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The Age of Reorganisation Class 7 Notes in Hindi
पुनर्गठन का काल Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 नोट्स पुनर्गठन का काल
→ पुनर्गठन का काल : यह वह काल है जब मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद नए राज्यों का उदय हुआ और भारत के राजनीतिक परिदृश्य का पुनर्गठन हुआ।
→ वैवाहिक गठबंधन : यह एक प्रकार का गठबंधन है जो शाही परिवारों के बीच विवाह के माध्यम से स्थापित किया जाता है, ताकि
राजनीतिक संबंधों को मजबूत किया जा सके।
→ अश्वमेध यज्ञ : यह एक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें एक घोड़े को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जाता है, और जिस क्षेत्र से वह बिना चुनौती के गुजरता है, वह राजा के साम्राज्य का हिस्सा बन जाता है।
→ संस्कृत : यह भारत की एक प्राचीन भाषा है, जिसका उपयोग दार्शनिक और साहित्यिक कार्यों के लिए किया जाता है।
→ ब्राह्मी लिपि : यह भारत में प्रयुक्त एक प्राचीन लिपि है, जो कई आधुनिक भारतीय लिपियों की पूर्वज है।
→ वैदिक अनुष्ठान : ये धार्मिक समारोह और प्रथाएँ हैं जो वेदों से उत्पन्न होती हैं, जो प्राचीन भारतीय शास्त्र हैं।
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→ चट्टान-कटी वास्तुकला : यह एक वास्तुकला की शैली है जिसमें संरचनाएँ ठोस चट्टान से काटकर बनाई जाती हैं।
→ इंडो-ग्रीक : यह एक समूह है जो हेलनिस्टिक साम्राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों पर शासन किया।
→ सांस्कृतिक संगम : यह विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं और प्रथाओं का मिश्रण और विलय है।
→ वंश : यह एक ही परिवार या वंश के शासकों की एक श्रृंखला है।
→ शुंग साम्राज्य का उदय :
- शुंग साम्राज्य की स्थापना पुष्यमित्र द्वारा की गई थी।
- उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया।
- वैदिक अनुष्ठानों और संस्कृत साहित्य (जैसे कि पाणिनी द्वारा योग सूत्र)।
- शुंग साम्राज्य का ग्रीकों के साथ मित्रवत संबंध था।
- शुंग कला में वेदिकाएँ और स्तंभों की सुंदर नक्काशी शामिल थी।
- भरहुत स्तूप (मध्य प्रदेश)।
→ सातवाहन साम्राज्य :
- साम्राज्य-यह दक्कन, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना. और महाराष्ट्र में शासन करता था।
- महत्वपूर्ण शासक-गौतमीपुत्र शातकर्णी।
- साम्राज्य का विघटन-3री शताब्दी सा.सं. पू. में हुआ।
- राजधानी- अमरावती और प्रतिष्ठान।
→ अर्थव्यवस्था :
- सिक्के दिखाते हैं- व्यापार तंत्र जहाज निर्माण, नौपरिवहन की तकनीक।
- ‘कृषि-कृष्णा-गोदावरी बेसिन।
- रोमनों के साथ व्यापार-मसाले, वस्त्र, विलासिता की वस्तुएँ।
→ समाज और संस्कृति :
- नासिक शिलालेख-बौद्ध भिक्षुओं को दान दिया गया।
- महिलाओं का सामाजिक दर्जा- महिलाओं का सामाजिक दर्जा अधिक था।
- राजा-वासुदेव के भक्त, वैदिक विद्वानों को कर-मुक्त भूमि दी गई।
- कार्ले गुफाएँ (महाराष्ट्र)-बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाई गई थीं।
→ चेदि :
- कलिंग (उड़ीसा) में
- महत्वपूर्ण शासक-खारवेल
→ खारवेल :
जैन धर्म का पालन करते थे, सभी धर्मों का सम्मान करते थे।
• मुनियों एवं ऋषियों की परिषद बनाई।
→ कला-शिल्पकला :
- उदयगिरि- खंडगिरि गुफाएँ ये गुफाएँ चट्टानों को काटकर बनाई गई और जैन भिक्षुओं के लिए हैं।
- हाथीगुंफा लेख-इसमें खारवेल के उपलब्धियों, दान और विजय का
→ पुनर्गठन का काल :
- मौर्य साम्राज्य के बाद का काल।
- संस्कृति और समाज में परिवर्तन का समय।
- आक्रमणकारियों का स्थानीय समाज में समाहित होना।
- नए राज्यों का उदय।
- शुंग, सातवाहन, कुषाण, शक, चेदि, चोल, चेर और पांड्य राज्यों का उदय।
→ दक्षिण के राज्य :
- संगम साहित्य में तीन राजाओं का उल्लेख मिलता है-चोल, चेर, पांड्य।
- ये मौर्य साम्राज्य से स्वतंत्र रहे।
→ चोल (तमिलनाडु क्षेत्र) :
- राजा करिकाल ने चेर और पांड्य की संयुक्त सेना को पराजित किया।
- उन्होंने ग्रैंड एनीकट बाँध बनाया।
- ग्रैंड एनीकट-कावेरी डेल्टा में स्थित है-इसे ‘दक्षिण का अन्न भंडार’ कहा जाता है।
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→ चेर (तमिलनाडु और केरल) :
- राजधानी : वेजि
- इन्हें केरलपुत्र भी कहा जाता है।
- इनके काल में संस्कृति और अर्थव्यवस्था का विकास हुआ।
- इन्होंने तमिल साहित्य और संगम कवियों को बढ़ावा दिया।
- रोम के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए।
→ पांड्य (तमिलनाडु के हिस्से) :
- राजधानी : मदुरै।
- मजबूत प्रशासन, मजबूत नौसेना।
- ग्रीक और रोमन के साथ व्यापार, सबसे अधिक व्यापारित वस्तु-मोती।
- जनकल्याण, विविध विश्वासों का समर्थन।
→ संगम साहित्य :
- दक्षिण भारत का सबसे प्राचीनतम साहित्य, जो विभिन्न काव्य-संग्रहों का समावेश है।
- कविताएँ – व्यक्तिगत भावनाएँ सामाजिक मूल्य, संस्कृति।
→ सिलप्पदिकारम् :
पाँच तमिल महाकाव्यों में से एक।
- यह न्याय, सामाजिक व्यवस्था और नैतिक मूल्यों के बारे में बात करती है।
- कहानी कोवलन और उसकी पत्नी कण्णगी की है।
→ शक :
- शक संवत पंचांग विकसित किया।
- यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से 78 वर्ष पीछे है।
- इसे भारत का राष्ट्रीय पंचांग स्वीकार किया गया है।
→ कुषाण :
- कुषाण मध्य एशिया से उत्पन्न हुए।
- प्रसिद्ध शासक-कनिष्क (राजाओं का राजा)।
- कनिष्क की बिना सिर की मूर्ति उनकी शक्ति को दर्शाती है।
→ व्यापार / व्यापार मार्ग / सिक्के :
- भारत एशिया और पश्चिम, फारस के साथ व्यापार।
- रेशम मार्ग (चीन-मध्य सागर) के बड़े हिस्से पर नियंत्रण।
- सिक्कों पर भाला और उपाधि (राजाओं का (राजा) दर्शाया गया।
- ग्रीक लिपि संस्कृति के मिश्रण को दर्शाती है।
- रेशम मार्ग पर बाइजेंटियम, एंटीऑक एलेक्जेन्ड्रिया, रोम के साथ व्यापार।
→ कला / वास्तुकला :
- ग्रीक और भारतीय कला का मिश्रण।
- विभिन्न संस्कृतियों का सह-अस्तित्व दर्शाता है।
- उदाहरण-गांधार और मथुरा कला विद्यालय।
- चित्रित करता है-बुद्ध की मृत्यु. मैत्रेया बुद्ध, शिवलिंग, नाग, कार्तिकेय, अग्नि।
→ मथुरा कला :
- मथुरा क्षेत्र, उत्तर भारत में स्थित।
- यहाँ मूर्तियों के लिए लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ था।
- मूर्तियों में शरीर की आकृतियाँ प्रायः मृदुलाकार (गोल-मटोल) और चिकनी होती हैं।
- यह कला भारतीय विषयों पर आधारित है।
- ग्रीको-रोमन प्रभाव कम है।
→ गांधार कला
- पंजाब के पश्चिमी क्षेत्र में,
- आकृतियों के जटिल विवरण, ग्रीको-रोमन तत्वों का समायोजन दिखाई देता है।
- स्लेटी-काला शिस्ट पत्थर का उपयोग।
- बुद्ध की मूर्तियों में उनका शरीर और उड़ते हुए वस्त्र वास्तविक प्रतीत होते हैं।
→ इंडो-ग्रीक आक्रमण :
- उत्तर-पश्चिम भारत से,
- क्षत्रपों (एलेक्जेंडर के गर्वनर) द्वारा शासित।
- स्थानीय संस्कृति पर प्रभाव।
- शासन, कला, भाषा पर प्रभाव।
- हेलियोडोरस स्तंभ (विदिशा)।
- इंडो-ग्रीक सिक्के शासकों और संस्कृति के बारे में जानकारी देते हैं।
- शासन का अंत शकों द्वारा हुआ।
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→ समय-रेखा
185 सा.सं.पू. :
पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य सम्राट को हत्या की, जिससे शुंग वंश की स्थापना हुई।
100 सा.सं.पू. :
चेदि का मध्य भारत में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उदय।
100 सा.सं.पू. – 200 सा.सं :
गौतमीपुत्र सातवाहन, सातवाहन वंश के एक प्रमुख शासक, जिन्होंने शक्ति को एकत्रित किया और व्यापार को बढ़ावा दिया।
100 सा.सं. :
खारवेल, कलिंग का राजा, जो अपने सैन्य अभियानों और हाथीगुफा शिलालेख के लिए जाना जाता है, जिसमें उसकी उपलब्धियों का विवरण है।
100 सा.सं. – 200 सा.सं. :
कुषाण साम्राज्य का उदय, जो उत्तरी भारत में फैला और रेशम मार्ग के साथ व्यापार को बढ़ावा दिया।
100 सा.सं. – 300 सा.सं.
कनिष्क, कुषाणों का प्रमुख सम्राट जो बौद्ध धर्म और कला का संरक्षक था।
200 सा.सं. :
उत्तर-पश्चिम भारत में इंडो-ग्रीक शासकों का प्रभाव, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान में योगदान करते हैं।
200 सा.सं. :
पश्चिमी भारत में शक वंश की स्थापना, जो व्यापार और सांस्कृतिक योगदान के लिए जाना जाता है।
200 सा.सं. – 300 सा.सं. :
सातवाहन वंश जो कला और साहित्य के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
300 सा.सं. – 1300 सा.सं. :
चोल वंश का उदय, चोल राजा करिकाल के शासन में दक्षिण भारत में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन गया,
300 सा.सं. :
चेरा वंश का विकास, जो रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार संबंधों के लिए जाना जाता है।
300 सा.सं. : पांड्य वंश जो अपनी नौसैनिक शक्ति और व्यापार के लिए जाना जाता है।