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The Rise of Empires Class 7 Notes in Hindi
साम्राज्यों का उदय Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 नोट्स साम्राज्यों का उदय
→ साम्राज्य : एक बड़ा भू-भाग या भू-भागों का समूह जो एक ही शासक या सरकार के नियंत्रण में होता है।
→ सम्राट : एक शासक जो साम्राज्य पर सर्वोच्च अधिकार रखता है।
→ अधीन : एक राज्य या शासक जो एक अधिक शक्तिशाली राज्य या शासक को श्रद्धांजलि देता है, यह समर्पण का प्रतीक है।
→ इंपेरियम : एक लॅटिन शब्द जिसका अर्थ है ‘सर्वोच्च शक्ति’, अक्सर सम्राट के अधिकार का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
→ सम्राज : एक प्राचीन संस्कृत शब्द जिसका अर्थ है ‘सभी का स्वामी’ या ‘सर्वोच्च शासक’।
→ महाजनपद : प्राचीन भारत में बड़े राज्य, जो लगभग छठी से चौथी शताब्दी सा.सं.पू. के आस-पास अस्तित्व में थे।
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→ श्रेणियाँ (गिल्ड्स) : कारीगरों या व्यापारियों का एक संघ जो अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक साथ काम करते हैं।
→ नंद वंश : प्राचीन भारत में एक शासक वंश जो छोटे राज्यों को एकीकृत करने और अपने क्षेत्र का विस्तार करने के लिए जाना जाता है।
→ मगध : भारत का एक प्राचीन राज्य जो शक्ति का एक प्रमुख केंद्र बन गया और भारत के पहले साम्राज्य की नींव रखी।
→ छत्र : एक छाता या छत्र जो प्राचीन भारतीय संस्कृति में शाही या सुरक्षा के प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता था।
→ मौर्य साम्राज्य : प्राचीन भारत का एक सबसे बड़ा साम्राज्य, जो अपने विस्तृत क्षेत्र और केंद्रीकृत प्रशासन के लिए जाना जाता है।
→ साम्राज्य
- एक बड़ा राजनीतिक इकाई जो एक ही शासक के अधीन होती है।
- भारतीय सभ्यता को आकार दिया।
- राज्य से साम्राज्य में परिवर्तन के कारण सैन्य विजय रणनीतिक गठबंधन केंद्रीकृत शासन !
→ साम्राज्य की विशेषताएँ
- बड़ी सेनाएँ संरचित प्रशासन।
- कानून, मुद्रा, निव्यापार।
- संसाधन पर नियंत्रण।
- कला साहित्य और शिक्षा को बढाया।
- संगार तंत्र का विकास (राजमार्ग नदी नौवहन)।
- सम्राट का अधीन (उपकरणाओं) पर नियंत्रण।
→ विस्तार की प्रेरणा
- सामर्थ्य दिखाने के लिए बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण।
- इच्छा को कि भावी पीढ़ियाँ उन्हें याद रखेंगी।
- संसाधनों (खनिज, वन, कृषि उत्पाद जनशक्ति) का नियंत्रण व उनका विनियमन।
- अपने और साम्राज्य के लिए धन की खोज।
→ विस्तार की रणनीति
- रणनीतिक स्थानों पर मजबूत बस्तियाँ बनाना।
- व्यापार मार्गों पर नियंत्रण।
- सीमावर्ती क्षेत्रों पर आक्रमण।
- राज्य के पास प्रबल सैन्य बल तथा अधिशेष संसाधन।
→ आर्थिक विकास (नंद)
- अधिक भोजन में कला और शिल्प को हावा दिया।
- व्यापार और परिवहन (नदी के माध्यम से) को बढ़ावा मिला।
- महानंद द्वारा एकीकरण और विस्तार किया गया।
- आर्थिक समृद्धि से सिक्कों का प्रचलन आरंभ हुआ।
- धनानंद, अलोकप्रिय सम्राट साम्राज्य का पतन।
→ आर्थिक आधार
- बड़े सेना को बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधन और कार्यबल।
- फरक-फूलते व्याप।
- नए व्यापार मार्गों की स्थापना और उन पर नियंत्रण।
- स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना।
- श्रेणियाँ (गिल्स) का गठन।
→ व्यापार श्रेणियाँ की भूमिका
- व्यापारियों के बीच आर्थिक सहयोग।
- प्रतिस्पर्धा में कमी।
- निर्वाचित नेता और नैतिक मानक!
- आंतरिक नियमों का निर्माण करने की स्वतंत्रता प्राप्त थी।
- स्वायत्त संगठन
→ मगध का उदय और व्यापार श्रेणियाँ
- श्रेणियाँ-एक ही पेशे के लोगों का समूह।
- अपने नियमों का निर्माण करने की स्वतंत्रता प्राप्त थीं।
- पूरे भारत में थे।
- व्यापार और अन्य गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव।
- आत्म-शासन और स्व-संगठित होने की अवधारणा की शुरुआत।
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→ मगध का उदय
- प्रमुख साम्राज्य (600 – 400 सा.सं.पू.)
- मगध साम्राज्य ने अजातशत्रु के द्वारा केंद्रीय शक्ति बनाई।
- कारण : उपजाऊ गंगा का मैदान, संसाधनों की प्रचुरता, लोहे की तकनीक, उत्पादक कृषि अधिशेष, विकसित हथियार।
→ मौर्य साम्राज्य का पतन
- अशोक के निधन के 50 साल बाद मौर्य साम्राज्य का पतन हुआ।
- छोटे छोटे साम्राज्यों का उदय (185 सा.सं. पू.)।
→ यवनों का आक्रमण
- ग्रीकों ने फारम (ईरान) पर विजय प्राप्त करने के बाद भारत (उत्तर-पश्चिम) पर आक्रमण किया।
- एलेक्जेंडर (ग्रीक शासक) का साम्राज्य 3 महाद्वीपों में विस्तृत था।
- एलेक्जेंडर ने पोरस को हराया और शासकों (अप) को शासन करने के लिए छोड़ा।
- विद्रोह तथा राजनीतिक उथल-पुथल के कारण एलेक्जेंडर पहन लिया और वेबोलीन में निधन हो गया।
- एलेक्जेंडर ने कईग्नोफस्ट (भारतीय दर्शकों) से मुलाकात की।
→ कौटिल्य
- कौटिल्य जिन्हें चाय और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है. धनानंद के दरबार में कार्यरत थे। बाद में उन्होंने चंद्रगुप्त को सहायता प्रदान की।
- कौटिल्य ने चंद्रगुप्त को धनानंद को हराने में मदद की।
- चंद्रगुप्त ने क्षत्रप को हराया और उत्तर- पश्चिमी क्षेत्र को भारत में समाहित किया।
→ कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत
• राज्य के 7 तत्व – राजा किलेबंद कस्बे, अधिकारी, राजकोष, सहयोगी सेना क्षेत्र और जनसंख्या।
→ कौटिल्य का शासन
- राज्य के लिए स्थिर और समृद्ध शासन के लिए 7 तत्व आवश्यक हैं।
- उन्होंने युद्ध और शांतिपूर्ण गठबंधन में विश्वास किया।
- उनका प्रशासन मजबूत था ग्रानी क्षेत्र राजा के लिए शक्तिका
- प्रजा की खुशहाली भी उनके शासन का एक महत्त्वपूर्ण पहलू था।
→ अशोक
- मी साम्राज्य का विस्तार।
- कलिंग युद्ध लड़ा-अहिंसा और बौद्ध धर्म को अपनाया।
- बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए दूत भेजे।
- शिलालेखों में युद्ध की विनाशकारिता को स्वीकार किया, महान संचारक।
- शिलालेख प्राकृत (सामान्य) भाषा में लहानों/स्तंभों पर अंकित किए गए।
→ शासन
- खुद को ‘देवानामषिय पिवदसि’ कहा।
- पशुता को रोका चिकित्सा देखभाल प्रदान को विश्रामगृह कुएं, सड़कें बनाई सड़कों का फलदार एवं दार वृक्ष लगाए।
- अधिकारियों को अच्छे व्यवहार का आदेश दिया।
→ धम्म
- नैतिक कानून, कर्तव्य, सत्य, व्यवस्था, नैतिकता से संबंधित।
- अधिकारियों से लोगों के प्रति स्नेह और अच्छे व्यवहार दिखाने को कहा गय।
जीवन, कला और संस्कृति, वास्तुकला
→ कला और संस्कृति
- मिट्टी की मूर्तियाँ जैसे सप्तमातृकाओं, यक्षी आदि।
- सारनाथ का स्तंभ जिसमें चार प्रतीक और धर्म चक्र है।
- मौर्य साम्राज्य को उनकी कलात्मक योगदान के लिए जाना जाता है।
- मूर्तियाँ दैनिक जीवन विश्वास अलंकृतता आदि को दर्शाती हैं।
→ स्थिरता के लिए चुनीतियाँ
- राज्य को माँगों से अधिक बोझ।
- कमजोर उत्तराधिकारी।
- प्राकृतिक आपदाएँ।
- सेना पर अत्यधिक निर्भरता।
→ जीवन
- योजनावद्ध नगर, अग्नि से सुरक्षा।
- कारीगर जैसे लोहार, बर्तन बनाने वाले, बढ़ई आदि नगर में रहते थे।
- लकड़ी के घर डाक सेवा कपास के वस्त्र चमड़े के जूते।
→ वास्तुकला
- साँची स्तूप- ईंटों और पत्थरों से बना।
- अशोक ने स्तूप, चैत्य और विहार बनवाए।
- चट्टान की मूर्तियाँ-धौली पर हाथी, बुद्ध की शांति और बुद्धिमत।
- शिलालेख-अशोक के संदेश फैलाने के लिए।
- सारनाथ राजधानी-भारत का राष्ट्रीय प्रतोक।
- धर्मचक्र-बुद्ध की शिक्षाएँ।
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→ समय-रेख
6वीं-1वीं शताब्दी सा.सं.पू.
1. महाजनपदों का उदय उत्तर और मध्य भारत में सोलह बड़े राज्य स्थापित हुए. जिन्होंने शासन के लिए सभा प्रणालियों की स्थापना की।
5वीं शताब्दी सा.सं.पू.
- मगध का प्रभुत्व : मगध, अजातशत्रु जैसे शक्तिशाली राजाओं के अधीन, छोटे राज्यों को एकीकृत करने में सफल हुआ।
- महापद्म नंद का उदय : महापद्म नंद ने मगध में नंद वंश की स्थापना की. छोटे राज्यों को एकजुट किया।
- आर्थिक विकास : खाद्य उत्पादन में वृद्धि के कारण व्यापार में वृद्धि हुई और सिक्कों का प्रचलन शुरू हुआ, जिससे आर्थिक शक्ति में वृद्धि हुई।
- सांस्कृतिक समृद्धि : इस अवधि में कला और शिल्प में प्रगति हुई. जो एक समृद्ध अर्थव्यवस्था द्वारा समर्थित थी।
327 – 325 सा.सं.पू. :
एलेक्जेंडर का भारत में अभियान : एलेक्जेंडर द ग्रेट ने पंजाब में राजा पोरस को हराया। यह अवधि क्षेत्र में ग्रीक प्रभाव की शुरुआत कां चिह्नित करती है।
324 सा.सं.पू. :
एलेक्जेंडर की वापसी : अपने अभियानों के बाद एलेक्जेंडर नं फारस की ओर लौटते समय कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
323 सा.सं.पू. :
एलेक्जेंडर की मृत्यु : एलेक्जेंडर की 32 वर्ष की आयु में बेबीलोन में मृत्यु हो गई।
322 – 297 मा.सं.पू. :
मार्च साम्राज्य की स्थापना : चंद्रगुप्त मौर्य ने उत्तरी भारत को संकेंद्रित किया।
321 सा.सं.पू. :
चंद्रगुप्त मौर्य साम्राज्य का पहला सम्राट बना।
268 – 232 सा.स.पू.
सम्राट अशोक का शासन : अशोक ने बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया और धम्म के सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने कलिंग बुद्ध लड़ा, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि हुई।
185 सा.सं.पू. :
मौर्य साम्राज्य का पतन : मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद क्षेत्रीय शक्तियों का उदय हुआ और भारत छोटे राज्यों में विभाजित हो गया।