Reading Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 9 न्याय Nyay Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Nyay Class 5 Summary in Hindi
Nyay Class 5 Hindi Summary
न्याय का सारांश – Nyay Summary in Hindi
पहला दृश्य
सिद्धार्थ और उनका मित्र एक बगीचे में प्रकृति का आनंद ले रहे हैं। सिद्धार्थ सभी जीवित प्राणियों के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करते हैं। अचानक एक हंस तीर से घायल होकर नीचे गिरता है। सिद्धार्थ करुणा से भरकर घायल पक्षी को अपनी गोद में लेता है और उसके घावों का इलाज करता है।
तभी देवदत्त वहाँ आता है और हंस पर अपना दावा करता है, यह कहते हुए कि उसने उसे तीर मारा था। सिद्धार्थ उसे हंस देने से मना कर देता है, यह तर्क देते हुए कि जीवन बचाने वाले का अधिकार जीवन लेने वाले से बड़ा होता है। दोनों चचेरे भाइयों के बीच बहस हो जाती है, जिससे देवदत्त जोर देता है कि हंस उसका शिकार है।
अपने विवाद को हल करने में असमर्थ, वे निर्णय के लिए महाराज शुद्धोदन के पास जाने का फैसला करते हैं।

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दूसरा दृश्य
राजा के दरबार में, सिद्धार्थ और देवदत्त दोनों अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत करते हैं । देवदत्त तर्क देता है कि चूँकि उसने हंस को तीर मारा था, इसलिए वह उसका है। सिद्धार्थ का तर्क होता है कि वह सही मालिक है क्योंकि उसने हंस का जीवन बचाया है। वह यह भी बताता है कि हंस, जो अब उसकी बाँहों में ठीक और सुरक्षित है, उसे मारने की कोशिश करने वाले के साथ जाने के बजाय उसके साथ रहना पसंद करेगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, मंत्री राजा को सलाह देते हैं। मंत्री कहते हैं कि बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है। वह सुझाव देते हैं कि चूँकि हंस स्वयं भी उस व्यक्ति के साथ रहना चाहेगा जिसने उसे बचाया है, इसलिए हंस सिद्धार्थ का होना चाहिए। राजा सहमत होते हैं और सिद्धार्थ के पक्ष में फैसला सुनाते हैं।
यह कहानी दया, अहिंसा और जीवन बचाने के महत्त्व पर प्रकाश डालती है। कहानी का नैतिक संदेश यह हैं कि जीवन बचाने वाला एक सच्चा नायक होता है और उसका अधिकार उसे नष्ट करने वाले के दावे से बड़ा होता है।
न्याय पाठ से हमें यह नैतिक शिक्षा मिलती है कि हमें सभी प्राणियों के प्रति दया और करुणा रखनी चाहिए। सिद्धार्थ ने घायल हंस की रक्षा करके यह दिखाया कि सच्चा स्वामी वही होता है जो किसी की रक्षा करता है न कि जो उसे चोट पहुँचाता है। इस एकांकी से हमें सच्चे न्याय, करुणा और संवेदना का महत्त्व समझ में आता है।

न्याय शब्दार्थ
पृष्ठ 99
- पुष्प-फूल।
- नेपथ्य-रंग- मंच के पीछे का स्थान ।
- उद्यान – बाग-बगीचा ।
- सखा – मित्र ।
- वेदी – एक पवित्र मेज।
- उतावली-अधीर।
- रँभाना – गाय या बैल का आवाज करना ( इसे “मूँ-मूँ” करना भी कहते हैं ) ।
- स्नेह – प्यार ।
पृष्ठ 100
- वक्त-समय।
- अचरज – आश्चर्य ।
- रोज-प्रतिदिन ।
- नियत समय-निर्धारित समय ।
पृष्ठ 101
- योगी – योग साधना करने वाला व्यक्ति, आत्मज्ञानी ।
- पक्षी – चिड़िया ।
- प्राण – जान ।
- भूमि- धरती ।
- निर्दयी – कठोर |
पृष्ठ 102
- अनुराग – प्रेम |
- निर्दोष- बेगुनाह ।
- मरहम – घाव पर लगाया जाने वाला लेप ।
- प्रसन्न – खुश ।
- प्रमाण-सबूत ।
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पृष्ठ 103
- धौंस जमाना – किसी पर अपनी धाक जमाना ।
पृष्ठ 104
- विवश – लाचार | निर्णय- फैसला ।
पृष्ठ 105
- प्रतिहारी – द्वारपाल । आज्ञा-आदेश |
पृष्ठ 106
- क्रोध – गुस्सा । आखेट – शिकार करना ।
पृष्ठ 107
- बड़ा – महान ।
- हर्ष – प्रसन्न ।
- शरणागत- शरण में आए हुए ।
- स्नेहपूरित – स्नेह से परिपूर्ण।
- स्तंभित- स्तब्द ।
- नेकी और पूछ-पूछ- भलाई के काम करने में पूछने की क्या आवश्यकता है अर्थात् अच्छे काम करने के लिए अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पृष्ठ 108
- पुचकारना–प्यार जताना ।
- नेत्र सजल होना – आँखों में आँसू आना।
पृष्ठ 109
- हर्ष – प्रसन्न।
- उल्लास – उमंग, खुशी ।
- छाती – सीना ।