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NCERT Class 8th Hindi Chapter 5 कबीर के दोहे Question Answer
कबीर के दोहे Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 5 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi कबीर के दोहे Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय । बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।” इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है ?
- श्रम का महत्व
- ज्ञान का महत्व
- गुरु का महत्व
- भक्ति का महत्व
उत्तर:
- गुरु का महत्व
- ज्ञान का महत्व
प्रश्न 2.
“अति का भला न बोलना अति की भली न चूप । अति का भला न बरसना अति की भली न धूप ।” इस दोहे का मूल संदेश क्या है?
- हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है।
- बारिश और धूप से बचना चाहिए ।
- हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
- हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए।
उत्तर:
- हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।

प्रश्न 3.
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर | पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर।” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है ?
- समय का सदुपयोग करना ।
- दूसरों के काम आना ।
- परिश्रम और लगन से काम करना ।
- सभी के प्रति उदार रहना ।
उत्तर:
- सभी के प्रति उदार रहना ।
प्रश्न 4.
“ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय ।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है ?
- लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं।
- दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।
- किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है।
- सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है।
उत्तर:
- दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।
प्रश्न 5.
“साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप । जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।” इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है।
- सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
- बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं।
- सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
उत्तर:
- सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
- सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
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प्रश्न 6.
“निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय । बिन पानी साबुन बिना निर्मल करै सुभाय ।” यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?
- आलोचना से बचना चाहिए
- आलोचकों को दूर रखना चाहिए
- आलोचकों को पास रखना चाहिए
- आलोचकों की निंदा करनी चाहिए
उत्तर:
- आलोचकों को पास रखना चाहिए
प्रश्न 7.
“साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय । सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय ।” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?
- मन की कल्पनाओं का
- सुख-सुविधाओं का
- विवेक और सूझबूझ का
- कठोर और क्रोधी स्वभाव का
उत्तर:
- विवेक और सूझबूझ का

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग- अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करें तथा अपने उत्तर चुनने का कारण बताएँ ।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:
1. – 3
2. – 5
3. – 6
4. – 8
5. – 7
6. – 4
7. – 1
8. – 2

(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए-

उत्तर:
1. – 8
2. – 6
3. – 2
4. – 1
5. – 4
6. – 7
7. – 5
8. – 3
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पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने में समूह साझा कीजिए और लिखिए-
(क) “कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।।”
उत्तर:
इन पंक्तियों में मन की प्रकृति के बारे में बताया गया है। मन पंछी के समान चंचल होता है। जिस प्रकार पंछी स्थिर नहीं रहता। क्षण में यहाँ रहता है, क्षण में दूसरी जगह चला जाता है। उसी तरह मनुष्य का मन भी बड़ा चंचल और गतिमान होता है। यह वहीं जाता है, जहाँ जाना इसे अच्छा लगता है। मन के पीछे-पीछे शरीर भी वहाँ जाता है और वहाँ के लोगों से उसकी संगति हो जाती है।
दूसरी तरफ संगति का प्रभाव मनुष्य के फल (परिणाम) पर दिखाई देता है। मनुष्य जैसी संगति में रहता है, उसी के अनुसार उसे फल मिलता है। अगर मनुष्य अच्छी संगति में रहता है, तो उसका मान-सम्मान, वृद्धि तथा वैभव बढ़ता है।
अगर उसकी संगति बुरी होती है, तो उसका पराभव होता है। उसे समाज में बुराई का भागी बनना पड़ता है । उसका मान-सम्मान समाप्त हो जाता है, बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तथा धन-वैभव आदि नष्ट हो जाता है। अतः मन को नियंत्रित करते हुए उसे अच्छी संगति से जोड़ना चाहिए ताकि आपका सकारात्मक विकास हो सके।
(ख) “साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।।”
उत्तर:
इन पंक्तियों में साँच और झूठ तथा अच्छाई-बुराई के बारे में बताया गया है। साँच (सच्चाई) को तप के बराबर बताया गया है यानी सत्य पर कायम रहना तपस्या के समान है, जबकि झूठ को पाप के समान बताया गया है। यहाँ सत्य की महत्ता को स्थापित किया गया है। यहाँ यह स्पष्ट किया गया है कि जिसके हृदय में सत्य विराजमान होता है, उसका हृदय सदा प्रकाशित रहता है, यानी उसका हृदय उसे सही-गलत, अच्छाई-बुराई, उचित-अनुचित का ज्ञान कराता है। एक तरह से उसका हृदय ही उसका गुरु बन जाता है।
सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। हाँ मैं इस बात से सहमत हूँ, क्योंकि गुरु ही ज्ञान प्रदान कर हमारी आँखें खोलता है, तभी हम दुनिया के बारे में, खुद के बारे में तथा ईश्वर के बारे में भी जान पाते हैं। अगर गुरु न हो, तो हम कुछ भी नहीं जान पाएँगे। हमारा जीवन यों ही व्यर्थ चला जाएगा।
(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर ।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए ।
उत्तर:
इस दोहे के अनुसार मनुष्य का सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े होने के साथ-साथ उसमें उदारता, दया, परोपकार, सहानुभूति आदि उत्तम मानवीय गुणों का होना भी आवश्यक है। अन्यथा उसका जीवन उस खजूर के पेड़ के समान हो जाएगा, जिसकी छाया में न कोई बैठ सकता है और न ही उसका फल कोई खा सकता है। कहने का मतलब यह है कि संपन्नता के साथ उदारता कां होना काफी महत्वपूर्ण है। तभी सम्पन्नता पुण्यकर हो पाएगी।
(ग) “ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।”
क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए ।
उत्तर:
हाँ, मैं मानता हूँ कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है। इस बात को इस उदाहरण द्वारा भी सिद्ध किया जा सकता है। यह बचपन की एक घटना है। मैं गरमी की छुट्टियों में अपने गाँव गया था। मैंने देखा कि मेरी हमउम्र कुछ बच्चे आम के बाग के माली काका से कड़े तथा गलत शब्दों में कच्चे आम माँग रहे थे तथा वे उन्हें भगा रहे थे।
कुछ समय बाद बच्चे चले गए। तब मैं माली काका के पास गया तथा प्यार से उनसे बातें करने लगा। वे मेरी बातों से काफी खुश हुए तथा मेरा नाम तथा मेरे घर-परिवार के बारे में पूछा। वे अब तक सामान्य हो गए थे। यह देखकर मुझे भी अच्छा लगा। इसके बाद वे खुद मुझे बगीचे में ले गए, बाग दिखाया तथा लौटते वक्त मुझे कुछ कच्चे आम भी दिए।
(घ) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।
हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए
उत्तर:
हमारे विचारों तथा कार्यों पर संगति का प्रभाव पड़ता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हम अपने दैनिक जीवन में भी देखते हैं। जो बच्चे या युवा बुरी संगति में पड़ जाते हैं, वे बुरी बातें सीखने लगते हैं। जबकि बुरा आदमी भी अच्छी संगति में अच्छा बन जाता है। उदाहरण के तौर पर जब कोई पढ़ने वाला बच्चा हमेशा खेलने-कूदने या स्कूल से भागने वाले बच्चों की संगत में पड़ता है, तो उसमें भी उसकी बुराइयाँ धीरे-धीरे आने लगती हैं। जो संगत के दुष्प्रभाव को दर्शाता है। इसके उलट रत्नाकर जैसा बड़ा डाकू देवर्षि नारद के संगत में पड़कर महर्षि वाल्मीकि बन गया । यह अच्छी संगत के अच्छे प्रभाव को सिद्ध करता है।
दोहे की रचना

“अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप ।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ।।”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘ अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे- दोहों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए ।
(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें –
प्रश्न 1.
एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे- राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
उत्तर:
एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द वाली पंक्तियाँ-
- “गुरु गोविंद दोऊ खडे, काके लागौं पाँय ।” (यहाँ ‘गुरु’, ‘गोविंद’ दोनों शब्द ‘ग’ से प्रारंभ हो रहे हैं ।) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।” (‘साधू’, ‘सूप’, ‘सुभाय’ ‘स’ से प्रारंभ हो रहे हैं।)
प्रश्न 2.
एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (जैसे- बार-बार)
उत्तर:
एक शब्द एक साथ दो बार आने वाली पंक्ति-
- ‘सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय ।” (सार, सार)
प्रश्न 3.
लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे- जल, जाल) एक ही पंक्ति में आए हैं।
उत्तर:
लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर होता है। ऐसे शब्द वाली पंक्तियाँ-
- “बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।” (यहाँ ‘बिन’ तथा ‘बिना’ में एक मात्रा का अंतर है ।)”
- “अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” (यहाँ ‘भला’ एवं ‘ भली’ में एक का अंतर है |)
प्रश्न 4.
एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों (जैसे- अच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
उत्तर:
विपरीतार्थक शब्दों वाली पंक्तियाँ-
- “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।” (‘साँच’ तथा ‘झूठ’ विपरीतार्थक शब्द हैं।)
- “सांर सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।” (‘सार’ मूल भाग तथा ‘थोथा’ निस्सार चीज़ विपरीतार्थक शब्द हैं।)
प्रश्न 5.
किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है । (जैसे- दूध जैसा सफेद)
उत्तर:
एक चीज की किसी अन्य चीज से तुलना करने वाली पंक्तियाँ-
- “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।” (यहाँ एक संपन्न व्यक्ति की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है।)
- “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।” (यहाँ ‘साधू’ की तुलना ‘सूप’ से की गई है।)
प्रश्न 6.
किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (जैसे-मुख चंद्र है)
उत्तर:
किसी को कोई अन्य नाम देने वाली पंक्ति-
- “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय । ” (यहाँ ‘मन’ की तुलना ‘पंछी’ से की गई है। यहाँ ‘मन’ को पंछी के सदृश बताया गया है।)
प्रश्न 7.
किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (जैसे- ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप’)
उत्तर:
शब्द की वर्तनी में थोड़ा अंतर वाली पंक्तियाँ-
- “अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप ।” (वर्तमान हिंदी में ‘चूप’ को ‘चुप’ लिखा जाता है ।)” निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय ।” (वर्तमान हिंदी में ‘छवाय’ को ‘छवाइए’ या ‘छवाकर’ लिखा जाता है।)
- “बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।” (वर्तमान हिंदी में ‘सुभाय’ को ‘स्वभाव’ लिखा जाता है।)
प्रश्न 8.
उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
उत्तर:
उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाने वाली पंक्तियाँ-
- “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।” (खजूर के पेड़ की तरह बड़ा (संपन्न) होना किसी काम का नहीं है, क्योंकि खजूर के पेड़ के फल तथा छाया की कोई उपयोगिता नहीं होती है। बड़ा होने के साथ-साथ उदार तथा दयालु होना भी जरूरी है। तभी उसकी सार्थकता है।)
- “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।” (साधू के स्वभाव की तुलना सूप से की गई है, जो उसी की तरह बेकार चीजों को निकालकर बुरे इनसान को अच्छा बनाता है।)
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए
उत्तर:
विद्यार्थी अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा करें।
अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय ।”
- यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?
- यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
उत्तर:
- इस स्थिति में, मैं पहले गुरु के चरणों में ही नमन करता।
कारण- गुरु ही हमें ज्ञान देते हैं और ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बताते हैं। गुरु के बिना ईश्वर को जानना संभव नहीं है। गोविंद (ईश्वर) को पाने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है । गुरु ही सही और गलत का भेद समझाते हैं, जिससे हम आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ पाते हैं। - यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
- ज्ञान का प्रसार रुक जाता ।
- मनुष्य नई चीजें सीख नहीं पाता और प्रगति नहीं कर पाता।
- समाज में अज्ञानता और अंधविश्वास बढ़ जाता।
- सही और गलत का भेद करना मुश्किल हो जाता।
- व्यक्तिगत और सामाजिक विकास थम जाता और जीवन दिशाहीन हो जाता।
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(ख) “अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप ।”
- यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
- आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर:
- यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा
- बहुत अधिक बोलने वाला :
- अनजाने में गलत बातें बोल सकता है या किसी को ठेस पहुँचा सकता है।
- लोग उसे गंभीरता से नहीं लेंगे।
- उसके शब्दों का मूल्य कम हो जाएगा।
- रिश्तों में तनाव आ सकता है।
- गोपनीयता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
बहुत अधिक चुप रहने वाला :
- अपनी भावनाओं या विचारों को व्यक्त नहीं कर पाएगा।
- लोग उसे समझ नहीं पाएँगे या गलत समझ सकते हैं।
- अवसर खो सकता है (जैसे- नौकरी के इंटरव्यू में)
- रिश्तों में दूरी आ सकती है, क्योंकि संचार की कमी होगी।
- मन में घुटन और अकेलापन महसूस कर सकता है ।
• यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं-
आवश्यकता से अधिक वर्षा (अतिवृष्टि) होने परः
- बाढ़ आ सकती है, जिससे जान-माल का नुकसान होगा।
- फसलें नष्ट हो सकती हैं।
- मिट्टी का कटाव (भूस्खलन) हो सकता है।
- परिवहन बाधित हो सकता है।
- महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
• आवश्यकता से कम वर्षा (अनावृष्टि / सूखा) होने पर :
- पानी की कमी हो जाएगी, जिससे पीने और सिंचाई की समस्या होगी।
- फसलें सूख जाएँगी, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न होगा।
- पशुधन प्रभावित होगा।
- भूमि बंजर हो सकती है।
- आर्थिक संकट और पलायन बढ़ सकता है।
- आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं-
• मोबाइल या मल्टीमीडिया का नकारात्मक प्रभाव-
- आँखों और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
- नींद की कमी हो सकती है।
- सामाजिक अलगाव बढ़ सकता है।
- पढ़ाई या काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।
- मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ; जैसे- डिप्रेशन, एंग्जायटी आदि बढ़ सकती हैं।
- वास्तविक दुनिया से दूरी बढ़ सकती है।
- साइबरबुलिंग और ऑनलाइन खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।”
- झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर:
- झूठ बोलने पर हमारे जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकता है-
- विश्वास खोनाः लोग आप पर भरोसा करना बंद कर देंगे।
- रिश्तों में दरार: मित्र और परिवार के सदस्य आपसे दूर हो सकते हैं।
- मानसिक तनावः झूठ को याद रखने और उसे बनाए रखने में मानसिक दबाव होता है।
- आत्म-सम्मान में कमी: आपको खुद पर शर्मिंदगी महसूस हो सकती है।
- अकेलापनः कोई भी आपके साथ सच्चा संबंध नहीं बनाना चाहेगा।
- कानूनी समस्याएँ:कुछ परिस्थितियों में झूठ बोलने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
- गलत प्रश्न पर अंक देने पर मैं तुरंत शिक्षक को सूचित करूँगा कि मेरा यह उत्तर गलत था और आपने गलती से मुझे अंक दे दिए हैं।
कारण – ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण है। भले ही मुझे अंक मिल रहे हों, लेकिन यह मेरी मेहनत से नहीं आया है। मुझे सही और गलत का अंतर समझना चाहिए और ईमानदारी से अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। इससे शिक्षक की नजरों में मेरा सम्मान बढ़ेगा और मैं अपनी गलती से सीख पाऊँगा।
(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”
- यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
- क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो ? अनुमान लगाइए।
उत्तर:
- यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में निम्नलिखित परिवर्तन आएँगे-
- आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ेगा।
- तनाव और झगड़े कम होंगे।
- खुशहाल और सकारात्मक माहौल बनेगा।
- रिश्ते मजबूत होंगे।
- काम करने और रहने का वातावरण अधिक सुखद होगा ।
- समझदारी और सहयोग की भावना बढ़ेगी।
- हाँ, कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो सकती हैं, जहाँ कटु या कठोर वचन बोलना आवश्यक हो, लेकिन इसका उद्देश्य हमेशा भलाई होनी चाहिए, नुकसान पहुँचाना नहीं।
उदाहरण-
- जब किसी को गंभीर गलती करने से रोकना हो, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं; जैसे- कोई बच्चा आग से खेल रहा हो, तो उसे डाँटकर रोकना ।
- जब किसी को सही रास्ते पर लाना हो और सामान्य तरीके से बात समझ न आ रही हो; जैसे- किसी बुरी आदत में फँसे व्यक्ति को समझाना |
- जब किसी अन्याय या गलत कार्य का कड़ा विरोध करना हो।
- जब स्वयं की या किसी और की सुरक्षा की बात हो और तत्काल कठोर प्रतिक्रिया आवश्यक हो ।
(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।”
- यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?
- खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए |
- आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे ?
उत्तर:
- यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने या संपन्न होने का अहंकार रखता हो तो मैं इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे इसका अर्थ इस प्रकार बताऊँगा या समझाऊँगा-
- मैं उसे समझाऊँगा कि केवल शारीरिक रूप से बड़ा होना या पद में बड़ा होना महत्वपूर्ण नहीं है ।
- असली बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, उसके व्यवहार और दूसरों के प्रति उसकी विनम्रता में निहित होता है ।
- खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है, लेकिन वह किसी को छाया नहीं देता और उसके फल भी आसानी से नहीं मिलते। ठीक उसी तरह, यदि कोई व्यक्ति बड़ा होकर भी दूसरों के काम न आए, किसी को सुख न दे और अपने ज्ञान या धन का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए न करे, तो उसका बड़प्पन व्यर्थ है।
- सच्चा सम्मान उसे मिलता है जो विनम्र होता है, दूसरों की मदद करता है, और अपने गुणों से समाज में सकारात्मक योगदान देता है।
- यह दोहा खजूर के पेड़ के एक विशेष गुण (ऊँचाई और फल तक पहुँच की कठिनाई) पर केंद्रित है, न कि उसकी समग्र उपयोगिता पर।
उपयोगिता-
- खजूर: यह स्वादिष्ट और पौष्टिक फल देता है। इसके पत्तों का उपयोग चटाई, टोकरियाँ आदि बनाने में होता है। लकड़ी का भी उपयोग होता है।
- नारियल: यह पानी, गिरी, तेल, दूध आदि देता है, जो खाद्य और पेय पदार्थों के रूप में उपयोगी है। इसके रेशों से रस्सी, चटाई आदि बनती है। पत्तियों से छत बनाई जाती है। लकड़ी का भी उपयोग होता है ।
• मैं अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनिटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की निम्नलिखित विशेषताओं पर ध्यान दूँगा-
- जिम्मेदारी : अपने कर्तव्यों को गंभीरता से लेने वाला होना चाहिए।
- ईमानदारी : सच्चा और निष्पक्ष होना चाहिए।
- नेतृत्व क्षमता : दूसरों को प्रेरित मार्गदर्शित करने वाला होना चाहिए।
- संचार कौशल : स्पष्ट रूप से अपनी बात कहने और दूसरों की बात सुनने वाला होना चाहिए।
- धैर्य : कठिन परिस्थितियों में शांत रहने वाला होना चाहिए।
- सहायक स्वभाव : दूसरों की मदद करने को तैयार रहने वाला होना चाहिए।
- उदाहरण प्रस्तुत करना : स्वयं नियमों का पालन करने वाला होना चाहिए।
- विनम्र : घमंड न करने वाला और दूसरों का सम्मान करने वाला होना चाहिए।
(च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय ।”
- यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा ?
- यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
उत्तर:
- यदि कोई मेरी गलतियों को बताता रहे तो मुझे उससे निम्नलिखित लाभ होंगे-
- सुधार का अवसर – मैं अपनी गलतियों को पहचानकर उनमें सुधार कर सकूँगा।
- आत्म-विकास- यह मुझे बेहतर व्यक्ति बनने में मदद करेगा।
- सफलता- गलतियों को सुधारने से सफलता की संभावना बढ़ेगी।
- आत्म-चिंतन – यह मुझे अपने कार्यों और विचारों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करेगा ।
- विनम्रता – आलोचना सुनने की आदत मुझे विनम्र बनाए रखेगी।
- यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो निम्नलिखित दुष्परिणाम होंगे-
- कोई भी अपनी गलतियों से सीख नहीं पाएगा।
- समाज में गलत व्यवहार और प्रथाएँ बढ़ती जाएँगी।
- व्यक्तिगत और सामाजिक विकास रुक जाएगा।
- सामूहिक रूप से समस्याओं का समाधान करना मुश्किल हो जाएगा।
- अराजकता और असामंजस्य बढ़ सकता है।
(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”
- कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?
- यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
- यदि मुझमें ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो मेरे जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन आएँगे –
- सकारात्मक परिवर्तन
- मैं अच्छी बातों को ग्रहण कर पाऊँगा और बुरी बातों को छोड़ पाऊँगा।
- मैं लोगों में अच्छाई देख पाऊँगा और नकारात्मकता से बचूँगा।
- मेरे निर्णय अधिक समझदारी भरे होंगे।
- मैं जीवन में सही मार्ग का चुनाव कर पाऊँगा। मेरा मन शांत और सकारात्मक रहेगा।
- मैं दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन पाऊँगा, उन्हें सही-गलत का अंतर समझने में मदद कर पाऊँगा ।
- यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा?
नकारात्मक प्रभावः
- हम गलत और सही के बीच अंतर नहीं कर पाएँगे।
- धोखाधड़ी या शोषण का शिकार हो सकते हैं।
- गलत निर्णय ले सकते हैं, जिससे नुकसान होगा।
- हमारा अपना विवेक और सोचने की क्षमता कमजोर पड़ जाएगी।
- दूसरों द्वारा आसानी से गुमराह किया जा सकता है।
- जीवन में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति बनी रहेगी।
(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय ।”
- यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों ?
- संगति का हमारे जीवन पर क्या – क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर:
- यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो उसे कहीं ले जाने की बात व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ सामान्य उत्तर इस प्रकार भी हो सकते हैं-
- प्राकृतिक स्थान – पहाड़ों, जंगलों या समुद्र तटों पर, शांति और सुंदरता का अनुभव करने के लिए।
- ऐतिहासिक स्थल – प्राचीन सभ्यताओं या महत्वपूर्ण घटनाओं के स्थानों पर, इतिहास को करीब से जानने के लिए।
- भविष्य – भविष्य की दुनिया को देखने और यह जानने के लिए कि प्रौद्योगिकी और समाज कैसे विकसित होंगे।
- दूरस्थ प्रियजन – अपने दूर स्थित प्रियजनों के पास उनसे मिलने के लिए हैं।
- अंतरिक्ष – ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने एवं नए ग्रहों या गैलेक्सीज़ की खोज करने के लिए।
कारण- अपनी जिज्ञासा शांत करने, ज्ञान प्राप्त करने एवं सौंदर्य का अनुभव करने या शांति पाने के लिए।
- संगति का हमारे जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकता है-
सकारात्मक प्रभावः
- यदि हम अच्छे लोगों की संगति में रहते हैं, तो हम भी अच्छे गुण सीखते हैं।
- सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
- सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- हमें समर्थन और प्रोत्साहन मिलता है।
- ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होता है।
नकारात्मक प्रभावः
- यदि हम बुरी संगति में पड़ते हैं, तो हम भी गलत आदतों और व्यवहार को अपना लेते हैं।
- गलत रास्ते पर जा सकते हैं।
- नकारात्मकता और निराशा बढ़ सकती है।
- हमें नुकसान उठाना पड़ सकता है, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक।
- हमारे चरित्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष-
- संगति का हमारे व्यक्तित्व, सोच, व्यवहार और जीवन की दिशा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, अच्छी संगति चुनना बहुत महत्वपूर्ण है।
वाद-विवाद

“अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप । अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ॥”
(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
उत्तर:
विद्यार्थी प्रस्तुत दोहे का आज के समय में महत्व पर कक्षा में वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन करें।
(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे-
- पक्ष – वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
- विपक्ष – अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।
उत्तर:
पक्ष और विपक्ष के समूह अपने – अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करें। इसके लिए दिए गए उदाहरण से मार्गदर्शन लें।
(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन – पुस्तिका में लिख लीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखें।
शब्द से जुड़े शब्द
• नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए-

उत्तर:

(इन शब्दों के आधार पर मित्रों के साथ स्वयं चर्चा करें।)
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दोहे और कहावतें
“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय ।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”

इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है। यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत ‘जैसा संग वैसा रंग’ (व्यक्ति जिस संगति में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है।) की तरह प्रयुक्त होती है। कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं, जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।

• अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए-
- गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में ।
- भाव – नृत्य प्रस्तुति ।
- कविता पाठ करना ।
- संगीत के साथ प्रस्तुत करना ।
- अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है । (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।)
उत्तर:
विद्यार्थी समूह में दोहों पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियाँ करें।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए ।
उत्तर:
मेरे जीवन में बचपन से लेकर आज तक अनेक व्यक्ति रहे हैं, जिन्होंने समय-समय पर मुझे सही दिशा दिखाई है। बचपन में मेरी माँ ने हर पग पर मुझे सही ज्ञान दिया तथा मेरा सही मार्गदर्शन किया। बड़े होने के क्रम में मेरे बड़े भाई-बहनों तथा शिक्षकों ने मेरा उचित मार्गदर्शन किया। इन्हीं के मार्गदर्शन से आज मैं जहाँ भी हूँ, संतुष्ट तथा ठीक-ठाक हूँ।
(ख) “ निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय ।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है, जिससे आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए ।
उत्तर:
वर्तमान समय तक कई लोगों ने मेरी कमियों या गलतियों के विषय में बताकर मुझे खुद में सुधार करने का अवसर दिया है। ऐसे सभी लोगों के बारे में बता पाना सीमित समय तथा स्थान में संभव नहीं जान पड़ता है।
(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे- मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
मैंने ऐसा कई बार अनुभव किया है कि मेरी संगति ने मेरे विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित किया है। अच्छी संगति ने मेरे अंदर सद्गुणों का विकास किया, जबकि बुरी संगति के कारण मेरे अंदर नकारात्मक मूल्यों का विकास हुआ।
(विद्यार्थी ‘आपकी बात’ के प्रश्नों के उत्तर अपने-अपने अनुभव के आधार पर भी दे सकते हैं।)
सृजन
(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।”
इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए, जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत- किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।
उत्तर:
विद्यार्थी प्रस्तुत दोहे पर आधारित कहानी अपने अनुभव के आधार पर लिखें।
(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय ।”
इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी प्रस्तुत दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार का आयोजन करें तथा उनके योगदान पर निबंध लिखें।
कबीर हमारे समय में
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं ? उन विषयों की सूची बनाइए ।
उत्तर:
आज के समय में आकर कबीर शायद आज की सामाजिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक तथा अन्य समस्याओं पर कविता लिख सकते हैं।
(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी भी इन समस्याओं पर कुछ पंक्तियाँ लिखें।
साइबर सुरक्षा और दोहे
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए-
(क) “अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप ।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या – क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर:
इंटरनेट पर सूचनाएँ अनावश्यक रूप से साझा करना गलत है। हमें जरूरी सूचनाएँ ही साझा करनी चाहिए | सूचनाएँ अनावश्यक रूप में साझा करने पर ये जालसाजों के हाथ में लगकर हमारे लिए ही अनेक प्रकार की समस्याएँ पैदा कर देती हैं। जालसाज इन्हीं सूचनाओं के द्वारा हमें आर्थिक रूप से चूना लगा देते हैं। हमारे खून- पैसे की कमाई पर हाथ साफ कर लेते हैं। हमारी मानसिक शांति तथा सुख-चैन समाप्त कर देते हैं।
(ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक ?
उत्तर:
किसी भी वेबसाइट, ई-मेल या मीडिया पर उपलब्ध सारी जानकारियाँ सही नहीं होती हैं। इनमें काफी सारी जानकारियाँ भ्रामक तथा तथ्यों से हटकर होती हैं। इसलिए इन जानकारियों को सूप की तरह छानने की आवश्यकता है ताकि हम सही जानकारी और गलत जानकारी को अलग कर सकें। उपयोगी सूचना तथा हानिकारक सूचना की पहचान के लिए हमें इन सूचनाओं को मानक स्रोतों से जाँचना चाहिए।
इसके लिए ‘फैक्ट चेकिंग टूल्स’ का भी उपयोग कर सकते हैं। हम सही सूचनाओं की प्राप्ति के लिए उन स्रोतों पर भी निर्भर हो सकते हैं जो किसी भी पक्षपात से रहित होकर सही रिपोर्टिंग करते हैं तथा जिनकी विश्व स्तर पर साख होती है।
आज के समय में
• नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए-
(क) अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया – ” संगति का असर जीवन पर पड़ता है।”
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उत्तर:
कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करे, सो तैसा फल पाय ।।
(ख) एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा – “हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।”
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उत्तर:
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।
(ग) आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा -“ आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।”
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उत्तर:
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय ।।
(घ) रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
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उत्तर:
ऐसी बानी बोलिए, मन का आया खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
(ङ) कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा -“बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो ।”
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उत्तर:
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप । अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप । ।
(च) सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा – ‘इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।”
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उत्तर:
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय । बलिछारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
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खोजबीन के लिए
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए ।
- संत कबीर
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कबीर के बारे में और जान-समझ सकते हैं—
https://www.youtube.com/watch?v=FGMEpPJJQmk&t=259s & ab_channel=NCERTOFFICIAL
- कबीर वाणी
https://www.youtube.com/watch?v=UNEIIugmwV0&t=13s & ab_channel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=3Qsyn Ivp62 Y&t=8s &ab_channel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=UQA8Ddnqi Yg&t=11s&ab_channel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=JhWy6BYvosU&t=155s & ab_channel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=gnU7w-RHhyU&t=14s & ab_channel=NCERTOFFICIAL
- कबीर की साखियाँ
- दोहे कबीर, रहीम, तुलसी

उत्तर:
(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 74 पर दी गई इंटरनेट लिंक का प्रयोग कर कंबीर के बारे में और जानकारियाँ प्राप्त करें।)