By going through these Sanskrit Class 6 Notes and NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 8 Hindi Translation Summary Explanation Notes बुद्धिः सर्वार्थसाधिका students can clarify the meanings of complex texts.
Class 6 Sanskrit Chapter 8 Summary Notes बुद्धिः सर्वार्थसाधिका
बुद्धिः सर्वार्थसाधिका Class 6 Summary
एक वन में एक बड़ा सरोवर (तालाब) था, जिसके किनारे बहुत सारे खरगोश अपने बिल बनाकर रहते थे। एक बार प्यासे हाथियों का समूह वहाँ आ गया। वे सभी उस तालाब से पानी पीकर और स्नान करके सूर्यास्त के समय चले जाते हैं। हाथियों के घूमने से बिलों में रहने वाले कुछ खरगोश घायल हो जाते हैं और उनमें से कुछ मर भी जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सभी खरगोश बहुत भयभीत हो जाते हैं और अपने जीवन को लेकर बहुत चितिंत भी हो जाते हैं। एक दिन सायंकाल में खरगोशों की सभा हुई, परंतु कुछ भी समाधान नहीं मिला। अंत में खरगोशों का राजा हाथियों के राजा के पास गया और बोला सरोवर में चंद्र ( चन्द्रमा) का वास है और हम सभी खरगोश उसकी प्रजा हैं। इसीलिए वह ‘शशांक’ इस नाम से प्रसिद्ध है। जब खरगोश जीवित रहेंगे, तभी चंद्रदेव प्रसन्न होंगे। हाथियों के राजा को विश्वास दिलाने के लिए खरगोशों का राजा गजराज को रात्रि के समय उस तालाब के पास ले जाकर पानी में चंद्रमा के प्रतिबिंब को दिखाता है, जिसे गजराज ने वास्तविक चंद्रमा समझा और वह चंद्रमा को प्रणाम करके वहाँ से अपने झुंड के साथ चला गया तथा पुन: वहाँ कभी लौटकर नहीं आया।
इस पाठ में बुद्धि का महत्व बताया गया है। संसार में श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए बुद्धिपूर्वक व्यवहार आवश्यक होता है। बुद्धिपूर्वक व्यवहार से कठिन काम भी सरल हो जाता है। जब दो या दो से अधिक पक्षों के बीच मुकाबला हो और पहले पक्ष से दूसरा पक्ष बहुत मज़बूत हो तब भी बुद्धि के बल पर पहला पक्ष विजयी हो सकता है। शरीर के बल से अधिक महत्व बुद्धि के बल का ही है। आइए, पाठ पढ़कर जानिए कि किस प्रकार खरगोश हाथियों को तालाब के किनारे से भगाने में समर्थ हो जाता है।
बुद्धिः सर्वार्थसाधिका Class 6 Notes
पाठ – शब्दार्थ एवं सरलार्थ

(1)
एकस्मिन् वने एकः नित्यजलपूर्णः महान् सरोवरः अस्ति । कदाचिद् एकं पिपासाकुलं गजयूथं वनान्तरात् तत्र आगच्छति । तस्मिन् सरोवरे ते गजाः स्वेच्छया जलं पीत्वा, स्नात्वा, क्रीडित्वा च सूर्यास्तसमये निर्गच्छन्ति । तस्य च सरोवरस्य तीरे समन्तात् सुकोमलभूमौ बहूनि शशक-बिलानि सन्ति, येषु बहवः शशकाः निवसन्ति । गजानां परिभ्रमणेन तेषु बिलेषु निवसन्तः बहवः शशका: क्षतविक्षताः भवन्ति केचन पुनः मृताः अपि भवन्ति । अतः शशकाः भीताः चिन्तामग्नाः च भवन्ति । ते दुःखम् अनुभवन्ति । स्वरक्षार्थं च ते उपाय चिन्तयन्ति ।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
नित्यजलपूर्ण: – जिसमें हमेशा पानी भरा होता है, (Which is always full of water),
सरोवर: – (Lake/Pond),
गजयूथं – हाथियों का झुण्ड (Group of elephants),
स्वेच्छया – अपनी इच्छा से (With his own will),
पीत्वा – पीकर (Having drunk),
स्नात्वा – नहाकर (Having taken bath),
क्रीडित्वा – खेलकर (Having played),
समन्तात् – चारों तरफ़ (All around),
भूमौ – पृथ्वी पर (On the earth),
बहूनि – बहुत सारे (Many),
क्षतविक्षता: – चोट लगने से घायल (Wounded),
मृता: – मर गए (Dead),
भीता: – डरे हुए (Scared),
स्वरक्षार्थं – अपनी रक्षा के लिए (For his own safety)।
सरलार्थ-
एक जंगल में पानी से भरा हुआ एक बड़ा सरोवर है। कभी प्यास से व्याकुल हाथियों का एक समूह वहाँ आ जाता है। उस तालाब में वे सब हाथी इच्छानुसार पानी पीकर, नहाकर और खेलकर सूर्यास्त के समय निकल जाते हैं। उस तालाब के किनारे चारों ओर कोमल भूमि पर बहुत से खरगोश के बिल हैं, जिनमें बहुत से खरगोश रहते हैं। हाथियों के घूमने से बहुत से खरगोश घायल हो जाते हैं जबकि कुछ मारे जाते हैं। इसलिए खरगोश भयभीत हो चिन्ता में डूब जाते हैं। वे दुख का अनुभव करते हैं। अपनी रक्षा के लिए वे उपाय सोचते हैं।
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(2)
एकस्मिन् दिने सायङ्काले तेषां शशकानां सभा भवति । सर्वे शशकाः स्वमतं प्रकाशयन्ति । परं ते समाधानं न प्राप्नुवन्ति । अन्ते शशकराजः वदति – ” अहमेव उपायं चिन्तयामि । अधुना वयं सर्वे स्वगृहं गच्छामः । ”
शब्दार्था: (Word Meanings) :
सायङ्काले – शाम के समय (In the evening),
सर्वे – सभी (All),
स्वमतं – अपना विचार (His own thought),
प्रकाशयन्ति – प्रकट करते हैं। (Puts forth),
परं – परन्तु (But),
समाधानं – समस्या का हल (Solution);
अधुना -अभी (Now),
स्वगृहं – अपने घर को (Their own home),
गच्छामः – जाते हैं ( हम सब) (Go)।
सरलार्थ-
एक दिन शाम के समय खरगोशों की सभा होती है। सभी खरगोश अपने-अपने विचार प्रकट करते हैं। परन्तु वे समस्या का हल प्राप्त नहीं कर पाते हैं। अन्त में खरगोशों का राजा बोलता है – ” मैं ही उपाय सोचता हूँ। अभी हम सब अपने घर जाते हैं । ”
(3)
अन्यस्मिन् दिवसे रात्रौ सः शशकराजः यूथाधिपस्य गजराजस्य समीपं गच्छति । सः गजराजं कथयति – ” हे गजराज ! एषः सरोवर: चन्द्रस्य वासस्थानम् अस्ति । वयं शशकाः तस्य प्रजाः स्मः, अत एव सः शशाङ्कः इति नाम्ना प्रसिद्धः । यदा शशका: जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति । ”
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
रात्रौ – रात में (In the night),
यूथाधिपस्य – झुण्ड के स्वामी (The king of the group),
कथयति – कहता है (Says),
वासस्थानम् – रहने का स्थान (Residence),
प्रजा: – सन्तान (Citizen),
शशाङ्कः – चन्द्रमा (Moon),
नाम्ना – नाम से (By the name),
प्रसन्न: – खुश (Happy) ।
सरलार्थ-
दूसरे दिन रात में वह खरगोशों का राजा हाथी के पास जाता है। वह हाथी से कहता है – हे गजराज ! यह सरोवर चन्द्रमा के रहने का स्थान है। हम सब खरगोश उसकी प्रजा हैं। इसलिए वह ‘शशांक’ नाम से प्रसिद्ध है। जब खरगोश जिन्दा रहते हैं, तभी चन्द्रमा खुश होता है।

(4)
गजराजः पृच्छति– “कथम् अहं विश्वासं करोमि? किं सत्यमेव चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति?” यदि सरोवर: चन्द्रदेवस्य वासस्थानं तर्हि तत् प्रदर्शयतु। शशकः कथयति – ” आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः।”
शब्दार्था: (Word Meanings) :
पृच्छति – पूछता है (Asks),
कथम् – कैसे (How),
किं- क्या (What),
तिष्ठति – रहता है (Stays),
चन्द्रदेवस्य – चन्द्रमा देवता का (Of moon),
प्रदर्शयतु – दिखाओ (Show),
आम् – हाँ (Yes),
दर्शनाय – देखने के लिए (To see),
आवाम् – हम दोनों (We both) ।
सरलार्थ-
गजराज पूछता है – ” मैं कैसे विश्वास करूँ? क्या सच में ही चन्द्रमा तालाब में रहता है?” यदि तालाब चन्द्रमा देवता के रहने का स्थान है तो दिखाओ । खरगोश कहता है- “हाँ, चन्द्रमा के दर्शन के लिए हम दोनों अभी सरोवर की तरफ़ चलते हैं। ”
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(5)
गजराजः शशकराजेन सह सरोवरस्य समीपं गच्छति। सः जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बं पश्यति, चकित: च भवति । सः भयेन चन्द्रं नमति । ततः सः गजयूथेन सह अन्यत्र गच्छति । सः गजयूथः पुनः कदापि तस्य सरोवरस्य समीपं न आगच्छति । शशकाः तत्र सुखेन तिष्ठन्ति । सत्यम् एव उक्तम्- ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’।
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
सह – साथ (Together),
समीपं – पास (Near),
प्रतिबिम्बं – परछाईं (Shadow),
चकित: – हैरान (Bewildered),
भयेन – डर से (By fear),
नमति – नमस्कार करता है (Bows down),
अन्यत्र – दूसरी जगह (At other place),
पुन: – फिर से (Again),
आगच्छति – आता है (Comes),
उक्तम् – कहा गया है (Said),
सर्वार्थसाधिका – सारे कामों को सफल बनाने वाली (A mind can accomplish everything)|
सरलार्थ-
गजराज खरगोशों के राजा के साथ तालाब के पास जाता है। वह पानी में चन्द्रमा की परछाईं को देखता है और हैरान रह जाता है। वह डर से चन्द्रमा को नमस्कार करता है। इसके बाद वह हाथियों के समूह के साथ दूसरी जगह चला जाता है। हाथियों का वह झुण्ड फिर कभी भी उस तालाब के पास नहीं आता है। सारे खरगोश भी वहाँ सुख से रहते हैं। सच ही कहा गया है- “बुद्धि ही सारे कामों को सफल बनाने वाली होती है। ”
वयं शब्दार्थान् जानीम:
