Reading Class 4 Hindi Notes Veena Chapter 2 बगीचे का घोंघा Bagiche Ka Ghogha Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Bagiche Ka Ghogha Class 4 Summary in Hindi
Bagiche Ka Ghogha Class 4 Hindi Summary
बगीचे का घोंघा का सारांश – Bagiche Ka Ghogha Summary in Hindi
यह कहानी एक घोंघे की है, जो किसी सुंदर और छोटे से बगीचे में रहा करता था और अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिता दिया। उसके मन में अक्सर ख़याल आता था कि बगीचे के बाहर की दुनिया कैसी होती है? किंतु उसकी माँ की कही हुई बातें बार- बार याद आती थी कि – ” बाहर की दुनिया में कभी मतं जाना, क्योंकि वह दुनिया हमारी दुनिया से बहुत अलग है।”
एक दिन उसने जिद्द किया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, मगर आज मैं जरूर बगीचे से बाहर जाकर देखूँगा । उसने सब सामान अपने शंख में बाँधा और सूरज निकलने से पहले बगीचा छोड़कर उस दीवार की छेद से बाहर निकल गया। उसने बाहर एक खेल का बहुत बड़ा-सा मैदान देखा।

उसने कभी सोचा नहीं था कि बाहर की दुनिया इतनी बड़ी होगी । फिर उसने पत्थर का एक बड़ा-सा टुकड़ा देखा, एक गिलहरी पेड़ पर फुदक-फुदककर चढ़ गई और एक लुढ़कती हुई गेंद के पीछे कुत्ते को भागता हुआ देखा। तभी अचानक खजूर का लंबा पेड़ और बड़ का पेड़ भी देखा। उसने इस अद्भुत दुनिया को देखकर सोचा, अब वह इसी दुनिया में ही रहेगा।
एक बगीचे में एक घोंघा रहता था। उसने अपना सारा जीवन इस बगीचे में बिताया था। उसे बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने में दो दिन लगते थे, इसी कारण वह बगीचे का कोना-कोना पहचान गया था। एक दिन उसे दीवार में छेद दिखाई दिया और उसे अपनी माँ की कही बात याद आई कि माँ ने छेद के उस पार जाने से मना किया था।
छेद को बहुत देर देखने के बाद उसने निश्चय किया कि वह छेद के उस पार वाली दुनिया देखेगा। उसने अपने शंख में सामान रखा और अगले दिन सूरज के निकलने से पहले छेद के दूसरी तरफ़ चला गया।

बाहर जाते ही उसने एक लंबा चौड़ा मैदान देखा, जो बच्चों के खेलने की जगह थी। घोंघा बहुत ही आश्चर्यचकित हो गया था, क्योंकि वह जगह बहुत बड़ी थी। तभी घोंघे के ऊपर एक सूखा पत्ता गिरा, जिससे वह डर गया, लेकिन अगले ही क्षण वह पत्ते से बाहर भी आ गया। घोंघे को यह जगह बहुत बड़ी और मज़ेदार लगी। वह वहाँ पर एक बड़े पत्थर पर चढ़ जाता है और पूरी जगह को आश्चर्य से देखता है।
उसने देखा कि वहाँ पर लाल रंग की चीटियाँ है, जो इधर-उधर आ-जा रही थीं। उसने गिलहरी को उछलते हुए, गेंद के पीछे कुत्ते को भागते हुए, बहुत बड़ा खजूर और बरगद का पेड़ देखा। यह सब देखकर उसने कहा कि “ये दुनिया कितनी तेज़ी से चलती है।” घोंघे ने फैसला कर लिया कि अब वह इसी बड़ी दुनिया में रहेगा ।
बगीचे का घोंघा शब्दार्थ
चकित – अचम्भा, आश्चर्य ।
वास्तव में – सचमुच में।
आकाश – आसमान।
मजेदार – खुशनुमा ।
सर चकराना – कुछ न समझ पाना ।

पाला पड़ना – सामना होना ।
अद्भुत – अनोखी ।
घोंघा – एक प्रकार का धीमी गति से चलने वाला जीव;
कोना-कोना – हर एक भाग;
छेद – सुराख या छोटा रास्ता;
चकित – हैरान,
चकित – हैरान, आश्चर्यचकित।