Reading Class 8 Hindi Notes Malhar Chapter 10 तरुण के स्वप्न Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
तरुण के स्वप्न Class 8 Summary in Hindi
तरुण के स्वप्न Class 8 Hindi Summary
तरुण के स्वप्न का सारांश – तरुण के स्वप्न Class 8 Summary in Hindi
यह पाठ महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस द्वारा देखे गए एक आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न का वर्णन करता है। वे देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न को अपना उत्तराधिकार मानते हुए भारत के लिए एक ऐसे स्वतंत्र, संगठित और सर्वांगीण समाज की कल्पना करते हैं जहाँ व्यक्ति हर प्रकार के बंधनों से मुक्त हो, जातिभेद न हो, नारी को पुरुषों के समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा व उन्नति के समान अवसर मिलें। वे ऐसे राष्ट्र की कल्पना करते हैं जहाँ श्रम और कर्म का सम्मान हो, आलस्य और अकर्मण्यता के लिए कोई स्थान न हो और जो किसी भी विदेशी प्रभाव से मुक्त हो ।

उनका स्वप्न केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसे आदर्श समाज और राष्ट्र का है जो विश्व – मानव के समक्ष एक मिसाल बने । वे इस स्वप्न को साकार करने के लिए हर प्रकार के त्याग और संकट सहने को तैयार हैं और इसे युवाओं को उपहार के रूप में स्वीकार करने का आह्वान करते हैं, क्योंकि यही स्वप्न उन्हें असीम शक्ति और आनंद देता है तथा उनके जीवन को सार्थक बनाता है।
शब्दार्थ
पृष्ठ संख्या – 140 :
उत्स – स्रोत, उद्गम ।
निर्झर – झरना ।
उत्तराधिकारी – विरासत पाने वाला |
प्रेरणा – प्रोत्साहन ।
आदर्श – अनुकरणीय, श्रेष्ठ।
सर्वांगीण – सभी अंगों से युक्त, पूर्ण ।
स्वाधीन – स्वतंत्र ।
दृष्टियों से मुक्त – हर प्रकार से स्वतंत्र ।
जातिभेद – जाति के आधार पर भेदभाव।
उपभोग करें – उपयोग करें, लाभ उठाएँ।
विषमता – असमानता, भेद ।
सुअवसर – अच्छा अवसर ।
मर्यादा – सम्मान, प्रतिष्ठा ।
अकर्मण्य – निकम्मा, काम न करने वाला।

पृष्ठ संख्या-141 :
विजातीय – विदेशी, पराया ।
सर्वोपरि – सबसे ऊपर, प्रधान।
सार्थक – अर्थपूर्ण, सफल।
स्थिर – स्थायी, अटल।
विश्व-मानव – संपूर्ण मानव जाति ।
गण्य होगा – गिना जाएगा, महत्वपूर्ण होगा ।
नित्य – हमेशा, सदा ।
अखंड सत्य – अटूट सत्य।
प्रतिष्ठा – स्थापना, सम्मान।
त्याग – बलिदान ।
संकट – विपत्ति, मुसीबत।
मरण – मृत्यु।
तरुण – युवा ।
असीम – जिसकी कोई सीमा न हो, अनंत ।
अपार – बहुत अधिक।
क्षुद्र – छोटा, तुच्छ।