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Mera Bachpan Class 5 Question Answer
Class 5 Hindi Mera Bachpan Question Answer
कक्षा 5 हिंदी पाठ 7 प्रश्न उत्तर – Class 5 Hindi Chapter 7 Mera Bachpan Question Answer
बातचीत के लिए
प्रश्न 1.
लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे?
उत्तर :
लेखक को रामलीला की तैयारियों में कई काम उत्साहित करते होंगे, लेकिन कुछ ऐसे होंगे जो उन्हें विशेष आनंद और उत्साह देते होंगे। जैसे कि किरदारों का चुनाव और उनका अभ्यास, मंच सज्जा और वेशभूषा का निर्माण, संवादों और दृश्यों पर काम करना, संगीत और ध्वनि प्रभावों ‘का संयोजन, रामलीला का पूर्वाभ्यास और अंतिम रूप देना तथा अन्य छोटे-मोटे काम आदि ।
प्रश्न 2.
आपको लेखक के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?
उत्तर :
प्रेमचंद की कहानी “मेरा बचपन” में लेखक के बचपन की कई बातें हमें अच्छी लगीं, जैसे कि उनका पढ़ने का शौक, खेलकूद में रुचि और शरारतें। इन बातों ने उनके बचपन को जीवंत और यादगार बना दिया और यह भी दिखाया कि कैसे एक साधारण बच्चा भी असाधारण कहानियों का पात्र बन सकता है।
लेखक की ये बातें हमें बहुत अच्छी लगीं। क्योंकि ये उनके बचपन की यादों का एक सुंदर चित्रण है। कहानी में लेखक ने अपने बचपन की खुशियों, शरारतों और सीखने की इच्छा को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया है। यह कहानी हमें बचपन की मासूमियत और आनंद की याद दिलाती है और यह भी सिखाती है कि हमें अपने बचपन को संजोकर रखना चाहिए।
प्रश्न 3.
खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर :
खेलते समय चोट लगने से बचने के लिए, वार्म अप करना, उचित सुरक्षात्मक गियर पहनना, अपनी शारीरिक सीमाओं का जानना, नियमित व्यायाम करना और हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 4.
लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?
उत्तर :
लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे आमतौर पर अपने जीवन, काम और सामाजिक मुद्दों पर बातें करते होंगे। वे गरीबी, शिक्षा और बदलते समय के बारे में भी चर्चा करते होंगे। वे प्रेमचंद की शरारतों, उनकी पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य के बारे में तथा अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बारे में भी बातें करते होंगे।
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पाठ से
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
प्रश्न 1.
लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु कितनी थी ?
उत्तर :
लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु दस साल थी।
प्रश्न 2.
लेखक ने अपने घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है?
उत्तर :
लेखक का अकसर घर से गायब रहना, रामलीला में जाना, पेड़ पर चढ़कर टहनियाँ काटना और गुल्ली-डंडा खेलना, लड़ाई-झगड़े करना, न नहाने की सुध, न खाने की चिंता तथा अन्य छोटी-मोटी शरारतों को उन्होंने अपने घरवालों के क्रोध का कारण बताया है।
प्रश्न 3.
लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में क्या अंतर है?
उत्तर :
गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि विलायती खेल बहुत महँगे होते हैं और गुल्ली-डंडा बिना दाम और कौड़ी के होते हैं।
प्रश्न 4.
इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?
उत्तर :
मेरा बचपन” पाठ में लेखक ने अपने बचपन के अनेक अनुभवों को याद किया है। वह कच्चा टूटा घर, वह पयाल का बिछौना, नंगे बदन रहना, नंगे पाँव खेतों में घूमना, आम के पेड़ों पर चढ़ना, बच्चों के साथ गुल्ली-डंडा खेलना, लड़ाई-झगड़े आदि को उन्होंने अपनी यादों में संजोकर रखा है।
समझ और अनुभव
प्रश्न 1.
लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं?
उत्तर :
हमने लेखक के बचपन के निम्नलिखित काम अपने बचपन में किए हैं-
(क) पयाल के बिछौने पर सोना
(ग) नंगे बदन रहना
(ङ) गुल्ली-डंडा खेलना
(छ) पिताजी से डाँट पड़ना ।
(ख) नंगे पाँव खेतों में घूमना
(घ) आम के पेड़ों पर चढ़ना
(च) रामलीला देखना
प्रश्न 2.
लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए ।
उत्तर :
हम निम्नलिखित खेल-खिलौने स्वयं बना सकते हैं-
(क) कागज़ की नाव और हवाई जहाज
(ग) गत्ते का घर या किला
(ङ) कागज़ की कठपुतलियाँ
(छ) मिट्टी के खिलौने
(ख) कागज़ की गुड़िया और उसके कपड़े
(घ) गत्ते की गाड़ी
(च) कार्ड बोर्ड से लूडो, साँप – सीढ़ी
[नोट: विद्यार्थी इनमें से किसी एक को बनाकर कक्षा में ले जा सकते हैं और अपने समूह में खेल सकते हैं।]
प्रश्न 3.
अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने वाली ‘ थापी’ को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं?
उत्तर :
हम अपने घर या पास-पड़ोस की निम्नलिखित वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं-
- लकड़ी की छड़ियाँ और टहनियाँ – इनसे तलवार, बंदूक, जादुई छड़ी, किसी जानवर की पूँछ आदि बनाने में उपयोग किया जाता है।
- पत्थर और कंकड़-छोटे पत्थरों से हम घर बनाते हैं और पैसे के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
- गत्ते के डिब्बे – इनका उपयोग कार, घर, नाव, दुकान, रॉकेट आदि बनाने में करते हैं।
- रस्सी – इनसे हम कूदने का खेल खेलते हैं।
- मिट्टी और रेत – इनसे हम घर, पहाड़ खाने का सामान या कोई आकृति बनाते हैं।
प्रश्न 4.
लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन से काम बहुत उत्साह से करते हैं?
उत्तर :
हम कई काम बहुत उत्साह से करते हैं, विशेषकर वे काम जिनमें हमें सीखने, खेलने और अपनी रचनात्मकता दिखाने का मौका मिलता है। उनमें प्रमुख काम इस प्रकार हैं- खेलना और मस्ती करना, नई चीजें सीखना और खोजना, ड्राइंग करना, पेंटिंग करना, मिट्टी से कुछ बनाना, कहानी सुनना और सुनाना गाना और नाचना व छोटे-मोटे कामों में बड़ों की मदद करना आदि।
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मिलान कीजिए
नीचे दिए गए चित्रों का उनके उपयुक्त विवरण से मिलान कीजिए-

उत्तर :

खान-पान
प्रश्न 1.
लेखक सवेरे-सवेरे सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए-
गुणकारी स्वादिष्ट चना – चबेना
चना-चबेना प्राय: हम उस खाद्य सामग्री को कहते हैं जो चबाकर खाई जाती है। मकई, चिउड़ा, भेल, कई तरह के भुने हुए दाने, भुने हुए चावल, चना, मटर और मुरमुरे, भुना हुआ हरा व उबला चना, दर्जनों ऐसी खाद्य सामग्रियाँ हैं जो हम भारतीय चाहे देश के किसी भी कोने में रहते हों, किसी-न-किसी रूप में चबाते हैं। कई प्रकार की कचरियाँ, कुरकुरे, पापड़, नमकीन, ये भी चबेनों का ही हिस्सा हैं। लेकिन ये घरेलू कम व सामान्यतः बाजार से मिलने वाले उत्पाद हैं जिनमें स्वाद तो बहुत होता है लेकिन ये शरीर के लिए उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते जितने घर के बने चबेने होते हैं।
ऐसे बनाया जाता है चना – चबेना
देश के विभिन्न स्थानों में चना – चबेना विशेष ढंग से बनाया जाता है। चना-चबेना में मटर, चना, सूखा चना, मिर्च- अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई, मूँगफली आदि खाद्य सामग्रियाँ सम्मिलित होती हैं। सबसे पहले इन सभी को कड़ाही में नमक डालकर भली प्रकार भून लिया जाता है। भुनने के बाद उसमें हल्का तेल मिलाया जाता है। मिर्च की चटनी के साथ प्याज और लहसुन भी मिलाया जाता है। इनसे चना – चबेना का स्वाद बढ़ जाता है।
उत्तर :
विद्यार्थी अपनी जानकारी के लिए स्वय पढ़ें तथा चना – चबेना बनाकर खाने का आनंद लें।
प्रश्न 2.
आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए-

उत्तर :
| दूध और कॉर्नफ्लेक्स | फल | कोल्ड ड्रिंक |
| आलू-पराठा | बिस्कुट | मैगी / पास्ता |
| पनीर-पराठा | नमकीन / कुरकुरे | चॉकलेट |
| चावल-दाल-सब्ज़ी | गोलगप्पे | जूस |
आइए जानें
‘मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” ‘दोपहर’ शब्द बना है ‘पहर’ से । ‘पहर’ का अर्थ होता है – दिन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय।
प्रश्न 1.
एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर कितने पहर होते हैं?
उत्तर :
एक दिन और एक रात में कुल आठ पहर होते हैं।
प्रश्न 2.
नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए-

उत्तर :

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तमाशा
“गुल्ली है जरा-सी, पर उसमें दुनिया भर की मिठाइयों की मिठास और तमाशों का आनंद भरा है।” तमाशा का अर्थ है – वह दृश्य जिसे देखने से मनोरंजन हो, जैसे- मेला, नौटंकी आदि । नीचे दिए गए नामों को पढ़िए। इनमें से कौन-कौन से तमाशे आपने देखे हुए हैं? उन पर घेरा बनाइए-

उत्तर :

रामलीला
आपने पाठ में ‘रामलीला’ के बारे में पढ़ा है। हमारे देश में और अन्य देशों में भी दीपावली के आस-पास स्थान-स्थान पर ‘रामलीला’ का आयोजन किया जाता है। आप भी अपनी कक्षा या विद्यालय में रामलीला का मंचन कीजिए। इसके लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-
- आप विद्यालय की वर्दी में भी रामलीला का मंचन कर सकते हैं। किसी अतिरिक्त वस्तु या कपड़ों की आवश्यकता नहीं है।
- पूरी रामकथा का मंचन संभव न हो तो प्रत्येक कक्षा या समूह भिन्न-भिन्न दृश्यों को प्रस्तुत कर सकता है।
- आप अपने संवाद स्वयं बना सकते हैं।
- इस कार्य में आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करेंगे।
भाषा की बात
“विलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है कि उनके सामान महँगे होते हैं । ”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है। इन पर ध्यान दीजिए । यहाँ विलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही हैं कि ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ संज्ञा शब्द हैं।
अब पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा शब्द चुनकर नीचे लिखिए-

उत्तर :
| विशेषण | संज्ञा |
| कच्चा | घर |
| दूर | मैदान |
| नंगे | पाँव |
| कई | दोस्त |
| जरा-सी | गुल्ली |
प्राथमिक चिकित्सा पेटी
कावेरी को कबड्डी खेलते हुए चोट लग जाती है। उसकी मित्र नीलोफर सभी से प्राथमिक चिकित्सा पेटी ( फर्स्ट ऐड बॉक्स) माँगती है लेकिन वह किसी के पास नहीं थी । कावेरी को डॉक्टर के पास ले जाने के बाद नीलोफर सभी को प्राथमिक चिकित्सा पेटी दिखाती है और उसमें रखी हुई वस्तुओं तथा दवाइयों के बारे में बताती है।

अब आप प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली उन वस्तुओं व दवाइयों की एक सूची बनाइए जिनके बारे में नीलोफर ने सभी को बताया होगा। आप भी अपने लिए एक प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार कीजिए। इसके लिए आप अपने सहपाठियों तथा अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर :
प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली वस्तुओं व दवाइयों के नाम निम्नलिखित हैं- विभिन्न आकार की पट्टियाँ, गॉज पैड, चिपकाने वाली टेप, रुई, डेटॉल / सेवलॉन, क्रीम / मरहम, कैंची, सेफ्टी पिन, थर्मामीटर, साफ कपड़े के टुकड़े, ओ. आर. एस. पाउडर आदि ।
नोट: (चिकित्सा पेटी विद्यार्थी स्वयं तैयार करेंगे ।)
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आपके खेल
प्रश्न 1.
ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके सही नामों से मिलाइए-

उत्तर :
आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेला जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है।

कबड्डी – इसमें दो टीमें होती हैं, हर टीम में 7 खिलाड़ी और 5 अतिरिक्त खिलाड़ी होते हैं। यह एक आयताकार कोटे में खेला जाता है।
एक टीम का खिलाड़ी “कबड्डी कबड्डी” बोलते हुए दूसरे टीम के पाले में जाता है। टीम का लक्ष्य दूसरे टीम के किसी एक या अधिक खिलाड़ियों को छूना और बिना साँस तोड़े (यानी “कबड्डी कबड्डी” बोलते रहना) अपने पाले में वापस आना होता है। यही क्रम बारी-बारी से चलता रहता है।
इकड़ी – दुकड़ी – जमीन पर 1 से 10 तक क्रमांकित आयताकार या चौकोर वर्ग बनाए जाते हैं। एक छोटा-सा पत्थर पहले वर्ग में रखा जाता है। खिलाड़ी एक पैर पर कूदते हुए पत्थर को एक-एक करके वर्गों में धकेलता है। खिलाड़ी को हर वर्ग में एक पैर पर कूदना होता है, सिवाय उन वर्गों के जो जोड़े में बने हों, जहाँ वह दोनों पैरों का उपयोग कर सकता है। जब खिलाड़ी पहले वर्ग तक पहुँचता है, तो वह वापस कूदता है और हर वर्ग में पत्थर या टुकड़ा उठाता है। यदि कूदते समय रेखा को छूता है, तो वह आउट हो जाता है और खिलाड़ी का क्रम समाप्त हो जाता है। फिर अगला खिलाड़ी अपनी बारी लेता है। उसे भी इसी प्रक्रिया को पूरा करना होता है।
जो खिलाड़ी बिना किसी गलती के सभी वर्गों को पार कर लेता है, वह खेल जीत जाता है।
लट्टू-लट्टू एक पारंपरिक भारतीय खेल है जो एक लकड़ी के शंकु के आकार के खिलौने को धागे से लपेटकर और फिर घुमाकर खेला जाता है। इसे खेलने के लिए, लट्ट को धागे से कसकर लपेटा जाता है, फिर धागे को एक झटके के साथ खींचा जाता है, जिससे लट्टू घूमना शुरू हो जाता है। यह खेल एक या अधिक खिलाड़ियों के साथ खेला जा सकता है।
पतंग – पतंग का खेल, जिसे पतंगबाजी भी कहा जाता है, एक लोकप्रिय मनोरंजन है जिसमें एक पतंग को हवा में उड़ाया जाता है। यह एक भारतीय खेल है जिसे मकर संक्रांति के दौरान खेला जाता है। लेकिन इसे दुनिया भर में विभिन्न अवसरों पर खेला जाता है। पतंग उड़ाने के लिए, एक पतंग, मांजा और एक खुली जगह की आवश्यकता होती है।
नोट: (छात्र अपने क्षेत्र के अनुसार इन खेलों के नाम स्वयं लिखें।)
प्रश्न 2.
उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर :
दिव्यांग मित्रों के साथ खेले जाने वाले खेलों की सूची इस प्रकार हैं-
सिटिंग वॉली बॉल, व्हीलचेयर बास्केट बॉल, ब्लाइंड क्रिकेट बोकिया, गोल बॉल, तीरंदाजी, ब्लाइंड फुटबॉल, पैरा-एथलेटिक्स, पैरा- तैराकी, पैरा – साइकिलिंग आदि ।
पुस्तकालय से
अपने पुस्तकालय में जाकर प्रेमचंद की लिखी कहानियाँ पढ़िए तथा कक्षा में उनके बारे में चर्चा कीजिए ।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करेंगे।
इन्हें भी जानिए

सन् 1944 में महाराष्ट्र में जन्मे मुरलीकांत राजाराम पेटकर भारत के एक प्रसिद्ध पैरालंपिक तैराक के रूप में जाने जाते हैं। पैरालंपिक खेल दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समय-समय पर आयोजित होने वाला ओलंपिक खेलों का कार्यक्रम है । पेटकर भारतीय सेना के एक जवान थे। सन् 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय कई गोलियाँ लगने के कारण वे लकवाग्रस्त हो गए। उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर तैराकी शुरू कर दी। कुश्ती, हॉकी आदि खेलों में बचपन से ही रुचि रखने वाले मुरलीकांत पेटकर ने अपनी लगन और परिश्रम से कुछ ही समय में तैराकी में प्रवीणता प्राप्त कर ली। वे 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले दिव्यांग तैराक बने । तत्पश्चात सन् 2018 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।


उत्तर :
केवल जानकारी के लिए पढ़ें।
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पता लगाइए
अब आप चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए। इसके लिए आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर :
विद्यार्थी अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर स्वयं लिखें।