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The Gupta Era An Age of Tireless Creativity Class 7 Notes in Hindi
गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 7 नोट्स गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग
→ संहिताबद्ध : व्यवस्थित या क्रमबद्ध रूप से लिखा हुआ।
→ आयुर्वेद : एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली जो समग्र चिकित्सा और मन, शरीर और प्रकृति के बीच संबंध पर जोर देती है।
→ चरक संहिता : आयुर्वेद का एक प्राचीन ग्रंथ, जो चिकित्सा और शल्य चिकित्सा के सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है।
→ सुश्रुत संहिता : आयुर्वेद का एक अन्य मौलिक ग्रंथ, जो प्राचीन चिकित्सक सुश्रुत द्वारा लिखा गया है और शल्य चिकित्सा तकनीकों पर केंद्रित है।
→ वर्ण व्यवस्था : प्राचीन भारत में चार सामाजिक वर्गों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) की व्यवस्था, जिसमें वैश्य वर्ग व्यापार और वाणिज्य से जुड़ा था।
→ वैश्य : चार वर्णों में से एक, जो मुख्य रूप से व्यापार और वाणिज्य से संबंधित है। गुप्त काल में वैश्य परिवारों की दानशीलता का उल्लेख किया गया है।
→ प्रतिशासिका : वह व्यक्ति, जो अल्पवयस्क राजा के स्थान पर अस्थायी रूप से राज्य का शासन तब तक सँभालता है, जब तक अल्पवयस्क राजा स्वयं शासन करने योग्य न हो।
→ संरक्षण : शासकों या धनवान व्यक्तियों द्वारा कलाकारों, विद्वानों और कारीगरों को दी जाने वाली सहायता, जो गुप्त काल की सांस्कृतिक और कलात्मक उपलब्धियों में महत्वपूर्ण थी।
→ बहिष्कृत : वह व्यक्ति जिसे किसी सामाजिक या सांस्कृतिक समूह से बाहर कर दिया गया हो।
→ गुप्त काल :
- गुप्त काल वर्तमान उत्तर प्रदेश-बिहार में श्री गुप्त द्वारा स्थापित किया गया था।
- यह सृजनशीलता और ज्ञान का युग है (जैसा कि कालिदास ने कहा है)।
- इस काल को कला, साहित्य, विज्ञान आदि के लिए ‘उत्कृष्ट युग’ के रूप में जाना जाता है।
- इसका मुख्यालय पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) था।
- इस काल के समकालीन राज्य थे-पल्लव, कामरूप, वाकाटक
- लौह का स्तंभ (दिल्ली)-चंद्रगुप्त द्वितीय, राजा की उपलब्धियाँ।
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प्रमुख राजा
→ समुद्रगुप्त :
- चंद्रगुप्त प्रथम के पुत्र।
- संपूर्ण पृथ्वी को एकजुट करना चाहते थे।
- साम्राज्य का विस्तार किया, कई राजाओं को पराजित किया और उन्हें अधीनस्थ बनाया।
- हरिषेण (राजकवि) कहते हैं कि समुद्रगुप्त ने कला, ज्ञान और व्यापार को प्रोत्साहन दिया।
- एक संगीतकार (वीणा बजाते हुए, जो सिक्के पर दिखाया गया है)। अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया।
- ‘योद्धा शासक’ के रूप में जाने जाते हैं (प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार)।
→ चंद्रगुप्त द्वितीय:
- उन्हें विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है।
- दिल्ली में लौह का स्तंभ स्थापित किया।
- विष्णु के उपासक थे।
- समुद्रगुप्त के पुत्र थे।
- उनके बाद प्रभावती गुप्त थीं, जो एक वाकाटक रानी थीं।
- प्रभावती-जो विष्णु की अनुयायी थीं- ने कई मंदिर बनवाए।
- उन्हें दो राजाओं की माँ के रूप में जाना जाता है।
- उनके पुत्र वाकाटक शासक बने।
- चंद्रगुप्त के दरबार में कई कवि और विद्वान थे।
→ विस्तार :
- विष्णु पुराण में विस्तृत।
- प्रमुख क्षेत्र-अनुगंगा, प्रयाग, साकेत मगध।
- मुख्यत : उत्तर और पश्चिम भारत मध्य और पूर्व भारत के कुछ हिस्से।
- वाकाटक को मित्र बनाया (सामरिक गठबंधन, विवाह गठबंधन)।
- पल्लव को पराजित किया।
यात्री और ऐतिहासिक लेखा-जोखा
→ यात्री :
- फा-शिएन (चीनी यात्री)-बौद्ध स्थलों का अन्वेषण किया।
- पंजीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी।
- किसान (कर के रूप में) अनाज राजा को देते थे।
- राजा के रक्षक को वेतन दिया जाता था।
- समृद्ध शहर, दान देने वाले लोग, आम लोगों के लिए औषधि की व्यवस्था।
→ ऐतिहासिक विवरण :
- सामाजिक असमानता, बहिष्कृत के प्रति कठोर व्यवहार।
- शासकों ने अपनी सत्ता को स्थापित करने के लिए भव्य उपाधियाँ अपनाई।
- विस्तार की रणनीति-विजय और गठबंधन।
पतन (6वीं शताब्दी सां.स.)
→ कारक :
- हूणों का आक्रमण (मध्य एशिया की जनजातियाँ)।
- आंतरिक संघर्ष।
- कामरूप (पूर्वोत्तर भारत), पल्लव (दक्षिण) (भारत) जैसे क्षेत्रीय शक्तियों का उदय।
→ पल्लव :
- दक्षिण का साम्राज्य (तमिलनाडु, कर्नाटका, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश)।
- राजधानी : कांचीपुरम (हजारों मंदिरों का नगर)।
- कला-वास्तुकला का संरक्षक।
- भव्य मंदिर और चट्टानों को काटकर गुफाएँ बनाई।
→ कामरूप साम्राज्य :
- वर्मन वंश द्वारा शासित।
- ब्रह्मपुत्र घाटी में (उत्तर-पूर्व)।
- सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र।
→ प्रशासन और व्यापार :
- राज्यों को प्रांतों में विभाजित किया गया।
- स्थानीय शासकों, पुजारियों और मुखियाओं के लिए भूमि दान।
- ताम्र पत्र-कर और दान संरक्षित करने के लिए।
- राजस्व का स्रोत-कर जुर्माना, खानों पर कर, सिंचाई, व्यापार, शिल्प।
- व्यापार-भूमध्य सागर वह पूर्व एशिया, चीन के साथ।
→ उत्कृष्ट युग :
- सांस्कृतिक और बौद्धिक उपलब्धियाँ हुई।
- इस काल में संस्कृत साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र चिकित्सा और धातुकर्म महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
→ आर्यभट :
- उन्होंने ‘आर्यभटीय’ नामक ग्रंथ लिखा।
- इसमें ग्रहों की गति और पृथ्वी के घूर्णन की गणना की गई है।
- वर्ष की अवधि और चंद्र ग्रहण की गणना भी की गई है।
→ वराहमिहिर :
- उन्होंने ‘वृहत्संहिता’ नामक ग्रंथ लिखा।
- इसमें खगोलशास्त्र, वास्तुकला और कृषि के विषयों पर जानकारी दी गई है।
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→ कालिदास :
- वे संस्कृत साहित्य और आलंकारिक कविता के महान कवि थे।
- उनकी प्रसिद्ध रचना ‘मेघदूतम्’ में भावनात्मक, प्राकृतिक और भौगोलिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।
→ आयुर्वेद :
- प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली-संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर ध्यान केंद्रित।
- गुप्त काल के दौरान संहिताबद्ध।
- चिकित्सा ग्रंथ : चरक संहिता, सुश्रुत संहिता।
→ कला :
- सुंदरता और सौंदर्य के उच्च मानकों को दर्शाती है।
- सारनाथ-बुद्ध की मूर्ति।
- अजंता की गुफाएँ चट्टानों को काटकर बनाई गई वास्तुकला और केंद्रीय स्तूप (गुप्त और वाकाटक दोनों)।
- गंगा (मकर के साथ दर्शाई गई) यमुना (कछुए के साथ दर्शाई गई।
- चित्रकला – बोधिसत्व पद्मपाणि।
- उदयगिरि गुफाएँ (मध्य प्रदेश), अर्जुन- कर्ण युद्ध (महाभारत से)।
महत्वपूर्ण सांस्कृतिक-राजनीतिक केंद्र :
- कामरूप (ब्रह्मपुत्र घाटी) – मंदिर / मठ- अध्ययन के केंद्र।
- प्रयाग प्रशस्ति में उल्लेख- पल्लवों और कामरूप का समुद्रगुप्त ने पल्लवों और कामरूप के शासकों को पराजित किया।