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NCERT Class 8th Hindi Chapter 2 दो गौरैया Question Answer
दो गौरैया Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 2 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi दो गौरैया Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि-
- घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
- घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
- पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
- घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
उत्तर:
- घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
प्रश्न 2.
कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
- माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
- लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
- जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
- मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
उत्तर:
- जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
प्रश्न 3.
गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
- दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
- पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
- दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
- माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
उत्तर:
- पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
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प्रश्न 4.
माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
- माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
- माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
- माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
- माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
उत्तर:
- माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
- माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
प्रश्न 5.
कहानी में गौरयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है ?
- दूसरों पर निर्भर रहना
- असफलताओं से हार मान लेना
- अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
- संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
उत्तर:
- अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न
उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
- इसका सही उत्तर है अंतिम विकल्प – घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं क्योंकि आँगन में लगे आम के पेड़ पर बैठने वाले पक्षियों के साथ-साथ चूहे, बिल्ली और छिपकलियाँ भी घर में घूमती रहती थीं। घर में परिवार रहता है। सराय में लोग आते-जाते रहते हैं। यहाँ घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
- कहने के लिए घर में पिताजी एवं माता जी और उनके पुत्र केवल तीन ही रहते थे लेकिन बिना अनुमति के विभिन्न पक्षी व जानवर अपनी मर्जी से वहाँ आते-जाते रहते थे इसलिए सटीक उत्तर- घर के असली मालिक ‘जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे’ कहा गया है।
- क्योंकि माँ को भी गौरैयों का आना अच्छा लगता था। इसलिए माँ ने मना किया।
- क्योंकि माँ को भी गौरैया का आना अच्छा लगता था।
- ‘अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना’ उत्तर ही उपयुक्त है क्योंकि मुश्किलों से डरकर बैठने वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं होता ।
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ विचार करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।)
मिलकर करें मिलान
(ख) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।

उत्तर:
1. (ii)
2. (i)
3. (ii)
4. (ii)
5. (i)
6. (ii)
7. (i)
(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर:
- पक्षियों की चहचहाहट पिताजी को शोर के समान लगता था परंतु अधिकतर लोगों को वह संगीत जैसा लगता है। पक्षियों का चहचहाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे पसंद और नापसंद के रूप में नहीं ग्रहण करना चाहिए।
- घर के आँगन में स्थित आम के पेड़ पर कई प्रकार के पक्षियों ने घोंसले बनाए हुए थे।
- चूहे पूरी रात घर में घूमते हैं कभी वह कुछ गिरा देते हैं तो कभी कुछ। इस शोर से घर के लोगों की नींद में बाधा पहुँचती थी।
- माँ जब भी किसी बात को साधारण रूप में भी कहती तो भी पिताजी को यह संदेह होता कि वह उनका मज़ाक उड़ाने के लिए ऐसा कह रही हैं।
- पिताजी को लगा कि उन्होंने गौरैयों को घर से निकाल दिया है। इसे अपनी विजय मानकर उन्हें गर्व का अनुभव हुआ।
- रात पड़ गई का अर्थ है- रात हो गई। रात कोई भारी वस्तु नहीं है जो पड़ जाए या गिर जाए ।
- शाम को गौरैयों को घर से भगाकर पिताजी गर्व का अनुभव कर रहे थे। पर अगली सुबह उन्हें गौरैयाँ घोसले में बैठी हुई मिली। वे अपने बच्चों के साथ चहचहा रही थीं।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
उत्तर:
हर प्राणी को अपना घर प्रिय होता है। पक्षियों के घर उनके घोंसले होते हैं। प्रत्येक प्राणी स्वयं से ज्यादा अपनी संतान के लिए चिंतित होता है। पक्षियों को उनके घोंसले बनाने से पहले ही यदि उड़ा दिया जाए तो भगाने में कम प्रयत्न करना पड़ता है, किंतु घोंसले बनाने और उसके बाद उसमें अंडे देने के बाद तो उन्हें उड़ाना लगभग असंभव – सा हो जाता है। इसके साथ ही माँ नहीं चाहती थी कि चिड़ियों को उड़ाया जाए।
(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
उत्तर:
पिताजी को लगता था कि उन्होंने गौरैयों को घर से भगा दिया है और यदि दरवाजे बंद रखकर एक दिन भी उन्हें अंदर नही आने दिया जाएगा तो वे घर में प्रवेश नहीं करेंगी। उनका यह मानना क्षणिक था क्योंकि दरवाजे बंद करने के बाद भी गौरैयाँ अन्य रास्ता ढूँढ़कर घर में प्रवेश कर गईं।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
उत्तर:
घर ही तोड़ दिया जाएगा तो वह रहेगा कहाँ ? यही सोचकर पिताजी ने गौरैयों के घोंसले को तोड़ने का प्रयास किया । वह जानते थे कि ऐसा करने से पक्षियों के आगमन को रोका जा सकता है।
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपको कहानी का कौन – सा पात्र सबसे अच्छा लगा-घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तर:
इस कहानी में मुझे ‘माँ’ का पात्र सबसे अच्छा लगा। माँ की दयालुता, पक्षियों के प्रति प्रेम भावना और समझदारी ने मुझे अभिभूत कर दिया। पिता जी गौरैयों को घर से निकालना चाहते हैं, लेकिन माँ ऐसा नहीं चाहतीं। वह उन्हें रोकती हैं और कहती हैं कि अब उन्हें मत निकालो। उन्हें लगता था कि घोंसले में इन्होंने अंडे दे दिए हैं। उन्हें उनके बच्चों की चिंता थी?
अब पिताजी गौरैयों को भगाने का निरर्थक प्रयत्न करते हैं तो माँ को हँसी आ जाती है ।। यह उनकी समझदारी और दूरगामी दृष्टि का प्रतीक है। घोंसले में उनके बच्चों को देखकर पिताजी का हृदय भी पिघल जाता है और गौरैयों को भगाने का विचार वह त्याग देते हैं।
माँ की दयालुता, समझदारी और धैर्य के कारण ही पूरा परिवार गौरैयों के साथ मिलजुलकर रहने का फैसला कर लेता है।
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर:
लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला बैठक की छत पर लगे पंखे के गोले में बनाया । पक्षी अपना घोंसला उन स्थानों पर बनाना पसंद करता है जहाँ पर किसी भी मानव या प्राणी की पहुँच आसान न हो ताकि वे वहाँ सुरक्षित रूप से रह सके। इसलिए गौरैयों ने पंखे के गोले को सुरक्षित मान कर उस पर अपना घोंसला बनाया। वहाँ पर परिवार के सदस्यों व बिल्ली की पहुँच कठिन थी ।
(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
हाँ, हमें लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं। नर और मादा दोनों गौरैयाँ अपने घोंसले को बचाने का भरसक प्रयत्न करते हैं। दोनों गौरैयाँ एक साथ घर में आकर घोंसला बनाने के स्थान का निरीक्षण करते हैं, जिसमें उन्हें अंडे देने थे। दोनों ने मिलकर घोंसला बनाया।
पिताजी जब उन्हें भगाने का प्रयत्न कर रहे थे तो वे दोनों अलग-अलग दिशाओं में उड़कर बाहर निकलने से बचना चाहते थे। वे दोनों ही अपने घोंसले और बच्चों से मनुष्य के समान ही प्रेम करते थे। वे अपनी चोंच में दाने भरकर लाते थे और अपने बच्चों को खिलाते थे।
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(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर:
अब मैं हार मानने वाला नहीं हूँ ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव में दृढ़ता, जिद्दीपन, सतत प्रयत्न और अपने फैसले पर अडिग रहने का गुण दिखाई देता है। उन्हें पक्षियों, जानवरों या अन्य जीव-जंतुओं का घर में आना अच्छा नहीं लगता। उन्होंने ठान लिया कि गौरैयों को निकालना है तो उनका घोंसला हटाना होगा, यह उनकी दृढ़ता को दर्शाता है।
माँ के विरोध के बावजूद उन्होंने गौरैयों को निकालने का प्रयत्न किया। यह उनके जिद्दी स्वभाव के साथ ही अड़ियल होने का परिचायक भी है। समस्या का समाधान करना भी उन्हें आता है, असफलता से डरकर हार मानने वालों में से वे नहीं हैं। वे समस्या का समाधान भी करना चाहते हैं।
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
(संकेत- कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)
उत्तर:
इस कहानी में गौरैयों के व्यवहार में तब बदलाव आता है जब वे देखती हैं कि पिताजी उनके घोंसले को हटाने का प्रयत्न कर रहे हैं। वह चहचहाना छोड़कर चुप हो जाती हैं और घोंसले से सिर निकालकर झाँकती हैं फिर वापस चली जाती हैं। यह परिवर्तन उनकी चिंता और डर को दर्शाता है। वे अपने घोंसले और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनके इस व्यवहार से पता चलता है कि पक्षी भी अपने आसपास के वातावरण और उनमें होने वाले बदलावों के प्रति सचेत हैं।
(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए ।
उत्तर:
इस कहानी में गौरैयों ने मुख्य रूप से खुली खिड़की, मुख्य दरवाज़ा, बालकनी का दरवाज़ा, रोशनदान, जालीदार खिड़की आदि से घर के अंदर प्रवेश किया। इसके अलावा पक्षियों को जहाँ कहीं भी थोड़ा-सा स्थान मिल जाता वे उसी रास्ते से घर में प्रवेश कर जाते थे।
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर:
यह कहानी लेखक ‘भीष्म साहनी’ स्वयं सुना रहे हैं। यह बात कहानी में ‘मैं’ शब्द के प्रयोग के द्वारा और लेखक द्वारा व्यक्तिगत अनुभवों और घटनाओं के वर्णन से पता चलती है।
कहानी में लेखक अपने घर में गौरैया के जोड़े को देखते हैं और उनके साथ एक जुड़ाव – सा महसूस करते हैं। लेखक स्वयं को ‘मैं’ के रूप में संबोधित करते हैं और घर में होने वाली घटनाओं का वर्णन प्रत्यक्षदर्शी के रूप में वे स्वयं करते हैं।

(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर:
कहानी में माँ बार-बार कह रही हैं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी क्योंकि उन्हें लगता था कि गौरैयों ने अंडे दे दिए होंगे और वे अपने बच्चों को छोड़कर नहीं जा पाएँगी। माँ को यह भी लग रहा था कि गौरैयों को इस दशा में घर से निकालना ठीक नहीं है। खासकर तब जब उन्होंने अंडे दे दिए हों। माँ का स्वभाव ममता और सहनशीलता से भरा था। इसलिए वह पिताजी को गौरैयों को घर से निकालने पर रोकना चाहती थी।
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
उत्तर:
हमारे घर के रोशनदान में चिड़ियाँ अपना घर बनाने की कोशिश कर रही हैं। मेरे पिताजी प्रतिदिन प्रयत्न करके उन्हें वहाँ से भगाते हैं। उनके घोंसले के लिए लाए गए दो-चार तिनकों को भी उठाकर वे घर से बाहर फेंक देते हैं। माँ प्रतिदिन उन्हें इस के लिए मना करती हैं। मैं चाहता हूँ कि वह वहीं घोंसला बना लें। मेरे दादा-दादी तीर्थ-यात्रा पर गए हुए हैं। दादी-दादाजी पक्षी-प्रेमी हैं ।
यहाँ पहुँचने पर वे यह देख के खुश हो जाएँगे कि चिड़ियों का जोड़ा हमारे घर के रोशनदान मे रहने लगे। मुझे भी उनकी आवाज़ बहुत अच्छी लगती है। मैं चाहता हूँ कि घोंसले में वे अंडे दें और उनसे बच्चे भी निकल आएँ। मुझे उनकी चहचहाहट अच्छी लगती है।
(विद्यार्थी अपने अनुमान और कल्पना के आधार पर कुछ अन्य परिणामों की चर्चा कर सकते हैं।)
(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे घुस गया दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
(प्राणियों के नाम – चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
उत्तर:
हमारे घर में एक कुत्ता और एक बिल्ली हैं। वैसे तो ये दोनों जानवर एक दूसरे के दुश्मन होते हैं, किंतु हमारे घर में ये दोनों मित्रतापूर्वक रहते हैं। घर के सभी सदस्य इन्हें प्रेम करते हैं।
चूहा, कॉकरोच और मक्खी घर में गंदगी फैलाते हैं। इनसे बीमारियाँ भी फैलती हैं इसलिए कॉकरोच और मक्खी के लिए तो हम स्प्रे प्रयोग करते हैं। चूहों को भगाने के लिए दवाई डालते हैं और साथ ही पिंजरा भी लगाते हैं। कबूतर भी गंदगी करते हैं, ये स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं। इनके घर में प्रवेश न करने के लिए नॉयलान का जाल हमने लगवाया है।
तितली – इसकी सुंदरता पर सब मोहित होते हैं। कुछ पल रुककर ये स्वयं ही उड़ जाती हैं।
(ग) “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा ।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई ? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
उत्तर:
“मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा ।” लेखक को विस्मय और हैरानी इसलिए हुई क्योंकि अभी तक तो पिताजी गौरैयों के घोंसले को हटाकर उन्हे भगाने का भरपूर प्रयत्न कर रहे थे। घोंसले से गौरैयों के बच्चों की चीं-चीं की आवाज सुनकर अचानक उनका हृदय परिवर्तन हो गया। उन्होंने लाठी एक तरफ रख दी थी और चुपचाप आकर कुर्सी पर बैठ गए थे। माँ ने उठकर सारे दरवाजे खोल दिए और पिताजी कुछ नहीं बोले। मेरे लिए यह विस्मय की बात थी। पिताजी का यह व्यवहार उनके स्वभाव के विरुद्ध था।
(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर:
“माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता इसलिए नहीं की होगी क्योंकि माँ बहुत दयालु स्वभाव की हैं। उन्हें पशु पक्षियों से प्रेम है। वह नहीं चाहती होंगी कि पिताजी उन गौरैयों को भगाकर उन्हें बेघर करें।
(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है । ” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि ।
(संकेत- आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
(च) “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर:
सराय और घर में अंतर-
| सराय | घर |
| (i) सराय सार्वजानिक स्थान होता है। यहाँ | पर यात्री कुछ समय | के लिए आते हैं और | किराया या नि:शुल्क | देकर रहते हैं। | (i) घर में परिवार मिलजुलकर | रहता है। घर के सदस्यों | में प्रेमभाव होता है। वह आपस में सुख-दुख के साथी होते हैं। |
| (ii) यह अस्थायी निवास होता है। इसकी तुलना होटल से की जा सकती है। यहाँ पर रहने-खाने हर चीज़ की व्यवस्था होती है। | (ii) यह परिवार का स्थायी निवास होता है। |
| (iii) सराय का वातावरण शोर-शराबे वाला होता है | (iii) घर का वातावरण शांत होता है। मन को शांति देने वाला होता है। स्नेह संबंध होते हैं। |
संवाद और अभिनय
नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-
(क) “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ- बाप कहाँ हैं” नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या- क्या बोल रही होंगी?
उत्तर:
पहली नन्हीं गौरैया – “ चीं चीं” मैं बहुत छोटी हूँ।
दूसरी नन्हीं गौरैया – “चीं चीं” हाँ, हम दोनों बहुत छोटी हैं।
पहली नन्हीं गौरैया – बहन, मुझे बहुत भूख लग रही है “चीं चीं”।
दूसरी नन्हीं गौरैया – हाँ! मेरा भी भूख से बुरा हाल है।
पहली नन्हीं गौरैया – हमारे माता-पिता कहाँ पर हैं?
दूसरी नन्हीं गौरैया – चुप हो जाओ वो हमारे लिए खाना लेने गए हैं। आते ही होंगे।
पहली नन्हीं गौरैया – मुझसे भूख सहन नहीं हो रही।
दूसरी नन्हीं गौरैया – थोड़ा धैर्य रखो। वे पहुँचने वाले ही होंगे।
(दोनों एक साथ प्रसन्नतापूर्वक चीं चीं चीं ची! करती हैं)
(ख) “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है? ” घोंसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?
उत्तर:
पिताजी दोनों चिड़ियों को कभी ताली बजाकर तो कभी मुँह से आवाज़ निकालकर उछल-उछल कर उन्हें भगाने का प्रयत्न कर रहे थे यह देखकर-
पहली चिड़िया – यह आदमी कौन है? इसे क्या परेशानी है, यह नाच क्यों रहा है?
दूसरी चिड़िया – पता नहीं इसे क्या हो गया है। अभी तक तो आराम से बैठा था अब क्यों आवाज़ें निकाल रहा है?
पहली चिड़िया – चलो इससे पूछा जाए इसे क्या हुआ है?
दूसरी चिड़िया – ना बाबा ना इसके चेहरे पर कितना क्रोध है मुझे तो डर लग रहा है।
पहली चिड़िया – कह तो तुम ठीक ही रही हो ।
(विद्यार्थी इसे स्वयं आगे बढ़ाएँ।)

(ग) “एक दिन दो गौरैयाँ सीधी अंदर घुस आई और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें
की होंगी?
उत्तर:
पहली गौरैया – ध्यानपूर्वक देखना, इस घर में हमें घोंसला बनाना है या नहीं?
दूसरी गौरैया – हाँ! यहाँ हमें बच्चों को पालना भी है। जगह सुरक्षित होनी चाहिए ।
पहली गौरैया – मैं रोशनदान और खिड़कियाँ देखती हूँ। तुम दरवाज़े और पंखों के गोले देखो।
दूसरी गौरैया – मुझे तो घर अच्छा लग रहा है। हम यहाँ अपने बच्चों के साथ आराम से रह सकेंगे।
पहली गौरैया – हाँ, घर की मालकिन भी दयालु लग रही हैं।
दोनों एक स्वर में – चीं चीं, चीं, चीं अब हम यहीं अपना घोंसला बनाएँगे।
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(घ) “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं . चोंचों में चुग्गा डालने लगे । ” गौरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?
उत्तर:
माँ गौरैया – चलो – चलो यहाँ से अंदर जाने का रास्ता है।
पिता गौरैया – हाँ, हाँ, जल्दी चलो हमें अपने बच्चों के पास जाने का रास्ता मिल गया ।
माँ गौरैया – (प्रेमपूर्वक अपने बच्चों को निहारते हुए) लो बच्चों तुम भूखे होंगे।
(अपनी चोंच से चुग्गा दोनों बच्चों के मुँह में डालती है।)
पिता गौरैया – देखो, तुम्हारे द्वारा खिलाए गए खाने को खाकर हमारे बच्चे कितने प्रसन्न हैं।
एक छोटी गौरैया – (अपनी माता की चोंच से चुग्गा खाकर प्रसन्न होते हुए) माँ-माँ ! आप आ गईं और पिताजी आप भी आ गए। बहुत अच्छा लग रहा है।
दूसरी छोटी गौरैया – माँ – पिताजी आप दोनों बहुत अच्छे हैं। आप हमारा बहुत ध्यान रखते हैं।
बदली कहानी
• मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती ? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तर:
अगर घोंसले में से अंडों से बच्चे न निकले होते तो कहानी अलग ही दिशा में आगे बढ़ती ।
पिताजी ने यह निश्चय कर लिया था कि वह हर कीमत पर चिड़ियों का घोंसला तोड़कर उन्हें वहाँ से भगाकर ही दम लेंगे। वे अपने कार्य को पूर्ण करने के लिए जी-जान से जुट गए।
माँ ने एक दरवाज़ा खुला छोड़कर अन्य सभी दरवाज़े बंद करवा दिए। माता-पिता दोनों गौरैयों को घर से बाहर निकाल दिया गया था। पिताजी अपनी सफलता पर बहुत प्रसन्न थे । उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वह घोंसला तोड़कर फेंक देंगे और इन दोनों गौरैयों को अपने घर में नहीं आने देंगे। पिताजी उनका घोंसला तोड़कर ही दम लेते। उनके घर के दरवाज़े हमेशा के लिए पक्षियों के लिए बंद हो जाते।

कहने के ढंग / क्रिया विशेषण
“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।”
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रिया विशेषण शब्द है।
उत्तर:
• अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए ।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
• अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
(संकेत- धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)
(क) माता जी ने झिड़ककर कहा,” अब खेलना बंद करके चुपचाप पढ़ाई करो।”
(ख) अध्यापिका ने गंभीरतापूर्वक कहा “परीक्षा सिर पर है सभी छात्र मन लगाकर अपनी पढ़ाई में जुट जाओ ।”
(ग) दादा जी ने गुस्से से कहा “किसी भी निरीह प्राणी पर अत्याचार मत करो।”
अन्य क्रिया विशेषण वाले वाक्य
- धीरे से – मेरा भाई धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर गया।
- जोर से – जोर से मत बोलो, दादाजी सो रहे हैं।
- अटकते हुए – चोरी पकड़ी जाने से चोर अटकते हुए सभी प्रश्नों के उत्तर दे रहा था।
- चिल्लाकर – चिल्लाकर मत बोलो, चिल्लाने से झूठ सच में नहीं बदल जाएगा।
- शरमाकर – छोटा बच्चा भीड़ को देखकर शरमाकर पीछे बैठ गया।
- सहमकर – मालकिन की डाँट खाकर नौकरानी का बच्चा सहमकर पीछे हट गया।
- फुसफुसाते हुए – चोर ने फुसफुसाते हुए दूसरे चोर को घर में प्रवेश करने को कहा।
- धीरे से – तुम धीरे-धीरे चलो।
- तेज़ – वह बहुत तेज़ दौड़ रहा है।
- जल्दी – वह जल्दी-जल्दी चलकर घर पहुँच गया।
घर के प्राणी
• कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे ?

(क) बिल्ली – ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) चूहे – …………………..
(ग) चूहा – ………………….
(घ) चमगादड़ – ……………….
(ङ) गौरैया – …………………..
उत्तर:
(क) बिल्ली – ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) चूहे – रात में धमा चौकड़ी मचाते हैं।
(ग) चूहा – एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है, सर्दी लगती है।
(घ) चमगादड़ – चमगादड़ कमरों के आर-पार पंख फैलाए कसरत करने लगते हैं।
(ङ) गौरैया – गौरैया सीधी उड़कर घर के अंदर घुस गई और बिना पूछे उड़-उड़ कर मकान देखने लगी।
हेर-फेर मात्रा का

“माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।”
“पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा – भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।
• अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए ।
- नाच-नाचा – नचा
- हार- हरा – हारा
- पिता-पीता
- चूक- चुक
- सहसा – साहस
उत्तर:
- नाच-नाचा – नचा
नाचा – नाच – मोर का नाच देखकर मन प्रसन्नता से भर गया।
नाचा – आज राहुल बहुत अच्छा नाचा ।
नचा – मेरे छोटे भाई ने आज मुझे नचा – नचाकर थका दिया। - हार- हरा-हारा
हार – जीवन में हार मानकर रुक नहीं जाना चाहिए, बार-बार का प्रयत्न हार को जीत में बदल देता है।
हरा – हरा-भरा खेत मन मोह लेता है।
हारा – आज हमने अपने प्रयत्न से लगभग हारा हुआ क्रिकेट मैच जीत में बदल दिया । - पिता-पीता
पिता – माता-पिता से अधिक शुभचिंतक कोई नहीं हो सकता।
पीता – मैं दूध पीता हूँ। - चूक – चुक
चूक – ध्यानपूर्वक काम करो, कोई चूक नहीं होनी चाहिए।
चुक – उसके परिश्रम से आज उसका ऋण चुक गया। - नीचा- नीचे
नीचा – उसकी बहुत गलत आदत है, वह हमेशा दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयत्न करता रहता है।
नीचे – ध्यानपूर्वक नीचे उतरो । - सहसा – साहस
सहसा – मैं घर जा रहा था कि सहसा एक बंदर मेरे सामने आ गया।
साहस – हमें साहस का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

वाद-विवाद
कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं-
‘अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।’
“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।”
• कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए । वाद-विवाद का विषय है- “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं। ” कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।
उत्तर:
माँ चिड़ियों को घर से बाहर निकालना चाहती थीं-
| पक्ष | विपक्ष |
| आदरणीय निर्णायक मंडल, अध्यापकगण, मेरे मित्रो एवं यहाँ पर उपस्थित सभी विद्वानों को मेरा प्रणाम । आज मैं आप सबके समक्ष आज के विषय “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं” के पक्ष में अपने तर्क देना चाहता हूँ। यह सत्य है कि कोई भी मानव अपने घर में गंदगी पसंद नहीं करता और यहाँ तो बात माँ अर्थात् घर की गृहिणी की हो रही है। पशु-पक्षी सभी से घर में गंदगी फैलती है। पक्षी – प्रेम अपनी जगह है। स्वच्छता का अपना महत्व है। यदि माँ उन्हें न निकालना चाहती तो क्यों पिता जी को चिड़ियों को भगाने का उपाय – “ एक दरवाजा खुला छोड़ो बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।” बतातीं। ” अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं ।” इस पंक्ति में भी माँ का चिड़ियों को भगाने का भाव प्रतीत होता है। | आदरणीय अध्यापकगण, निर्णायक मंडल, मेरे मित्रो एवं उपस्थित सभी जनों को मेरा प्रणाम । आज मैं यहाँ आप सबके समक्ष आज के विषय “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं” के विपक्ष में अपने तर्क देना चाहती हूँ। मैं अपने मित्र की बात से पूर्णत: सहमत हूँ कि कोई भी मानव अपने घर में गंदगी पसंद नहीं करता और गृहिणी तो बिलकुल नहीं। पर यहाँ बात गंदगी या सफाई की नहीं है । यहाँ बात है मानव स्वभाव की, उसकी दयालुता एवं करुणा की । हमें सभी प्राणियों के प्रति दया का भाव रखना चाहिए। माँ का यही स्वभाव है। वह अपने पति से विनती करती हैं कि “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।” साथ ही वे चिड़ियों को भगाना नहीं चाहतीं – ‘अब तो ये नहीं उडेंगी, पहले इन्हें उड़ा देते तो उड़ जातीं। एक दरवाजा खुला छोड़ने की बात इसलिए कहती हैं कि उन्हें पता था कि वे लौट आएँगी। इसके साथ ही वह अपने पति का क्रोध शांत करना चाहती थीं। |
कहानी की रचना
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।”
इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है । इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए ।
उत्तर:
- आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। जो भी पक्षी पहाड़ियों – घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है। पिताजी कहते हैं कि वह सीधा हमारे घर पहुँच जाता है।
- एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है, उसे सर्दी बहुत लगती है। दूसरे को बाथरूम की टंकी पर बैठना पसंद है।
- अब एक दिन दो गौरैयाँ सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़कर मकान देखने लगीं।
- जाने से पहले मैंने आँगन में झाँककर देखा, चिड़ियाँ वहाँ नहीं थीं। मैंने समझ लिया कि उन्हें अक्ल आ गई होगी।
- नन्हीं-नन्हीं दो गौरैयाँ अभी भी झाँके जा रहीं थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ – बाप नहीं हैं ?
- उनके माँ-बाप झट से अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोचों में चुग्गा डालने लगे।
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आपकी बात
• इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए ।

उत्तर:
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी में से उदाहरण |
| 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना | जो भी पक्षी पहाड़ियों – घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो ! |
| 2. हास्य यानी हँसी मज़ाक का उपयोग किया जाना |
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| 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और |
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| 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना |
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| 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना |
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| 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना |
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| 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना |
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पाठ से आगे
(क) “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है ? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं ?
उत्तर:
(i) पिछली गर्मी की छुट्टियों में चिड़िया के एक जोड़े ने हमारे घर के रोशनदान में अपना घोंसला बना लिया था। माँ ने उन्हें भगाने से मना कर दिया। वह दोनों बड़े प्रेमपूर्वक रहते थे। मादा चिड़िया घोंसले में अधिक रहती थी। नर चिड़ा बाहर से अपनी चोंच में मादा चिड़िया के लिए खाना लाता था। थोड़े दिनों में ही उनके अंडों से उनके छोटे-छोटे चूजे निकल आए। वह प्रेमपूर्वक अपने बच्चों का पोषण करते। दोनों में अपनी चोंच दाना भरकर लाते और उन्हें खिलाते।
(ii) मेरे घर के पास एक बगीचा है। उनमें एक पक्षी ने बहुत सुंदर घोंसला बनाया हुआ है। माँ से पूछने पर पता चला कि वह बया का घोंसला है। उस घोंसले की बनावट देखकर मैं और मेरे मित्र दंग रह गए।
(iii) मेरे घर के पास पेड़ पर एक कोयल रोज़ आकर बैठ जाती है उसका अपना घोंसला नहीं है। पास ही एक कौए का घोंसला भी है। एक दिन मैंने देखा कि वह उसके घोंसले में बहुत देर तक रही। माँ से पूछने पर पता चला कि कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती। वह दूसरों के घोंसलों में अंडे देती है। अधिकांश पक्षी प्रेमपूर्वक एक ही पेड़ पर बैठे रहते हैं। वे पेड़ पर बैठे-बैठे ही सो जाते है और वहीं से अपना दाना-पानी प्राप्त कर लेते हैं।
(विद्यार्थी इसी तरह का कोई अपना अनुभव उत्तर के रूप में साझा कर सकते हैं।)
(ख) “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे ।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए । साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तर:
हमारा परिवार संयुक्त परिवार है। घर मे कुल नौ प्राणी हैं। मेरे दादा-दादी जी, चाचा-चाची जी, उनके दो पुत्र, मेरे माता-पिता और मैं। हम सभी मिलजुल कर रहते हैं। घर में मेहमानों का आना-जाना भी लगा ही रहता है। प्रायः मेरी बुआ जी भी आती हैं। उनकी एक बेटी है, अनु । हम दोनों हम उम्र हैं। फूफा जी को अपनी नौकरी के सिलसिले में दो साल के लिए विदेश जाना पड़ा। विदेश में खाने-पीने की समस्या को देखते हुए बुआ जी ने भी उनके साथ जाने का मन बना लिया। अनु मुझसे एक कक्षा आगे है। अनुको दो साल के लिए हमारे घर छोड़ दिया गया।
अनु के आने का हमारे पूरे घर ने स्वागत किया। मुझे तो उसका आना और भी अच्छा लगा। क्योंकि उसका पलंग भी मेरे कमरे में लगाया गया। हम दोनों एक साथ पढ़ाई करते और साथ ही खेलते हैं। वह पढ़ाई में बहुत तेज है। किसी भी विषय की मेरी समस्या को वह चुटकियों में हल कर देती है। उसके साथ रहना मुझे बहुत अच्छा लगता है। संयुक्त परिवार का एक अपना ही सुख है।
(विद्यार्थी इसी तरह का कोई अपना अनुभव भी साझा करें।)
(ग) परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो ?
उत्तर:
परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। हाँ, मेरे साथ भी ऐसा हुआ है। मैं अपने संयुक्त परिवार का इकलौता बेटा हूँ । मेरे ताऊ जी व ताई जी की कोई संतान नहीं थी। मेरे जन्म के समय घर खुशियों से भर गया। दादा-दादी, ताऊजी, ताईजी, मेरे माता-पिता मेरी बुआजी सभी का मैं लाडला हूँ।
मेरे मुँह से कोई फरमाइश निकलती और तत्काल पूरी कर दी जाती। इस कारण मैं बहुत जिद्दी और बदतमीज़ होता जा रहा था। घर का कोई सदस्य डाँटता तो दूसरा लाड लड़ा लेता। जब मैं सात वर्ष का था तो ईश्वर की कृपा से मेरे ताऊजी के घर एक बेटी ने जन्म लिया।
परिवार के सभी सदस्य मेरे समान उसे स्नेह करने लगे। मुझे यह सहन नहीं हो रहा था। मुझे लगता था इसने आकर मेरा प्यार, मेरी परवाह कम कर दी। चोरी छिपे मैं उसे तंग करने लगा। मैं उसे तंग करने के लिए बैठता तो उसकी मुसकराहट जो मुझे पहले खराब लगती थी। धीरे-धीरे अच्छी लगने लगी। इसमें मेरा साथ मेरे दादा जी और दादी जी ने दिया वो मुझे हमेशा प्यार से समझाते ।
दिन बीतते गए और वह थोड़ी बड़ी होती गई । मुझे भी समझ आने लगी कि मेरी बहन है। भाई – बहन एक दूसरे के साथी होते हैं। अब दोनों भाई-बहन के साथ – साथ मित्र बन गए हैं। एक-दूसरे के बिना मन नहीं लगता।
(विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर अन्य उत्तर भी लिख सकते हैं।)
चिड़ियों का घोंसला
घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।

(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूंढिए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी—उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)

उत्तर:
| घोंसला कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था |
| 1. पेड़ | टहनियाँ, घास, पंख, पत्तियाँ, धागे | चिड़िया के दो चूजे | कौआ |
| 2. इमारत | टहनियाँ, घास, पंख, धागे, सींके, डंडियाँ | कबूतर व कबूतरी | कबूतर |
| 3. जमीन | घास, तिनके | टिटहरी के दो बच्चे | टिटहरी |
| 4. गुफा में | घास, पत्ते, धागे | खाली | उल्लू |
| 5. पेड़ पर लटकता हुआ | धागे, पत्ते, घास, तिनके, डंडियाँ, टहनियाँ | खाली | बया |
(विद्यार्थी इसी तरह का कोई अपना अनुभव भी साझा करें।)
(ख) विभिन्न पक्षियों के घोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
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मल्हार
“जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”
‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक प्रसिद्ध राग का नाम है। यह राग वर्षा ऋतु से जुड़ा है। आप जानते ही हैं कि आपकी हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम मल्हार भी इसी राग के नाम पर है।
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से राग मल्हार को सुनिए और इसका आनंद लीजिए—
- https://www.youtube.com/watch?v=3iQHe2hIJGM
- https://www.youtube.com/watch?v=pHbXFAhQtpI
- https://www.youtube.com/watch?v=7K3SYX8THkw
उत्तर:
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या – 26 पर दिए गए निर्देशानुसार विद्यार्थी स्वयं करें।
हास्य-व्यंग्य
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” माँ ने व्यंग्य से कहा ।
आप समझ गए होंगे कि इस वाक्य में माँ ने पिताजी से कहा है कि वे चिड़ियों को नहीं निकाल सकते । इस प्रकार से कही गई बात को ‘व्यंग्य करना’ कहते हैं।
व्यंग्य का अर्थ होता है- हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी, बुराई या विडंबना को उजागर करना ।
व्यंग्य में बात को सीधे न कहकर उलटा या संकेतात्मक ढंग से कहा जाता है ताकि उसमें चुटकीलापन भी हो और गंभीर सोच की संभावना भी बनी रहे। अनेक बार व्यंग्य में हास्य भी छिपा होता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए ।
उत्तर:
- छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!
- चिड़िया एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?
- इतनी तकलीफ़ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते तो उड़ जातीं।
- तुम बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाज़े खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो ।
- “चलो, दो तिनके तो निकल गए” माँ हँसकर बोली, ‘अब दो हज़ार भी निकल जाएँगे ।”
(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।
(i) “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे।” (✓)
(iv) “तुम बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाज़े खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो ।” (✓)
(v) ” चलो, दो तिनके तो निकल गए” माँ हँसकर बोली, अब दो हज़ार भी निकल जाएँगे।” (✓)
आज की पहेली
- चित्र-पहेली गलत है।
झरोखे से - विद्यार्थी स्वयं करें।
साक्षी समझ - विद्यार्थी स्वयं करें।