:
विशेष समाचार बुलेटिन झाँसी की रणभूमि
“नमस्कार, मैं हूँ आपका समाचार वाचक (नाम)। आज झाँसी की रणभूमि से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय देते हुए ब्रिटिश सेना के दाँत खट्टे कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रानी ने अकेले ही जनरल स्मिथ और ह्यूरोज़ की सेनाओं का सामना किया। अपनी पीठ पर दत्तक ( गोद लिए हुए) पुत्र को बाँधे, दोनों हाथों में तलवार लिए वे साक्षात चँडी का रूप लग रहीं थीं। कालपी से लेकर ग्वालियर तक रानी का विजय रथ बढ़ता जा रहा है। इस युद्ध ने पूरे देश में आज़ादी की नई चेतना जगा दी है। झाँसी से जुड़े अन्य अपडेट्स के लिए बने रहिए हमारे साथ।”
• ‘हरबोलों’ और हमारी कहानी
“बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।”
‘हरबोला’ बुंदेलखंड क्षेत्र में रहने वाले लोकगायकों का एक समुदाय है जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरतापूर्ण गाथा को अपने गीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का काम किया। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोकगायकों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। इनके द्वारा गाए जाने वाले गीत सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों को संरक्षित करने का एक जीवंत माध्यम है। आपके क्षेत्र में अथवा आपकी भाषा में भी ऐसे लोकगायक और उनके द्वारा गाए जाने वाले देशभक्तिपूर्ण गीत अवश्य प्रचलित होंगे। ऐसे गीतों का एक संकलन तैयार कीजिए और कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर:
भारत में हर क्षेत्र के अपने ‘हरबोले या लोकगायक हैं’ उदाहरण के लिए-
- बुंदेलखंड – यहाँ ‘आल्हा ऊदल’ के वीर रस के गीत गाए जाते हैं।
- राजस्थान – यहाँ के ‘चारण’ और ‘भाट’ महाराणा प्रताप की वीरता के गीत सुनाते हैं।
- उत्तरप्रदेश / बिहार – यहाँ ‘बिरहा’ और ‘सोहर’ के माध्यम से ऐतिहासिक कहानियाँ कही जाती हैं।
एक प्रचलित देशभक्ति गीत के उदाहरण-
“रंग दे बसंती चोला…” या “मेरा रंग दे बसंती चोला…” यह गीत भारतीय क्रांतिकारियों की शहादत और जज्बे का प्रतीक है, जो अक्सर लोक उत्सवों में गाया जाता है।
भाषा संगम
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।”
नीचे ‘बहन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
बैनी, बहन (हिंदी); भगिनी, स्वसृः (संस्कृत); भैंण (पंजाबी); बहन, हमशीरा (उर्दू); बैनी (कश्मीरी); भेण (सिंधी); बहीण (मराठी); बहेन (गुजराती); भयण (कोंकणी); दीदी (नेपाली); बोन, भगिनी (बांग्ला); भनी बाइ बाइदेउ (असमिया); मचन, मनाओ (मणिपुरी); भउणी (ओड़िआ); अक्कॅ, चेल्लेलु (तेलुगू); तंगै, अक्का (तमिल) ; सहोदर, पेङल् (मलयालम); सोदरि, अक्क, तंगि (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बहन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd-education.gov.in/lexicon-jsp
उत्तर:
- 1. भोजपुरी – बहिन / जीजी
2. मैथिली – बहिन / दीदी
3. ब्रजभाषा – बहना / वीर - विद्यार्थी स्वयं करें।
झरोखे से
कविता में लक्ष्मीबाई की दो सखियों ‘काना’ और ‘मंदरा’ का उल्लेख मिलता है जो युद्धक्षेत्र में अंत तक लक्ष्मीबाई के साथ रहीं। लक्ष्मीबाई की सहेलियों में ऐसी ही एक और वीरांगना का नाम आता है, जिनका नाम था ‘झलकारी बाई’। इन्होंने भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत ही वीरता के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। नीचे दिए गए लेख को पढ़कर आप 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के विषय में जान सकते हैं।
उत्तर:
झलकारी बाई

इतिहास के पन्नों में लुप्त, यह एक महान योद्धा की कहानी है जिसने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। एक सामान् परिवार से ताल्लुक रखने वाली झलकारी बाई केवल अपनी दृढ़ता और साहस से प्रेरित थीं जो आगे चलकर एक आदरणीय योद्धा बनीं।
झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झाँसी के निकट भोजला गाँव में हुआ था। वह बड़ी होकर एक सैनिक और रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सलाहकारों में से एक बन गईं। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही घुड़सवारी, अस्त्र-शस्त्र की कला और एक योद्धा की तरह लड़ना सीख लिया था। उन्होंने अपने पति पूरन कोरी से तीरंदाजी, कुश्ती और निशानेबाजी भी सीखी। पूरन कोरी रानी लक्ष्मीबाई के पति राजा गंगाधर राव की सेना में एक सैनिक थे।
झलकारी बाई अक्सर अपने पति के साथ शाही महल जाया करती थीं। रानी लक्ष्मीबाई को उनकी बहादुरी के बारे में पता चलने के बाद, वे उनकी अच्छी सहेली बन गईं। झलकारी बाई शारीरिक गठन और उनका चेहरा रानी लक्ष्मीबाई से मिलता-जुलता था।
जल्द ही, झलकारी बाई को रानी लक्ष्मीबाई की ‘दुर्गा दल’ नामक महिला सेना में पद मिल गया और वे अकसर रानी की तरफ से महत्वपूर्ण निर्णय लिया करती थीं।
राजा गंगाधर राव के निधन के बाद, अंग्रेजों को उनका उत्तराधिकारी स्वीकार्य नहीं था, परंतु अंग्रेजों के विरोध के बावजूद, रानी लक्ष्मीबाई ने शासन की बागडोर संभालने का फैसला किया। लक्ष्मीबाई ने निकट भविष्य में होने वाली लड़ाई के लिए तैयारियाँ शुरू कर दीं। 1857 में, सिपाहियों का विद्रोह बढ़ गया और उत्तरी एवं मध्य भारत के बड़े हिस्सों में फैल गया। वे सिपाही रानी लक्ष्मी बाई का समर्थन करने के लिए एकत्र हुए। झलकारी बाई को सेना की महिला टुकड़ी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
1858 में जब जनरल सर ह्य रोज की कमान में अंग्रेजी सेना ने झाँसी के किले पर हमला किया और किले को घेर लिया तो झलकारी बाई और पूरन कोरी दोनों ने उसका कड़ा प्रतिरोध किया। झलकारी बाई ने जमकर लड़ाई लड़ी और रानी को अपने बच्चे के साथ महल छोड़ने का सुझाव दिया।
झलकारी बाई ने स्वयं रानी लक्ष्मीबाई का वेश धारण किया, सेना की कमान संभाली और अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। उनकी सरूपता ने अंग्रेजों को भ्रमित किए रखा और उनकी यह चाल लंबे समय तक काम करती रही। झलकारी बाई की असली पहचान के बारे में अंग्रेज अनिश्चित थे और उनकी वजह से ही रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे के साथ अपने महल से भाग सकीं।
हालाँकि उसी लड़ाई में, पूरन कोरी अंग्रेजों से लड़ते हुए मारे गए और जब झलकारी बाई ने यह सुना तो वह क्रोधित हो गईं। उन्होंने कई अंग्रेज सैनिकों को मार डाला और उनसे जमकर लड़ाई लड़ी।
झलकारी बाई की यह कहानी बुंदेलखंड की लोक स्मृति का एक हिस्सा है। आज तक, उनकी स्मृति लोगों के मन में जीवित है और उनके बहादुर करतब वहाँ की लोककथाओं में बार-बार उभर कर सामने आते हैं। उनके सम्मान में हर साल झलकारी बाई जयंती मनाई जाती है। ‘अमर शहीद’ झलकारी बाई 1890 तक जीवित रहीं और वे अपने समय की शौर्य की प्रतिमूर्ति बन गईं थीं।
साभार : https://indianculture.gov.in/hi/node/2790247
![]()
खोजबीन
• नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों तथा पुस्तकों के माध्यम से आप लक्ष्मीबाई तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अन्य वीरांगनाओं और राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित बालिका कांति के अदम्य साहस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-
उत्तर:
https://www.naidunia.com/chhattisgarh/ambikapur-national-bravery-award-sevenyearold-
kanti-of-chhattisgarh-
who-saves-her-sister-from-elephants-will-get-national-bravery-award-4677447
https://youtu.be/nyoqcOrlWPw?si=JT63xysbj_qgstCC-NCERT OFFICIAL
‘भारत की महान नारियाँ’ श्रृंखला की पुस्तकें, प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित