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Class 6th SST Chapter 3 Question Answer in Hindi Medium
Social Science Class 6 Chapter 3 Question Answer in Hindi
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 के प्रश्न उत्तर in Hindi स्थलरूप एवं जीवन
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ( पृष्ठ 41 )
प्रश्न 1.
स्थलरूपों के प्रमुख प्रकार कौन-से हैं और जीवन तथा संस्कृति के लिए इनका क्या महत्व है?
उत्तर:
स्थलरूपों के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
(1) पर्वत
(2) पठार
(3) मैदान
(1) पर्वत – पर्वत वह स्थलरूप हैं जो आस-पास की भूमि से कुछ अधिक ऊँचे होते हैं। इन्हें चौड़े आधार, खड़ी ढलान और संकरे शिखरों के रूप में पहचाना जा सकता है। कुछ पर्वत अपनी अधिक ऊँचाई के कारण हिम से ढके होते हैं। ग्रीष्म ऋतु में हिम पिघल जाती है और जल में बदलने के बाद नदियों में पहुँचती है। बहुत अधिक ऊँचाईयों पर हिम कभी नहीं पिघलती है और ये पर्वत स्थायी रूप से हिम से ढके रहते हैं। पर्वतों की ऊँचाई प्राय: 900 मीटर से अधिक होती है।
• पर्वतों का जीवन तथा संस्कृति पर प्रभाव-
- पर्वतीय क्षेत्रों में समतल भूमि के अभाव के कारण ढलानों पर सीढ़ीदार कृषि की जाती है परंतु सभी स्थानों पर सीढ़ीदार कृषि संभव नहीं होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का मूल आधार पशुपालन है।
- पर्वतीय क्षेत्र पर्यटन को आकर्षित करते हैं जो इन पर्यटन क्षेत्रों में अनेक प्रकारों से आय एवं रोजगार प्रदान करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में तीर्थ स्थानों की अधिकता के कारण इन्हें देवभूमि भी कहा जाता है जिसके कारण तीर्थयात्री इन स्थानों की यात्रा करते हैं।
- पर्वत एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ विशिष्ट प्रकार का सांस्कृतिक जीवन पाया जाता है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के फलस्वरूप यहाँ के पर्यावरण संतुलन पर भी दबाव निरंतर बढ़ रहा है।
(2) पठार -पठार एक ऐसी स्थलाकृति है जो आस-पास की भूमि से उठी होती है और प्रायः इसकी सतह चपटी होती है। इसके कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं। पठारों की ऊँचाई सामान्यतः 300 मीटर से 1000 मीटर के मध्य होती हैं। तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊँचा पठार है जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 5000 से 6000 मीटर तक है।
• पठारों का जीवन तथा संस्कृति पर प्रभाव-
- पठारों में खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण पठारी क्षेत्रों में खनन मुख्य गतिविधि है ? विश्व के अधिकांश खनन स्थल पठारों में ही केंद्रित हैं।
- पठारों से होकर बहने वाली नदियाँ जल प्रपात बनाती हैं जो जलविद्युत निर्माण में सहायक हैं।
- पठारों में नहरों का निर्माण एक दुष्कर कार्य अतः पठारी क्षेत्रों में कृषि मुख्यतः वर्षा पर ही आधारित होती है। पठारों में पर्यावरण विविधता पाई जाती है ।
- पठारों में पाई जाने वाली चट्टानी मिट्टी मैदानों की जलोढ़ मृदा की तुलना में कम उपजाऊ होती है। अतः पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं।
- ज्वालामुखी क्रियाओं के फलस्वरूप पठारों में काली मिट्टी भी पाई जाती है।
(3) मैदान – मैदान ऐसी स्थलाकृति होती है जिसका विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल होता है । उसमें कोई ऊँची पहाड़ियाँ अथवा गहरी घाटियाँ नहीं पाई जाती हैं। सामान्यतः मैदान की ऊँचाई समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं होती है।
• मैदानों का जीवन तथा संस्कृति पर प्रभाव-
- आरंभिक सभ्यताओं का विकास इन उपजाऊ मैदानों में नदियों के पास ही हुआ है।
- वर्तमान में विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में ही रहती है।
- मैदानी भू-भाग में निवास करने वाली जनसंख्या का मुख्य व्यवसाय कृषि है।
- मैदान में नहरों के निर्माण में सुगमता के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।
- बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण तथा भूमिगत जल स्तर में गिरावट मैदानों की प्रमुख समस्याएँ हैं।
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प्रश्न 2.
प्रत्येक स्थलरूप के साथ संबंधित जीवन की क्या चुनौतियाँ एवं अवसर हैं?
उत्तर:
सभी स्थलरूप जीवन के समक्ष चुनौतियाँ एवं अवसर प्रदान करते हैं जैसे-
(1) पर्वत
चुनौतियाँ-
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव, कठिन जीवन प्रणाली मानव को पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानों की ओर पलायन के लिए विवश करती हैं।
- मानसून विस्फोट, भूकंप, भू-स्खलन, हिम-स्खलन आदि प्राकृतिक आपदाएँ पर्वतीय जीवन को प्रभावित करती हैं।
- सीमित क्षेत्रों में पर्यटन के विकास ने उन क्षेत्रों में अनियंत्रित मानव बसाव को प्रोत्साहित किया है। जिसके कारण इन क्षेत्रों में भूमि तथा जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है, अनेक पर्यावरणीय समस्याएँ जैसे – वनों का विनाश, वन्य जीवों के आवासों पर संकट, बढ़ता प्लास्टिक कचरा आदि अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं।
- पर्यटन ने पर्वतीय संस्कृति तथा जीवन मूल्यों को भी प्रभावित किया है।
अवसर-
- सुनियोजित पर्यटन क्षेत्रों के विकास द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन तथा रोजगार की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
- कानूनी उपायों द्वारा वन तथा वन्य-जीव संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण को सुरक्षित बनाते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, चिकित्सा पर्यटन, तीर्थ-यात्राओं द्वारा आय और रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है।
( 2 ) पठार:
चुनौतियाँ-
- पठार खनिजों के भंडार गृह हैं। खनिजों के दोहन ने पठारों के प्राकृतिक पर्यावरण को प्रभावित किया है। खनन यहाँ मुख्य व्यवसाय है।
- पठारी भागों में खनिजों की खोज एवं दोहन ने मानव विस्थापन तथा वन और वन्य-जीवन के विनाश को प्रोत्साहित किया है।
- स्थानीय लोगों को इन संसाधनों का लाभ न मिलने तथा उनके विस्थापन ने अनेक सामाजिक आंदोलनों को जन्म दिया है।
• अवसर-
- वैज्ञानिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग द्वारा पर्यावर्णीय दुष्प्रभावों को सीमित किया जा सकता है।
- खनिजों के दोहन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी में वृद्धि करके उनके जीवन-स्तर में वृद्धि संभव है।
( 3 ) मैदान:
• चुनौतियाँ-
- मैदानी क्षेत्रों में अनियंत्रित आवासीय क्षेत्र में वृद्धि अनेक समस्याओं का मूलभूत कारण है।
- जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के फलस्वरूप कृषि एवं कृषि क्षेत्रों पर दबाव ।
• अवसर-
- नवीनतम कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि संभव है।
- नगरों के नियमित एवं सुनियोजित विकास के द्वारा आवासीय संकट को हल किया जा सकता है।
- कृषि के विकास के साथ गैर-कृषि उपयोगी भूमि पर सुनियोजित औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर विकास की गति को बढ़ाया जा सकता है।
आइए पता लगाएँ ( पृष्ठ 49, 53, 54, 55 )
प्रश्न 1.
चित्रों के माध्यम से ( चित्र 3.6, पृष्ठ 50 पाठ्यपुस्तक) पर्वतों पर रहने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाया गया है। कक्षा में समूह बनाकर चर्चा कीजिए और प्रत्येक पर एक अनुच्छेद लिखिए । यह भी विचार कीजिए कि जब पर्वतों पर इतनी सारी चुनौतियाँ हैं, फिर भी लोग वहाँ क्यों रहते हैं।

उत्तर:
• बादल फटना तथा आकस्मिक बाढ़: जब आद्रता से लदी पवनों के मार्ग में कोई अवरोध (पर्वत अथवा वायुराशि) आ जाती है तो वह प्रचंड गर्जन के साथ सारी आर्द्रता गिरा देती है। यह घटना बादल का फटना कहलाती है जिसके फलस्वरूप उस क्षेत्र में आकस्मिक बाढ़ के साथ भूस्खलन तथा मृदा प्रवाह जैसी प्राकृतिक आपदाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। जिनके फलस्वरूप जन-धन की बड़े पैमाने पर हानि होती है तथा वनस्पति और वन्य-जीवन भी इससे प्रभावित होता है।
• हिमपात तथा हिमधाव ( ऐवलांश ): अत्यधिक ऊँचाई पर वर्षण हिमपात के रूप में होता है जिससे इन क्षेत्रों में शीतलहर की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जब हिम- आवरण की परत अत्यधिक मोटी हो जाती है तब यह गुरुत्वाकर्षण बल और ढाल का अनुसरण करते हुए ऊपर से नीचे की ओर तीव्रता से गति करती है जिससे रास्ते में
आने वाली प्रत्येक वस्तु हिम में दब जाती है जिससे बड़े पैमाने पर विनाश होता है। इसे हिमधाव कहते हैं।
• अनियंत्रित पर्यटन: पर्वत सदैव से आकर्षण का केंद्र रहे हैं। यहाँ की सुंदरता तथा मनोरम वातावरण सभी को सम्मोहित करता है । पर्वतों पर बढ़ती सुविधाओं जैसे- होटल, अच्छी सड़कों के साथ ही तीर्थ स्थान भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जिसके कारण पर्वतों पर अनियंत्रित रूप से भीड़ का दबाव देखने को मिलता है। इसके कारण इन क्षेत्रों में आय और रोजगार के साधन तो बढ़े हैं। परंतु इससे इन क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ा है। शहरों की तरह कचरे के पहाड़ बनने लगे हैं। इससे वन्य जीवों के आवास की समस्या उत्पन्न होने लगी है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन ने मौसम को प्रभावित किया है। जिससे सर्दियों में बर्फ का गिरना कम होने लगा है। बढ़ती आबादी के कारण अनेक स्थानों पर जमीन धंसने की घटनाएँ भी सामने आने लगी हैं। पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ के कारण इन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की माँग में भी तीव्र वृद्धि होती है। जिससे स्थानीय लोगों को भी वस्तुओं की कमी और महँगाई की समस्या का सामना करना पड़ता है।
उपरोक्त समस्त चुनौतियों के बाद भी लोग वहाँ रहना पसंद करते हैं:
- वह वहाँ के मूल निवासी है जो अपनी जीवन प्रणाली और संस्कृति का सम्मान करते हैं और वहीं रहना चाहते हैं ।
- बदलते समय के साथ ही इन क्षेत्रों में भी सुविधाओं का विकास हुआ है।
- पर्वतीय क्षेत्रों को देवभूमि भी कहा जाता है। जिसके कारण लोग श्रृद्धावश भी इन स्थानों पर रहना पसंद करते हैं।
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प्रश्न 2.
चित्र 3.8 ( पाठ्यपुस्तक पृ. सं. 53 ) में दर्शाए गए स्थलरूपों में रंगों के कोड का प्रयोग कीजिए। उदाहरणार्थ – तिब्बत का पठार, रॉकी श्रृंखला, नील नदी का मैदान ( आपको मानचित्र में दिए गए नाम स्मरण करने की आवश्यकता नहीं है)।

उत्तर:
तिब्बत का पठार – भूरा रंग
रॉकी श्रृंखला – हल्का भूरा रंग
नील नदी का मैदान – बहुत हल्का पीला अथवा हरा रंग
प्रश्न 3.
कक्षा की गतिविधि के रूप में बहुत ऊँचाई से लिए गए उत्तर भारत के क्षेत्र के उपग्रह चित्र (चित्र 3.9, पाठ्यपुस्तक पृष्ठ सं. 54 ) का अवलोकन कीजिए और उस पर चर्चा कीजिए-

(i) गंगा के मैदान का रंग कौन-सा है ?
(ii) सफेद रंग किस वस्तु को दर्शा रहा है?
(iii) उपग्रह चित्र के नीचे बाईं ओर भूरे रंग का फैलाव क्या दर्शा रहा है?
उत्तर-
(i) हरा और भूरा
(ii) हिमालय पर्वत
(iii) प्रायद्वीपीय पठार
प्रश्न 4.
क्या आप अपने प्रदेश की नदी के स्रोतों अथवा संगम के कुछ उदाहरण दे सकते हैं जिन्हें किसी समुदाय द्वारा पवित्र स्थल माना जाता है?
उत्तर:
गंगा नदी उत्तर भारत की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नदी है।
स्त्रोत- यह नदी उत्तराखंड राज्य में गंगोत्री हिमनद से निकलती है।
संगम – गंगा नदी का सबसे महत्त्वपूर्ण संगम स्थल प्रयागराज है जहाँ यह यमुना नदी और सरस्वती नदी ( मान्यतानुसार) से मिलती है।
यहाँ प्रत्येक 12 वर्ष बाद कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। यह हिंदू धर्म की आस्था का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
प्रश्न 5.
अपने पास की नदी पर जाइए और वहाँ होने वाली सभी आर्थिक या सांस्कृतिक गतिविधियों का अवलोकन कीजिए। उन्हें लिखकर अपने सहपाठियों के साथ उन पर चर्चा कीजिए। ( पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 55 )
उत्तर:
- दिल्ली में छठ पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएँ यमुना नदी में स्नान करती हैं और सूर्य को जल अर्पण करती हैं।
- दशहरे तथा गणेश पूजा के अवसर पर भी लोग बड़ी संख्या में मूर्तियों को जल में विसर्जित करते हैं।
प्रश्न 6.
भारत के कुछ लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के नाम बताइए। साथ ही पहचानिए कि वे पर्यटन स्थल किस प्रकार के स्थलरूप से संबंधित हैं।
उत्तर:
(i) शिमला – पर्वत स्थलरूप
(ii) दिल्ली – मैदान स्थलरूप
(iii) अमरकंटक – पठार स्थलरूप
IV. एन.सी.ई.आर.टी. प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृष्ठ 58)
प्रश्न 1.
आपका कस्बा या गाँव या नगर किस प्रकार के स्थलरूप पर स्थित है ? इस अध्याय में बताई गई विशेषताओं में से कौन-सी विशेषताएँ आप अपने आस-पास देखते हैं?
उत्तर:
- मेरा कस्बा मैदान स्थलरूप में स्थित है। इस अध्याय में बताई गई निम्नलिखित विशेषताएँ हमें अपने आस-पास दिखाई देती है।
- इस मैदान का निर्माण यमुना नदी द्वारा लाएगए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है।
- समतल भू-भाग होने के कारण यहाँ का मुख्य व्यवसाय कृषि है। गन्ना तथा गेहूँ यहाँ की मुख्य कृषि फसलें हैं। कस्बे के आस-पास सब्जी की खेती भी की जाती है।
- यमुना नदी से निकलने वाली नहरें सिंचाई का मुख्य स्रोत है । भूमिगत जल को पंप से निकालकर भी सिंचाई की जाती है।
- जिसके कारण भूमिगत जलस्तर में गिरावट आई है। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण कृषि भूमि पर दबाव निरंतर बढ़ रहा है।
- कृषि में बढ़ता रसायनिक पदार्थों का उपयोग भू- निम्नीकरण को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही बढ़ती औद्योगिकरण की प्रवृत्ति तथा परिवहन साधनों के फलस्वरूप प्रदूषण के स्तर में भी वृद्धि हो रही है।
प्रश्न 2.
आइए, छोटा नागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा की हमारी आरंभिक यात्रा पर चलें। इस मार्ग में आने वाले तीन स्थलरूपों के बारे में बताइए ।
उत्तर:
यदि हम छोटा नागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा की यात्रा करते हैं तो मार्ग में आने वाले तीन स्थलरूप निम्न प्रकार होंगे-
(i) पठारः छोटा नागपुर का पठार, प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है, जो अपनी खनिज संपदा, प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इस पठार की ऊँचाई 700 मीटर से 1000 मीटर के मध्य है।
- यह पठार मुख्य रूप से झारखंड राज्य में स्थित है। परंतु इसके कुछ भाग पश्चिम बंगाल, ओडिसा, बिहार और छत्तीसगढ़ में भी फैले हुए हैं।
- यहाँ लोहा, कोयला, तांबा, अभ्रक, बाक्साइट और यूरेनियम जैसे खनिज प्रमुखता से पाए जाते हैं।
- दामोदर नदी, स्वर्णरेखा नदी तथा कोमल नदी इस पठार से निकलने वाली महत्त्वपूर्ण नदियाँ हैं।
(ii) मैदान:
- प्रयागराज उत्तर के मैदान में उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक एतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व वाला नगर है।
- गंगा नदी, यमुना नदी और पौराणिक सरस्वती नदी का संगम स्थल होने के कारण प्रयागराज को तीर्थराज (तीर्थों का राजा) भी कहा जाता है।
- प्रत्येक 12 साल में यहाँ कुंभ मेला लगता है, जो विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन हैं।
- प्रयागराज शिक्षा, कृषि, व्यापार, पर्यटन, संगीत, कला और साहित्य का भी प्रमुख केंद्र है।
(iii) पर्वत:
- अल्मोड़ा हिमालय पर्वत श्रेणियों में बसे उत्तराखंड राज्य का एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध नगर है।
- अल्मोड़ा कुँमाऊ मंडल में 1638 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
- पर्यटन, कृषि तथा वन्य उत्पाद यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है।
- यहाँ मुख्यतः आलू, मंडुवा, सेब, आड़ भी उगाए जाते हैं।
- अल्मोड़ा उच्च शिक्षा का भी एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
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प्रश्न 3.
भारत के कुछ प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों की सूची बनाइए । यह भी लिखिए कि वे कौन-से स्थलरूप के अंतर्गत आते हैं?
उत्तर:
भारत के कुछ प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों की सूची निम्न प्रकार है-
| तीर्थ स्थल | स्थलरूप |
| 1. केदारनाथ | पर्वत |
| 2. बद्रीनाथ | पर्वत |
| 3. गंगोत्री | पर्वत |
| 4. यमुनोत्री | पर्वत |
| 5. वैष्णो देवी | पर्वत |
| 6. जागेश्वर महादेव | पर्वत |
| 7. ज्वाला देवी | पर्वत |
| 8. चिंतपूर्णी देवी | पर्वत |
| 9. नयना देवी | पर्वत |
| 10. कांचीपुरम | पठार |
| 11. अमरकंटक | पठार |
| 12. रामेश्वरम | पठार |
| 13. तिरूपति | पठार |
| 14. मदुरै | पठार |
| 15. सबरीमाला | पठार |
| 16. श्रवणबेलगोला | पठार |
| 17. वाराणसी | पठार |
| 18. अयोध्या | मैदान |
| 19. मथुरा-वृन्दावन | मैदान |
| 20. प्रयागराज | मैदान |
| 21. चित्रकूट | मैदान |
| 22. गया | मैदान |
| 23. कुरूक्षेत्र | मैदान |
| 24. पुष्कर | मैदान |
| 25. उज्जैन | मैदान |
| 26. हरिद्वार | मैदान |
| 27. ओमकारेश्वर | मैदान |
| 28. द्वारका | मैदान |
| 29. पुरी | मैदान |
| 30. सोमनाथ | मैदान |
प्रश्न 4.
सही या गलत बताइए –
(i) हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत श्रृंखला है।
(ii) पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए होते हैं।
(iii) पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं।
(iv) भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते हैं।
(v) गंगा, यमुना की सहायक नदी है।
(vi) मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है।
(vii) हिम के पिघलने से नदियों में जल आता
(viii) मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं।
(ix) सभी मरुस्थल गर्म होते हैं।
उत्तर:
(i) गलत
(ii) गलत
(iii) सही
(iv) गलत
(v) गलत
(vi) सही
(vii) सही
(viii) सही
(ix) गलत।
प्रश्न 5.
शब्दों के जोड़े बनाइए-

उत्तर:
| (i) माउंट एवरेस्ट | पर्वतारोहण |
| (ii) राफ्टिंग | नदी |
| (iii) ऊँट | मरुस्थल |
| (iv) पठार | विश्व की छत |
| (v) गंगा का मैदान | धान के खेत |
| (vi) जलमार्ग | गंगा |
| (vii) माउंट किलिमंजारो | अफ्रीका |
| (viii) यमुना | सहायक नदी |