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Factors of Production Class 8 Notes in Hindi
उत्पादन के कारक Class 8 Notes
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 7 नोट्स उत्पादन के कारक
→ उत्पादन प्रक्रिया – नए सामान और सेवाएँ बनाने के लिए उठाए गए कदम।
→ संसाधन – एक उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल।
→ अंतिम उत्पाद – वह अंतिम वस्तु जो बिक्री के लिए तैयार हो।
→ उपकरण – एक उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक औजार या मशीनरी।
→ सामग्री – वे वस्तुएँ जिनकी हमें कुछ नया बनाने के लिए आवश्यकता होती है।
→ व्यवसाय – वे कंपनियाँ जो पैसे कमाने के लिए सामान बनाती या बेचती हैं या सेवाएँ प्रदान करती हैं।
→ इनपुट्स (आगत) – कच्चा माल।
→ अवसर – ऐसे मौके जो लोगों को कुछ हासिल करने या बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
→ आर्थिक गतिविधियाँ – वे गतिविधियाँ जो पैसे कमाने के लिए की जाती हैं, जैसे – कृषि करना या उत्पाद बनाना।
→ भूमि – भौगोलिक क्षेत्र या प्राकृतिक संसाधन जैसे मिट्टी, जंगल, पानी, हवा, खनिज तेल आदि की भूमि कहा जाता है।
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→ श्रम – काम करने के लिए आवश्यक मानव श्रमिकों (कर्मचारियों) के द्वारा किया गया कार्य ‘श्रम’ की श्रेणी में आता है।
→ पूँजी – अर्थशास्त्र में भौतिक या वित्तीय सम्पत्ति जिसका उपयोग वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन करने के लिए प्रयुक्त होता है, पूँजी कहलाता है।
→ उद्यमिता – अपना स्वयं का व्यवसाय आरंभ करना।
→ सुविधा प्रदानकर्ता – एक व्यक्ति जो आसानी से सेवा प्रदान करता है या प्रक्रिया का आयोजन करता है।
→ आर्थिक दायरे – नौकरी, पैसा, व्यवसाय और अवसरों से संबंधित सम्पूर्ण परिस्थितियाँ।
→ निर्णय निर्धारण – विभिन्न विकल्पों में से किसी एक विकल्प का चुनाव करना।
→ मानव पूँजी – कुछ नया बनाने या उत्पादित करने के लिए आवश्यक मानव श्रम।
→ विशेषज्ञ – किसी निर्धारित कार्य या क्षेत्र में दक्षता।
→ कौशल – कुछ असाधारण करने की क्षमता या हुनर।
→ बुनियादी साक्षरता – पढ़ने और लिखने की क्षमता।
→ विशेषज्ञता – कुछ बनाने या परिष्कृत करने के लिए आवश्यक कौशल या ज्ञान।
→ बुनियादी ढाँचा – किसी कंपनी या समाज के कामकाज के लिए आवश्यक संबंधित सुविधाएँ या मूल संरचना।
→ टिकाऊ – कुछ ऐसा जो लंबे समय तक चले।
→ लागत-कुशल – उचित मूल्य पर सेवाएँ प्रदान करना।
→ प्रशिक्षण – किसी निश्चित क्षेत्र निश्चित कार्य का व्यावहारिक अनुभव सीखने की प्रक्रिया।
→ संज्ञानात्मक विकास – व्यक्ति की सोचने की प्रक्रिया में उचित बदलाव लाना।
→ रचनात्मक – कोई ऐसा व्यक्ति जो नए और उपयोगी विचारों के बारे में सोचने में सक्षम हो।
→ प्रयास करना – कुछ करने के लिए कड़ी मेहनत करना / परिश्रम करना।
→ विनिर्माण – इनपुट को आउटपुट (उत्पाद) में बदलने की प्रक्रिया।
→ उत्पादकता – उत्पादित उत्पाद की मात्रा, जिसे संख्याओं या प्रतिशत द्वारा व्यक्त किया जाता है।
→ वयस्क साक्षरता दर – उन वयस्कों का प्रतिशत, जिनके पास बुनियादी साक्षरता है, वे साधारण वाक्य पढ़ और लिख सकते हैं।
→ उत्पादक – किसी वस्तु या सेवा को उत्पन्न करने वाला।
→ जनसांख्यिकीय लाभांश – एक ऐसी स्थिति जहाँ कार्यशील (कामकाजी) उम्र की आबादी (15 – 65 वर्ष) आश्रित आबादी से बड़ी होती है।
→ क्षमता – व्यक्ति या वस्तु में विद्यमान गुण या क्षमताएँ जो अभी तक पूर्णतया विकसित नहीं हुई है।
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→ योगदान – किसी कार्य को बढ़ने या विकसित करने में सहायता करना।
→ कारीगरी – कार्य-कौशल शिल्प, कुछ नया करने के लिए किया गया कार्य क्षेत्र विशेष संबंधी कार्य।
→ संचालन – एक उद्यम या व्यवसाय में उत्पाद बनाने की प्रक्रिया।
→ उद्यम – वे बड़ी इकाई या संगठन जो कुछ नया करते हैं।
→ उत्पादन में कमी – वस्तु या सेवा का पर्याप्त मात्रा में न मिल पाना।
→ ब्याज – उधारकर्ता द्वारा ऋणदाता को ऋण के सापेक्ष की गई भुगतान राशि।
→ शेयर बाजार – एक विशेष बाजार जहाँ बड़ी कंपनियाँ – लोगों को अपने शेयर बेचकर धन जुटाती हैं।
→ लाभांश – कंपनी के मुनाफे में से शेयरधारकों को भुगतान की गई राशि।
→ वित्तीय पूँजी – व्यवसाय शुरू करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला धन, जो उधार या ऋण के रूप में हो सकता है।
→ तंत्र – कोई वस्तु उत्पादित करने के लिए प्रयोग में आने वाले मशीन और प्रबंधन की प्रणाली।
→ उद्यमी – एक व्यक्ति जो व्यवसाय या उद्यम स्थापित करने के लिए जोखिम उठाता है।
→ स्टार्टअप – कोई नया व्यवसाय शुरू करना, जिसकी भविष्य में वृद्धि की प्रबल संभावना हो।
→ अभिनव – कुछ नया और दिलचस्प समस्या का समाधान करने वाला।
→ अनुप्रयोग – किसी चीज़ को जोड़ना या लागू करने का प्रयोग करना।
→ जलीय कृषि – जलीय जीवों और पौधों को पोषित करने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया।
→ अर्धचालक – एक विद्युत चालक जो एक कंडक्टर और एक इन्सुलेटर के बीच मध्यवर्ती होता है।
→ पूँजी प्रधान – एक उत्पाद या सेवा जिसे बनाने के लिए बहुत सारे धन और मशीनरी की आवश्यकता होती है।
→ परस्पर संबंधित – कुछ विशेष हिस्सों का एक-दूसरे से जुड़ा होना।
→ आपूर्ति श्रृंखला – एक उत्पाद बनाने में शामिल व्यक्ति, संगठन, संसाधन और प्रौद्योगिकी।
→ व्यवधान – उत्पादन प्रक्रिया में ब्रेक डाउन या ठहराव।
→ स्थिरता (टिकाऊ) – पर्यावरण को हानि पहुँचाए बिना प्राकृतिक पदार्थों और ऊर्जा का उपयोग करते हुए।
→ भेदभाव – किसी के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करना, जिसमें किसी के साथ उसकी नस्ल, जाति या धर्म के आधार पर अलग व्यवहार किया जाता है।
→ परिचय
- हमारे आस-पास की हर चीज हमारे कपड़े, फर्नीचर, बटुआ, उपकरण, स्कूल बैग आदि एक उत्पादन प्रक्रिया से गुजरकर बनती है और विशिष्ट संसाधनों या कच्चे माल का उपयोग करके बनाए जाते हैं। जिन्हें ‘इनपुट’ कहा जाता है।
- माल और सेवाओं के उत्पादन की प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले संसाधनों को ‘उत्पादन के कारक’ कहा जाता है।
- विभिन्न व्यवसाय और संगठन उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं का निर्माण करने, नौकरी के अवसर पैदा करने और कई आर्थिक गतिविधियों को चलाने के लिए इन इनपुटों को जोड़ते हैं।

- उत्पादन के कारकों को चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता।
- प्रौद्योगिकी को भी एक महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है, क्योंकि यह व्यवसायों और उद्यमों को कम कच्चे माल का उपयोग करके अधिक माल का उत्पादन करने में सक्षम बनाती है, जिससे दक्षता में सुधार होता है।
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→ उत्पादन के कारक
(i) भूमि (प्राकृतिक संसाधन)
- अर्थशास्त्र में ‘भूमि’ शब्द न केवल भौगोलिक भूमि को संदर्भित करता है, बल्कि पानी मिट्टी, खनिज तेल, जंगल और प्राकृतिक गैसों जैसे प्राकृतिक संसाधन भी हैं।
- प्रकृति हमें कई संसाधन प्रदान करती है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनका स्थायी रूप से उपयोग कैसे करें?
- व्यवसायों और उद्यमों को विनिर्माण संयंत्र, कार्यालय भवन, गोदाम बनाने या अपने उत्पादों के लिए आवश्यक कृषि उपज उगाने के लिए भूमि की आवश्यकता होती है, जिसे वे या तो खरीदते हैं या किराए पर लेते हैं।
(ii) श्रम (मानव संसाधन)
- श्रम उत्पादन की आत्मा है। यह उत्पादन में प्रयुक्त मानवीय प्रयास को संदर्भित करता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक प्रयास दोनों शामिल हैं।
- शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, किसान, बढ़ई, निर्माण श्रमिक जैसे कई पेशेवर समाज की बुनियादी और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए अपने ज्ञान, कौशल और शारीरिक शक्ति का उपयोग करते हैं।

→ एक संसाधन के रूप में मानव पूँजी-
- मानव जीवन आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक है, क्योंकि वे काम में मूल्य और गुणवत्ता जोड़ने के लिए अपने ज्ञान और कौशल को लागू करते हैं।
- उदाहरण के लिए, किसान अपने कौशल और अनुभव का उपयोग करके फसल उगाते हैं और वैज्ञानिक नई तकनीकी का आविष्कार करते हैं।
- मानव पूँजी उन कौशलों, ज्ञान, क्षमताओं और विशेषज्ञता को संदर्भित करती हैं जिनका उपयोग व्यक्ति उत्पादन प्रक्रिया में श्रम करने के लिए करते हैं।
- इसलिए मानव पूँजी न केवल बुनियादी श्रम के बारे में है, बल्कि इसमें उस श्रम की गुणवत्ता और दक्षता भी शामिल है।
→ मानव पूँजी के सहयोगी कारक
- शिक्षा और प्रशिक्षण – शिक्षा व्यक्तियों को उनकी रुचि के विशिष्ट क्षेत्रों में ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है।
- बुनियादी साक्षरता भी समझ को बढ़ाती है और लोगों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है।
- उदाहरण के लिए, एक मेडिकल छात्र ज्ञान प्राप्त करता है। और मरीजों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करता है।
- एक टिकाऊ और लागत प्रभावी बुनियादी ढाँचा बनाने के लिए एक विशेष क्षेत्र में प्रशिक्षण कौशल और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
- किसी भी प्रकार के काम में सुधार प्रशिक्षण अवलोकन और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से आता है।
- सही शिक्षा और उचित प्रशिक्षण के साथ व्यक्ति अपने कैरियर में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अच्छी तरह से तैयार हो सकते हैं।
- स्वास्थ्य सेवा – स्वास्थ्य सेवा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बच्चों के मस्तिष्क के विकास में सहायता करती है, उन्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है और कक्षा में अनुपस्थिति को कम करती है।
- इसी तरह श्रमिकों को भी कुशल होने और शारीरिक और मानसिक रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिए अच्छे स्वास्थ्य और एक स्वस्थ शरीर की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण के लिए, एक स्वस्थ कर्मचारी कार्यस्थल पर कम कार्यदिवसों पर अनुपस्थित रहता है और अधिक रचनात्मक और उत्पादक होने की संभावना रहती है।
→ सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
- जो समाज कड़ी मेहनत और अनुशासन को प्रोत्साहित करते हैं, वे मानव पूँजी को मजबूत करने और व्यक्तिगत प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करते हैं।
- व्यक्ति लगातार अपने काम या क्षेत्र में सुधार करने की कोशिश करते हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान बढ़ाते हैं।
- ‘काइजेन’ नामक एक प्रसिद्ध जापानी अवधारणा का प्रयोग ‘निरंतर सुधार’ के परिप्रेक्ष्य में किया जाता है, जिसने जापान में 1940 के दशक के मध्य लोगों के लिए उच्च स्तरीय जीवन स्तर प्राप्त करने में मदद की है।
- जर्मनी में एक मज़बूत कार्य नीति है जो समय की पाबंदी, विस्तार पर ध्यान और गुणवत्ता को महत्व देती है, जिससे उच्च-गुणवत्ता वाला औद्योगिक उत्पादन होता है।
- ये गुण- मज़बूत मानव पूँजी और कार्य नैतिकता के साथ-साथ जापान और जर्मनी दोनों को प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में वैश्विक नेता बनने में मदद मिली है।
→ मानव पूँजी की चुनौतियाँ
- साक्षरता मानव पूँजी के ज्ञान, कौशल, विशेषज्ञता और उत्पादकता को बढ़ाती है।
- विश्व बैंक द्वारा 2023 में लगाए गए अनुमान के अनुसार भारत में वयस्क साक्षरता दर पुरुषों में 85 प्रतिशत और महिलाओं में 70% थी।
- भारत अभी भी अपनी मानव पूँजी में सुधार और उसे आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना कर रहा है।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार, भारत की लगभग 60% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश-बड़ी संख्या में युवा काम करने वाले और कमाई करने वाली आबादी से लाभ उठाने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।
- इस क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित स्वास्थ्य सेवा और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना महत्वपूर्ण है ताकि युवा राष्ट्र के विकास में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें।
→ प्राचीन भारत की कौशल परंपरा
- भारतीयों के लिए काम अभिव्यक्ति का एक रूप था। अपने स्वभाव को व्यक्त करना, दोषरहित परिणाम प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना।
- भारतीय अपने काम के प्रति सच्चे रूप से समर्पित थे, जैसा कि विश्वकर्मा पूजा या आयुद्ध पूजा के दौरान औजारों की पूजा करने के साक्ष्य मिलते हैं।
- उत्पाद कला और विद्या (ज्ञान) के साथ बनाए जाते थे। शिल्प शास्त्र प्राचीन ग्रंथ है, जिनमें सफल और सुंदर उत्पाद बनाने के लिए डिजाइन और दिशा निर्देश शामिल हैं।

→ सिले हुए जहाज का निर्माण
- 2000 साल पहले भारतीय जहाजों को कीलों का उपयोग करने के बजाय डोरियों से लकड़ी के तख्तों को एक साथ सिलकर बनाते थे, जिससे जहाज अधिक लचीले हो जाते थे।
- इन जहाजों ने भारत को समुद्री व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने में सक्षम बनाया, जिससे हिंद महासागर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ।
- पूँजी – पूँजी (मशीनरी औजार, पैसा और कच्चा माल) को किसी भी व्यवसाय या स्टार्टअप के लिए प्राणवायु माना जाता है।
- व्यक्तिगत बचत, परिवार या मित्रों का धन या बैंक ऋण धन के प्रथम स्रोत हैं जो व्यक्तियों को व्यवसाय शुरू करने में सहायता करते हैं।
- व्यक्तिगत बचत, परिवार या मित्रों का ऋण लेकर जब कोई व्यवसाय शुरू हो जाता है, फिर वह धीरे-धीरे विस्तारित हो जाता है, तो वे उन निवेशकों की तलाश करते हैं, जो साझेदारी या लाभ में हिस्सेदारी के बदले में उनके व्यावसायिक विचार से पूँजी लगाएँ।
- शेयर बाज़ार एक विशेष प्रकार का बाज़ार है जहाँ बड़ी कंपनियाँ जनता को शेयर बेचकर धन जुटाती हैं। जो लोग ये शेयर खरीदते हैं वे कंपनी के शेयरधारक बन जाते हैं।
- शेयरधारकों को लाभांश के माध्यम से लाभ का एक निश्चित प्रतिशत मिल सकता है।
- कंपनियाँ उत्पादन प्रक्रिया को तेज करने और नए सामान और नए सेवाएँ बनाने के लिए उन्नत उपकरणों और मशीनरी में धन का निवेश करती है।
→ उद्यमिता
- उद्यमिता का अर्थ है अपना खुद का व्यवसाय बनाना या किसी विचार या सोच को उपयोगी चीज में बदलकर अभिनव सेवाएँ बनाना।

- उदाहरण के लिए, पेटीएम एक उद्यमी द्वारा कुछ साल पहले शुरू किया गया था, जिसके माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कुशलतापूर्वक किया जा सकता है।
- वह व्यक्ति जो जोखिमों और अनिश्चितताओं से भरा एक विचार लेकर आता है, फिर भी बाधाओं का सामना करने और अपने दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, उसे उद्यमी के रूप में जाना जाता है।
- एक उद्यमी द्वारा शुरू किया गया नया व्यवसाय उसका ‘स्टार्टअप’ कहा जाता है।
- उद्यमिता नई सेवाओं, कई नौकरी के अवसरों और नए नवाचारों को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देती है।
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→ प्रौद्योगिकी – उत्पादन में सहायक


- प्रौद्योगिकी का अर्थ है समस्याओं को हल करने या कुछ नया बनाने, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए वास्तविक दुनिया में विज्ञान का उपयोग करना।
- उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक वाहन ईंधन के बजाय बिजली का उपयोग करते हैं और प्रदूषण कम करने में मदद करते हैं।
- उत्पादन गतिविधियों को नई सेवाओं का अविष्कार करने और कार्य प्रणाली को कुशलतापूर्वक विस्तारित करने के लिए किसी-न-किसी प्रकार की तकनीक की आवश्यकता होती है।
- आज कई क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी में महान प्रगति देखी गई है। उदाहरण के लिए, यूपीआई ने नियमित नकद लेन-देन की जगह ले ली है। किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान मिल सकता है और जीपीएस हमें व्यापार और यात्रा के लिए सबसे सुविधाजनक मार्ग खोजने में मदद करता है।
- नई तकनीक व्यवसायों को बेहतर काम करने और समय बचाने में मदद करती है। उदाहरण के लिए डाक सेवाओं के बजाय ई-मेल प्रणाली का उपयोग करने से कम प्रयास में और कम लागत पर त्वरित संचार संभव होता है।


- कुछ पुराने उपकरण जैसे घिरनी और ठेला आज भी बहुत उपयोगी हैं और अभी तक प्रतिस्थापित नहीं हुए हैं।
→ ज्ञान, कौशल और रोजगार के अवसरों तक पहुँच का मार्ग प्रशस्त करती प्रौद्योगिकी

- सरकार ने विभिन्न ऑनलाइन शिक्षण मंचों जैसे स्वयं (SWAYAM) की शुरुआत की है जो स्कूल स्तर से शुरू होने वाले कई पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, जिनमें रोबोटिक्स (रोबोट संबंधी), जल-कृषि (एक्वाकल्चर) वस्त्र-मुद्रण (टेक्सटाइल प्रिंटिंग) जैसे विषय शामिल हैं।
- ‘नेशनल कैरियर सर्विस’ जैसे अन्य मंच व्यक्तियों को उद्योगों की एक विस्तृत श्रृंखला में नौकरियों से जुड़ने में मदद करते हैं।
- ये पोर्टल भौतिक सीमाओं को खत्म करते हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अवसरों तक पहुँच की अनुमति देते हैं।
→ कारक आपस में कैसे संबंधित हैं?
- उत्पादन पाँच प्रमुख कारकों भूमि, श्रम, पूँजी, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता पर निर्भर करता है।
- इन कारकों की मात्रा या गुणवत्ता उत्पाद की आवश्यकता पर निर्भर करती है।
- उदाहरण के लिए, कृषि श्रम प्रधान है क्योंकि इसमें अधिक खेत मजदूरों की आवश्यकता होती है, दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र पूँजी प्रधान है क्योंकि इसमें कई मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होती है। ये कारक आपस में जुड़े हुए हैं और इनका दुरुपयोग उत्पादन में बाधा डाल सकता है।
- उन्नत प्रौद्योगिकियाँ उत्पादन के अनुपात और श्रम आवश्यकताओं में बदलाव का कारण बन सकती हैं। उदाहरण के लिए एक 3 डी प्रिंटर बड़े पैमाने पर हथकरघा जैसे उत्पाद बनाने में प्रयोग किया जा सकता है, जिससे मानव श्रम की आवश्यकता कम हो जाती है।
- संसाधनों या कच्चे माल की उपलब्धता जगह-जगह अलग-अलग होती है और उत्पादन में शामिल कंपनियों द्वारा व्यवस्थित की जाती है।
- व्यवसाय इन संसाधनों को विभिन्न स्थानों से इकट्ठा करते हैं और सामान और सेवाएँ बनाने के लिए उनका एक साथ उपयोग करते हैं।
- आपूर्ति श्रृंखला लोगों, संगठनों, संसाधनों और प्रौद्योगिकी का एक नेटवर्क है जो वस्तुओं का उत्पादन और बिक्री करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
- स्थानीय कच्चे माल को कम प्राथमिकता देने और दूरस्थ संसाधनों पर निर्भरता के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान होता है, जैसा कि कोविड- 19 महामारी के दौरान व्यापक रूप से देखा गया था।
- मानव प्रयास उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विभिन्न विशेषज्ञता वाले कई लोगों की एक टीम एक उत्पाद विकसित करती है और उसके विपणन का प्रबंध करती है। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिकल इंजीनियर (विद्युत और यांत्रिक अभियंता) और परियोजना प्रबंधक एक सेवा प्रदान करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
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→ उत्पादन के कारकों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व
- उत्पादन प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों जैसे- भूमि, जल और खनिजों पर निर्भर करती है। ये संसाधन सीमित हैं और यदि जिम्मेदारी से प्रबंधित नहीं किए गए तो उन्हें नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में चमड़े के ह (स्थानीय बाज़ार) अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं, लेकिन जल स्रोतों और मिट्टी की गुणवत्ता को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसी तरह, जब पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे को ठीक से पुनर्चक्रण (रिसाइकल) नहीं किया जाए, तो उनमें उपस्थित हानिकारक तत्व जैसे सीसा, पारा आदि भूमि और जल में मिलकर इन स्रोतों को दूषित कर सकते हैं।
- संसाधनों का स्थायी उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि अगली पीढ़ियाँ अपनी जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा कर सकें और एक सुरक्षित वातावरण में रह सकें।
- निर्माताओं को संसाधनों के संरक्षण और पुनर्चक्रण के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके लागू करने चाहिए।
- उद्यम न केवल पर्यावरण के प्रति बल्कि अपने श्रमिकों के प्रति भी जिम्मेदार हैं, उन्हें अपने श्रमिकों को अनुभव प्रदान करना चाहिए।
- नियोक्ताओं को उचित वेतन सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करना चाहिए और एक अच्छा कार्यस्थल पर माहौल देना चहिए। कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से, व्यवसाय स्थानीय समुदायों, जैव-विविधता, कर्मचारियों और अपने ग्राहकों की देखभाल करके पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताओं को दूर करते हैं।