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NCERT Class 8th Hindi Chapter 1 स्वदेश Question Answer
स्वदेश Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 1 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi स्वदेश Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता से
उत्तर:
- संवेदनहीनता से
प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
- देश की प्रगति
- देश के प्रति प्रेम
- देश की सुरक्षा
- देश की स्वतंत्रता
उत्तर:
- देश के प्रति प्रेम

प्रश्न 3.
“हम हैं जिसके राजा-रानी” – इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
- देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
- देश की शासन व्यवस्था के लिए
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
- देश के सभी प्राणियों के लिए
उत्तर:
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
प्रश्न 4.
कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
- जिसमें साहस की कमी है
- जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
उत्तर:
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है

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(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग- अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
(1) हमने इसका प्रश्न उत्तर ‘संवेदनहीनता से’ चुना है क्योंकि कविता के आरंभ में ही कवि ने कहा है कि जिस हृदय में स्वदेश के लिए प्यार नहीं है, वह पत्थर है। संवेदनहीन व्यक्ति का हृदय सरस नहीं होता। वह पत्थर के समान होता है। देशप्रेमी अपने विचारों में दृढ़ होते है, किंतु उनका हृदय देश के प्रति प्रेम से सराबोर रहता है। यहाँ ‘नैतिकता से’ ‘कंठोरता से’ और ‘सामाजिकता से सटीक उत्तर नहीं हैं।
(2) ‘कविता का मुख्य भाव देश के प्रति प्रेम ही है। कवि ने इसके माध्यम से अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध भारतवासियों को संघर्ष करने की प्रेरणा दी थी। अपनी काव्य प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीयता और देशभक्ति का अलख जगाने का प्रयास किया था।
(3) “हम हैं जिसके राजा-रानी” – इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द देश के समस्त नागरिकों के लिए आया है। यही उपयुक्त उत्तर है। प्राकृतिक संसाधन राजा-रानी नहीं हो सकते, शासन व्यवस्था राजा – रानी नहीं हो सकती। देश के सभी प्राणी भी उपयुक्त नहीं हो सकता, क्योंकि प्राणियों में तो मानव के अतिरिक्त अन्य सभी सजीव भी आते हैं।
(4) जिस देशवासी के हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम की भावना न हो, तो उसका हृदय पत्थर के समान ही होगा। कविता का मूलभाव ही देश-प्रेम है। कवि का उद्देश्य लोगों को स्वतंत्रता के लिए जागृत करना है। साहसी व्यक्ति में देश-प्रेम नहीं है, तो उसका साहस व्यर्थ है। स्नेह का भाव परिवार के लिए हो, पर देश के लिए नहीं है, तो भी व्यर्थ है । स्फूर्ति और उमंगहीन व्यक्ति तो देश के लिए बलिदान होने का भाव नहीं रख सकता।
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।)
मिलकर करें मिलान
• कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

उत्तर:
1. 3
2. 4
3. 1
4. 2
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्व पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल- दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।।’
उत्तर:
जिस भी प्राणी ने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु अवश्यंभावी है। कोई भी अमरता का वरदान लेकर नहीं आया है। बिना किसी संदेह के जब हमें पता है कि एक दिन शरीर मृत्यु को प्राप्त होगा, ऐसे में इस जीवन को देश की आज़ादी, तथा भलाई के लिए क्यों न न्योछावर किया जाए। यह काल रूपी दीपक तो निरंतर मृत्यु की ओर अग्रसर हो रहा है। देशभक्ति से ओत-प्रोत देशवासियों को इसकी रक्षा करते हुए ही अपने जीवन को सार्थक करना चाहिए।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।। ”
उत्तर:
कवि ने जब इस कविता की रचना की थी, तो उस समय देश परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था । देश पर अंग्रेज़ों का राज था। आज़ादी के दीवाने देश को स्वतंत्र करवाने के लिए प्राणों की बाज़ी लगा रहे थे। अन्य देशवासियों को प्रेरित करते हुए कवि कहते हैं कि हमारे पास तोप, तलवार यानी सभी उपयुक्त संसाधन मौजूद हैं।
इसके साथ ही देशद्रोहियों पर व्यंग्य करते हुए कवि कहते हैं कि कुछ स्वार्थी व लालची लोग देश से द्रोह कर रहे हैं। उनके हृदय में देश-प्रेम की भावना स्वार्थ की भावना के नीचे दब गई है। ऐसे संवेदनहीन व्यक्तियों के हृदय पत्थर के समान हैं, जो अपने स्वार्थ को ही सर्वोपरि मान बैठे हैं। कवि उन्हें देश-प्रेम के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। यह आज भी बहुत प्रासंगिक है।
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं ।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।।”
उत्तर:
कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से देश-प्रेम और स्वतंत्रता का मंत्र फूँका है। देश-प्रेम की भावना प्रत्येक देशवासी में सर्वोपरि होनी चाहिए । कवि कविता की प्रत्येक पंक्ति के माध्यम से भारतीयों को झकझोरकर जागरूक करना चाहते हैं।
जिस भारतवासी के हृदय में देश-प्रेम की भावना नहीं है, जिसके हृदय में देश-प्रेम के रस की धारा नहीं बहती है, उसका हृदय सजीव न होकर पत्थर के समान कठोर है। देश-प्रेम रहित हृदय व्यर्थ है। देश-प्रेम सर्वोपरि है।
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए ।
(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है ?
उत्तर:
“हम हैं इसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी” समस्त भारतीयों के लिए प्रयोग किया गया है। देश के समस्त संसाधनों का हम एक राजा – रानी की तरह उपभोग करते हैं। अतः जिस प्रकार राजा – रानी अपने राज्य की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार हमें अपने देश की रक्षा करनी चाहिए ।
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं ? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। प्रत्येक समाज के अपने कुछ नियम होते हैं, मर्यादाएँ होती हैं। हमारे भारतवर्ष की अपनी कुछ मर्यादाएँ हैं, संस्कार हैं, नियम हैं, कानून हैं। इन सबका पालन करके, परिवार, समाज, राज्य, देश, विश्व तरक्की करता है।
अत: हमें सामाजिक नियमों का आदर सहित पालन · करना चाहिए। समाज-संसार के नियमों का पालन करते हुए ही मानव उन्नति के शिखर पर पहुँचता है। परिवार को अपने बच्चों में ये संस्कार शुरू से डालने चाहिए तभी वे समाज में उन्नति कर पाएँगे । यदि वे समाज – संसार के नियमों का पालन नहीं करेंगे तो संसार उनका साथ कभी नहीं देगा।
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(ग) “ उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
हमने देवताओं की पवित्र भारतभूमि में जन्म लिया है। जिसने इस परम सत्य की अनदेखी की वह मानव पृथ्वी पर, भारतवर्ष पर भार स्वरूप है। इस भूमि में जन्म लेने के लिए तो देवता भी तरसते हैं। हमारा देश यहाँ की धन-संपदा के कारण ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था। हमारी भारतभूमि ने कोहिनूर जैसे अनेक रत्न दिए हैं। यहाँ के महापुरुषों ने पूरे विश्व को विज्ञान का अनुपम ज्ञान दिया । यहाँ पर अनेक समाज-सुधारक तथा वैज्ञानिक हुए हैं, जिन्होंने विश्व को प्रकाशित किया है। विश्व को इतना कुछ देने वाली धरती पर जन्म लेकर भी अगर किसी में स्वदेश – प्रेम की भावना नहीं है, तो ऐसा व्यक्ति पृथ्वी पर व्यर्थ का बोझ हैं।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए ।
उत्तर:
‘स्वदेश’ कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। देश-प्रेम का अर्थ है- देशभक्ति अर्थात् अपने देश के प्रति सम्मान, प्रेम और निष्ठा का भाव होना । केवल इस भाव में इसका अर्थ नहीं समाहित हो सकता। यह तो संकुचित अर्थ हो जाएगा। यह केवल भावना नहीं है, अपितु स्वदेश की परंपराओं, संस्कृति, विचारधारा और देशवासियों के प्रति गर्व की भावना भी है।
देश-प्रेम से अभिप्राय देश की दुश्मनों से रक्षा करना, इसकी उन्नति और सभी प्रकार के विकास के लिए समर्पित होना है। देश-प्रेम की भावना अपने देश, यहाँ की संस्कृति और देशवासियों से प्रेम की भावना भी है। अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं की गर्वपूर्वक रक्षा करना भी देश-प्रेम है। देश के प्रति निष्ठावान होकर देश की उन्नति और समाज कल्याण के कार्य में सहयोग देना भी देश-प्रेम है।
कानून का सम्मान करना, देश की सुरक्षा संस्थाओं का अंग बनना, देश के विकास का अंग बनना आदि देश-प्रेम के अन्य कार्य हैं। कोई भी ऐसा कार्य न करना, जिससे विश्व में देश का अपमान हो तथा विश्व में देश का सिर ऊँचा करने संबंधी कार्य भी देश-प्रेम ही है।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है । इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर:
यह रचना एक आह्वान गीत है, जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस कविता में देश-प्रेम, राष्ट्रीयता और वीरता का उद्घोष है। यह कविता देशवासियों की सोई हुई चेतना को जगाने और देश के उत्थान के लिए प्रेरित करती है। इसमें देश की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया गया है। इस कविता में वीरता और शौर्य का भी उद्घोष किया गया है।
इसमें विदेशी शासकों के अत्याचारों का सामना करने की भी प्रेरणा दी गई है। इसमें विदेशी दासता से मुक्ति पाने के लिए देशवासियों को प्रोत्साहित किया गया है। यह कविता आज भी प्रासंगिक है। स्वदेशी प्रयोग करने के साथ-साथ लोगों को अपने उद्योग के लिए बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य है। सारांश में ओजस्वी और प्रभावशाली शैली में लिखी गई यह कविता देश-प्रेम, राष्ट्रीयता और वीरता के भावों को व्यक्त करते हुए पाठकों के मन में उत्साह और प्रेरणा का संचार करती है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खज़ाने की बात की गई होगी?
उत्तर:
“जिसने कि खज़ाने खोले हैं” पंक्ति में कवि ने हमारी मातृभूमि की खनिज संपदा के खजाने की बात कही होगी । भारत को इसकी समृद्ध खनिज संपदा के कारण सोने की चिड़िया कहा जाता था । यहाँ पर कोहिनूर जैसे अनुपम रत्न पाए गए हैं, जिसे अंग्रेज़ लूट कर ले गए। यहाँ पर अपार खनिज संपदा है। देश के विभाजन के कारण यहाँ की खनिज संपदा भी बँट गई।
चीन ने भी हमारे देश के भू-भाग के जिस हिस्से पर कब्ज़ा किया है, वहाँ पर भी खनिज संपदा की भरमार है। इसके साथ ही हमारे वीर सैनिक, हमारे वैज्ञानिक, हमारे शिक्षक भी अनमोल खजाने हैं, जिनके कारण आज पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति, वीरता और ज्ञान की धूम मची हुई है।

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े ‘ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा ?
उत्तर:
“जिसकी मिट्टी में उगे-बढ़े ” पंक्ति देश-प्रेम की भावना को बढ़ावा देने के लिए कही गई होगी, क्योंकि जिस मिट्टी में खेलकर हम बड़े हुए हैं, उसके प्रति आदर, प्रेम और निष्ठा का भाव होना अत्यंत आवश्यक है। इसी मिट्टी से हमें सब कुछ प्राप्त होता है। इसी से प्राप्त सामान का हम निर्यात करते हैं। जीवन रक्षक प्राण – वायु भी हमें इसी मिट्टी में उत्पन्न हुए पेड़-पौधों से प्राप्त होती है।
जल भी इसी मिट्टी से मिलता है। सर्वगुण संपन्न इस भारतमाता के प्रति प्रेम, निष्ठा एवं आदर का भाव रखना हम सभी भारतीयों का कर्तव्य है।
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है ” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
“वह हृदय नहीं है पत्थर है ” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग संवेदनहीनता और प्रेम-भावनाओं की अनुपस्थिति को दर्शाने के लिए किया गया होगा। यहाँ लक्षणा शब्द शक्ति का प्रयोग किया गया है। पत्थर कठोरता और निर्जीवता का प्रतीक है।
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
(संकेत – पत्थर – जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)
उत्तर:
मैं हिमालय के ऊँचे, हरे-भरे पहाड़ों का पत्थर था । मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझता था । सोचता था कि मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ। इससे अच्छा कुछ हो नहीं सकता। ऊँची-ऊँची चट्टानों का मैं हिस्सा हूँ। मेरा परिवार कितना हरा-भरा, सुंदर तथा खुशियों भरा है। मैं बहुत मज़बूत परिवार का अंग हूँ। समय गतिशील है। परिवर्तन जीवन का अहम भाग है।
मौसम और अन्य प्रभावों के कारण एक दिन मैं अपने परिवार (पहाड़) से अलग होकर बारिश के पानी के साथ बहते – बहते नदी में आकर मिल गया। मीलों की यात्रा करते हुए नदी के साथ बहते-बहते मैं बहुत दूर निकल गया । लगातार बहते हुए नीचे गिरना और उठकर आगे बढ़ना मेरा रोज़मर्रा का नियम बन गया। मेरे जीवन में एकरसता नहीं थी । नदी की धारा की वजह से मेरा जीवन परिवर्तनशील था ।
मुझमें मुश्किलों से लड़कर आगे बढ़ने का हौंसला था। कभी परेशान हो जाता तो कभी प्रसन्नता से नाच उठता। अब नदी पहाड़ों से निकलकर मैदानों में आ गई थी। इसलिए उसकी गति धीमी हो गई थी। बहते – बहते मैं भी कुछ पत्थरों के साथ नदी के किनारे आ लगा था। एक दिन कुछ लोग आए और अन्य पत्थरों के साथ मुझे भी ट्रक में भरकर ले गए।
मुझमें कोई सरसता नहीं बची थी और न तो संवेदनशीलता। सौभाग्य से एक दिन मुझे एक मूर्तिकार ने खरीद लिया और उसने मुझे तराशकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु का रूप दे दिया। एक दिन कुछ लोग आए और मुझे खरीदकर ले गए और मुझे मंदिर में प्रतिष्ठित कर दिया। आज मैं अपने भाग्य की सराहना कर रहा हूँ।
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। किसी भी देश के विकास के लिए वहाँ के प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधन दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं। इन्हें बचाकर रखना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों में जल, मिट्टी, खनिज, वन और ऊर्जा संसाधन आते हैं। मानव संसाधनों में शिक्षा, श्रम, कार्यकुशलता आते हैं। इनके संरक्षण के बिना विकास असंभव है।
वनों की कटाई आजकल बढ़ती जा रही है, इसे रोकना आवश्यक है। पेड़ों की कटाई से अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। मिट्टी का कटाव बढ़ता जा रहा है। ऑक्सीजन की मात्रा में भी कमी हो रही है, इसलिए पेड़ों को अधिक संख्या में लगाना भी ज़रूरी है।
पानी भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी बर्बादी से बचना चाहिए। इसकी बचत करनी चाहिए। साथ ही साथ वर्षा के जल का संरक्षण भी करना चाहिए। पानी का उपयोग ज़रूरत के अनुसार कम-से-कम करना चाहिए। खनिजों का प्रयोग भी समझदारी से करना चाहिए क्योंकि प्रकृति हमें एक सीमित मात्रा में खनिज उपलब्ध कराती है।
देश के प्रत्येक राज्य में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए। मानव संसाधनों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। सफाई के लिए लोगों को जागरूक करके देश की स्वास्थ्य संस्था को सहयोग दिया जा सकता है। विभिन्न कौशलों के द्वारा रोज़गार, व्यापार एवं निर्यात को बढ़ावा मिलता है। जिन संसाधनों का पुनः प्रयोग किया जा सकता है, उन पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे संसाधनों को दुबारा प्रयोग किया जाना चाहिए। इनसे देश विकास की ओर अग्रसर होता है।
कविता की रचना
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा”

इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए ।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
शब्दों के तुक मिलाने से कविता में लय उत्पन्न हो गई है। कविता में मधुरता आ गई। इसलिए उसे पढ़ना और सुनना मन को मोह लेता है। तुक समान मात्रा वाले शब्दों के जुड़ने से लयात्मक बन गए हैं और इससे कविता रोचक और प्रभावशाली लग रही है। इसके साथ ही कविता कंठस्थ करने में आसान हो गई है। कविता मनोरंजक है। तुकांत शब्द मस्तिष्क में छा जाते हैं।
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर:
कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए अर्थपूर्ण शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है। शब्द पाठक के अंतर्मन को छूने वाले और सार्थक हैं । कविता एक मज़बूत संदेश देने वाली है। इसमें एक स्पष्ट दृष्टिकोण है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि कविता को रचते समय कवि ने शब्दों, लय, कल्पना इन सबका प्रयोग बहुत सोच-समझकर किया है। इसकी व्यक्तिगत एवं सामाजिक अनुभवों का सहारा लेकर जन कल्याण को ध्यान में रखकर इसकी रचना की गई है। कविता को प्रभावशाली बनाने में अलंकार और शब्द-शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आपकी कविता
देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।
…………………………
…………………………
उत्तर:
विद्यार्थी देश-प्रेम से जुड़े विचारों को आधार बनाकर कविता को आगे बढ़ाएँ।
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भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए-

उत्तर:
स्वदेशी, स्वदेशप्रेम, स्वदेशप्रेमी, स्वदेशभक्त, स्वदेशवासी, स्वदेशगमन, स्वदेशनिर्मित, स्वदेशत्याग, स्वदेशज, स्वदेशाभिमान ।
(ख) विराम चिह्नों को समझें

“जो चल न सका संसार – संग”
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी
““हैं माता-पिता बंधु जिसमें
“हम हैं जिसके राजा – रानी
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए । इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत-‘जो चल न सका संसार के संग ‘)

उत्तर:
“बहती जिसमें रस की धार नहीं ”
“पाया जिसमें दाना और पानी”
हैं माता और पिता बंधु जिसमें
“हम हैं जिसके राजा और रानी”
“जिससे न जाति का उद्धार हुआ”
(ग) शब्द – मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल – दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है ।’
‘काल-दीप हरदम जलता है ।’
• अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए, जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए |
उत्तर:
- जो भरा नहीं है भावों से
जो भावों से नहीं भरा है।
- हैं माता-पिता बंधु जिसमें
जिसमें माता-पिता बंधु हैं। - हम हैं जिनके राजा-रानी
हम जिनके राजा-रानी हैं। - निश्चित है निस्संशय
निश्चित निश्चित निस्संशय निश्चित है। - जिस पर है दुनिया दीवानी
जिस पर दुनिया दीवानी है। - क्या है वह भू का भार नहीं
क्या वह भू का भार नहीं है।
- है जान एक दिन जाने को
जान एक दिन जाने को है । - जल जाना है परवानों को
परवानों को जल जाना है। - सब कुछ है अपने हाथों में
सब कुछ अपने हाथों में है।
• अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए ।
“ जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी ॥”
हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते,
है जिस पर दुनिया दीवानी ॥
उत्तर:
विद्यार्थी साथियों के साथ इसके सौंदर्य पर चर्चा करें।
(घ) समानार्थी शब्द

कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
समानार्थी शब्द – दिल, पाहन, प्रदीप, धरा, जग, असि, पृथ्वी, संसार, कृपाण, जी, दीपक, पाषाण
उत्तर:
- भू-धरा, पृथ्वी
- दीप – दीपक, प्रदीप
- हृदय – दिल जी
- तलवार – असि कृपाण
- दुनिया – जग, संसार
- पत्थर – पाषाण, पाहन
कविता का शीर्षक
“वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों ?
उत्तर:
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ॥
इस पंक्ति के माध्यम से देश-प्रेम की भावना झलकती है। इसके अतिरिक्त यह पंक्ति भी उपयुक्त है।
जिस पर है दुनिया दीवानी॥
इस पंक्ति के माध्यम से भारतवर्ष के गौरव, तथा महिमा का मंडन किया गया है। हमारा भारतवर्ष इतना महान है कि इसकी ज्ञान संपदा की छाप पूरे विश्व पर है। पूरा विश्व हमारे देश की महिमा एवं संस्कृति का दीवाना है ।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

उत्तर:
(चित्रों के लिए पाठ्य पुस्तक की पृष्ठ संख्या 9-10 देखें)
क्रमशः
(✓) (✗)
(✓) (✓)
(✓) (✓)
(✓)
(✓) (✓)
(✗) (✓)
(✓) (✓)
(✗) (✗)
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(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए ।
उत्तर:
(चित्रों के लिए पाठ्य पुस्तक की पृष्ठ संख्या 9-10 देखें)
क्रमशः
- इस चित्र में एक बाला प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी देश-प्रेम की भावना से प्रेरित है।
- फ़र्श पर कूड़ा है। ये देश हित में नहीं है।
- खेल प्रतियोगिता के माध्यम से देश को मान-सम्मान मिलता है। यह देश – प्रेम से प्रेरित है।
- स्वयं दिव्यांग होते हुए दूसरों के प्रति सेवा-भाव मानव-प्रेम है। मानव-प्रेम सबसे बड़ा देश – प्रेम है ।
- फौजी देश के रक्षक होते हैं। उनका सम्मान देश-प्रेम है।
- वातावरण को स्वच्छ रखना अच्छा कार्य है। यह देश-प्रेम है।
- किसान अन्नदाता होते हैं। ये मानव साधन का संरक्षण करते हैं। मानव संसाधन का संरक्षण देश-प्रेम का अंग है।
- बुजुर्गों की सहायता करना हमारी सभ्यता और संस्कृति है। यह देश का मान सम्मान बढ़ाता है। अतः यह भी देश-प्रेम है।
- कुतुबमीनार हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यह प्राचीन इमारत हमारे इतिहास के बारे में हमें परिचित कराती है। इसको किसी प्रकार की क्षति पहुँचाना देश-प्रेम नहीं हो सकता।
- राष्ट्रीय ध्वज देश का गौरव व सम्मान होता है । नागरिकों द्वारा हमेशा ध्वज को सम्मान देना चाहिए। यह जो हम इस चित्र में देख रहे हैं, यह देश – प्रेम है।
- बैंक सभी देशों की वित्तीय प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग होते हैं। बैंक के नियमों का पालन करना देश-प्रेम है।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण देश-प्रेम के अंतर्गत आता है।
- कार्यालय में कोई काम नहीं कर रहा है, किंतु पंखा, ए.सी. व्यर्थ चल रहे हैं। बल्ब जल रहा है। यह कार्य देश की ऊर्जा का अपव्यय है। यह देश के लिए हानिकारक है । अत: यह देश-प्रेम के विपरीत है।
- इस चित्र में बातचीत और बहस में जल की बर्बादी हो रही है। जल व्यर्थ बह रहा है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। यह देश के प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान है, अतः देश-प्रेम के विपरीत है।
हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।’
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
- विद्यार्थी – …………………..
- अध्यापक – …………………
- कृषक – …………………..
- चिकित्सक – …………………….
- वैज्ञानिक – ……………………
- श्रमिक – …………………….
- पत्रकार – ………………….
उत्तर:
- विद्यार्थी – ज्ञान, शिक्षा, अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास
- अध्यापक – ज्ञान, समर्पण, सहानुभूति, संचार कौशल
- कृषक – दराँती, फावड़ा, ट्रैक्टर, हल, हार्वेस्टर
- चिकित्सक – वेंटिलेटर, ईसीजी मशीन, रक्तचाप मॉनिटर, एक्स-रे मशीन’
- वैज्ञानिक – एमीटर, बैरोमीटर, माइक्रोस्कोप, टेलीस्कोप’
- श्रमिक – कुदाल, फावड़ा, खुरफी
- पत्रकार – कलम, कागज़, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा
अपनी भाषा अपने गीत
(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास
राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
झरोखे से
• आपने देश – प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए ।
खादी गीत

खादी के धागे- धागे में
अपनेपन का अभिमान भरा,
माता का इसमें मान भरा,
अन्यायी का अपमान भरा;
खादी के रेशे – रेशे में
अपने भाई का प्यार भरा,
माँ-बहनों का सत्कार भरा,
बच्चों का मधुर दुलार भरा;
खादी की रजत चंद्रिका जब,
आकर तन पर मुसकाती है,
तब नवजीवन की नई ज्योति
अंतस्तल में जग जाती है;
उत्तर:
विद्यार्थी पढ़कर समझें ।
साझी समझ
आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए ।
उत्तर:
‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ दोनों ही आज़ादी से पूर्व भारतवासियों को अंग्रेज़ों की गुलामी से आजाद करवाने के लिए जनता को जागरूक करने के लिए लिखी गई थी।
स्वदेश कविता में कवि देश के प्रति प्रेम, गौरव और समर्पण की भावना को व्यक्त करते हैं। वे देश के प्रति कर्तव्य और ज़िम्मेदारियों का एहसास कराते हैं । कवि देश-प्रेम से रहित भावना वाले व्यक्ति के हृदय को पत्थर मानते हैं। इसमें जाति शब्द का प्रयोग संपूर्ण मानव जाति के लिए किया गया है।
यह देशभक्ति के साथ – साथ बलिदान की भावना को जागृत करती है। इसमें देश के धन व खनिज संपदा का वर्णन किया गया है। देश के विद्वानों ने विश्व को जो राह दिखाई है, उसका गुणगान किया गया है।
‘खादी गीत’ भी देश-प्रेम की श्रेणी में आता है। खादी के कपड़े भारतीयों द्वारा स्वयं बनाए जाते थे। इस प्रकार का कपड़ा अंग्रेज़ों के कपड़ों के व्यवसाय पर कुठाराघात था। अधिकांश भारतीय उस समय बहुत गरीब थे। स्वयं का बुना कपड़ा उनके लिए वरदान साबित हुआ।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं—
- सारे जहाँ से अच्छा
https://www.youtube.com/watch?v=xestTq6jdjI - दीवानों की हस्ती
https://www.youtube.com/watch?v=n4LOnShHEC4 - झाँसी की रानी
https://www.youtube.com/watch?v=QpTL2qBOiwc
उत्तर:
विद्यार्थी दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर विभिन्न रचनाएँ पढ़ें।