Reading Class 4 Hindi Notes Veena Chapter 10 कैमरा कविता कविता Kaimara Kavita Poem Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Kaimara Kavita Class 4 Summary in Hindi
Kaimara Class 4 Hindi Summary
कैमरा कविता कविता का सारांश – Kaimara Summary in Hindi
प्रस्तुत कविता कैमरे के संबंध में संक्षिप्त जानकारी पर आधारित है। कविता का नन्हा पात्र कैमरे के प्रति उस समय जिज्ञासा प्रकट करता है, जब उसके चाचा उसके लिए कैमरा लेकर आए। उसने उत्सुकतापूर्वक पूछा, चाचा यह क्या है? तब उसके चाचा ने बड़े प्यार से समझाया कि यह एक कैमरा है और उन्होंने कैमरे से नन्हे की फोटो खींचकर उसे दिखाई; जिसे देखकर वह हैरान रह गया क्योंकि वह फोटो तो बिलकुल उसी की ही तरह थी । यह उसके लिए बहुत ही प्रसन्नता का विषय था।
वह जानना चाहता था कि आखिर बिलकुल उसके जैसा चित्र इस छोटे-से कैमरे ने कैसे बना दिया? तब उसके चाचा ने बताया कि यह बिलकुल तुम्हारे जैसा ही चित्र खींच सकता है क्योंकि यह प्रकाश और छाया का खेल है और यह सभी के चित्र बिलकुल उनके जैसे ही उतार सकता है। वर्तमान में भले ही आज के बच्चों ने यह कैमरा ना देखा हो, परंतु वे सभी मोबाइल से फोटो खींचना जानते हैं। बच्चे तरह-तरह के पोज़ बनाकर फोटो खिंचवाते हैं और आनंदित होते हैं।

इस कविता में एक चाचा कैमरे के साथ आते हैं और छोटू की फोटो खींचना चाहते हैं। छोटू सोचता है कि कैमरे के अंदर कोई पेंटर छिपा है, जो तस्वीर बनाता है। लेकिन चाचा उसे हँसकर बताते हैं कि यह कोई पेंटर नहीं, बल्कि रोशनी और छाया (प्रकाश – छाया) का खेल है, जिससे कैमरा तस्वीर खींचता है। कैमरा जो देखता है, उसे ठीक वैसा ही कागज़ पर दिखा देता है। चाहे वह दादी हों, भैया हों या कोई पक्षी – सबकी फोटो एक क्लिक में खिच जाती है। जो जैसा दिखता है, फोटो में भी वैसा ही आता है।
यह कविता हमें यह सिखाती है कि कैमरा एक सच्चा यंत्र है, जो असली चीजों की हू-ब-हू तस्वीर बनाता है। इसलिए हमें इसे अपना दोस्त मानना चाहिए।
कैमरा कविता कविता हिंदी भावार्थ Pdf Class 4
Kaimara सप्रसंग व्याख्या
1. नया कैमरा चाचा लाए,
दरवाजे से ही चिल्लाए –
कहाँ गया, जल्दी आ छोटू,
बैठ यहाँ, खींचूँगा फोटू !
मैं बोला यह क्या है चक्कर,
छिपा हुआ क्या इसमें पेंटर ?
चित्र बनाता बिलकुल वैसा,
मोटा-पतला जो है जैसा ।
शब्दार्थ :
पेंटर – चित्र बनाने वाला।
चक्कर – (काव्य के अनुसार) – मामला |
व्याख्या – कवि कहते हैं कि छोटू के चाचा जी एक कैमरा लेकर आए और घर में घुसते ही उन्होंने छोटू को दरवाजे पर ही आवाज देकर बुलाया और कहा कि जल्दी आकर यहाँ बैठ, मैं तुम्हारी फोटो खींचूँगा । छोटू ने पहली बार कैमरा देखा था। उसने हैरानी से चाचा जी से पूछा कि इस कैमरे के अंदर क्या कोई पेंटर बैठा है जो हम सबके चित्र बिल्कुल हमारे जैसे ही बना देता है मोटा-पतला चाहे कोई कैसा भी हो।

2. हँसकर बोले चाचा — छोटू,
वही रहा बुद्ध का बुद्धू!
है प्रकाश – छाया का खेल,
बना उसी से सुंदर मेल ।
कागज पर आ जाता रूप,
मन कह उठता — क्या ही खूब।
फूलों की सुंदर फुलवारी,
हँसती खिल-खिल क्यारी – क्यारी ।
शब्दार्थ :
बुद्ध – मूर्ख ।
प्रकाश – रोशनी ।
छाया – परछाईं ।
फुलवारी – बगीचा।
व्याख्या – कैमरे के बारे में जानकारी देते हुए कवि कहते हैं कि छोटू के चाचा जी ने उसे बताया कि छोटू तू तो बुद्धू का बुद्धू रहा। इसमें कोई पेंटर नहीं बैठा, बल्कि ये तो प्रकाश और छाया का खेल है और उसी के मेल से सुंदर चित्र बन जाता है। हम जैसे हैं वैसा ही हू-ब-हू चित्र कागज पर आ जाता है। फूलों की सुंदर फुलवारी भी कागज पर उतर आती है और उसकी क्यारी – क्यारी मानो मुस्कुराने लगती है।
3. कोयल, कौआ या गौरैया,
दादी, अम्मा, बड़के भैया ।
क्लिक करते ही खिंच आएँगे,
अपनी छाप दिखा जाएँगे ।
खोटा – खरा जहाँ भी जैसा,
चित्र आएगा बिलकुल वैसा ।
चाहे कह लो इसको नकली,
मात करेगा लेकिन असली।
जैसी शक्ल, हू-ब-हू चित्र,
समझो इसको अपना मित्र !
शब्दार्थ :
गौरैया – चिड़िया ।
बड़के भैया – बड़ा भाई ।
मात करना – हराना ।
खोटा – जिसमें कमी हो ।
खरा – जिसमें कोई कमी ना हो।
हू-ब-हू – बिलकुल सामने वाले जैसा ।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि चाचा जी ने छोटू को कैमरे के बारे में बताते हुए कहा कि ये क्लिक करते ही सबकी फोटो खींच लेता है। कोयल, कौआ, गौरैया, दादी अम्मा या बड़के भैया चाहे कोई भी हो ये सबकी छाप बिलकुल उनके जैसी ही कागज पर उतार देता है। इसके खींचे चित्र बिलकुल असली की तरह होते हैं। खोटा – खरा अर्थात अच्छा-बुरा चाहे कोई कैसा भी हो ये बिलकुल उसके जैसा ही चित्र कागज पर उतार देता है, जो नकली होकर भी असली को मात करने लगता है। ये सबकी शक्ल जैसा ही चित्र खींच देता है, इसलिए इसे तुम अपना मित्र ही समझो।
काव्यांश 1
नया कैमरा चाचा लाए,
दरवाज़े से ही चिल्लाए-
कहाँ गया, जल्दी आ छोटू,
बैठ यहाँ, खींचूँगा फोटू !
मैं बोला – यह क्या है चक्कर,
छिपा हुआ क्या इसमें पेंटर ?
चित्र बनाता बिलकुल वैसा,
मोटा-पतला जो है जैसा ।
शब्दार्थ :
कैमरा – फोटो खींचने वाली मशीन;
चिल्लाए – जोर से आवाज लगाई;
चित्र – फोटो या तस्वीर;
पेंटर – चित्र बनाने वाला व्यक्ति ।
संदर्भ / प्रसंग – यह काव्यांश ‘कैमरा’ कविता से लिया गया है, जिसके रचयिता ‘प्रकाश मनु’ हैं। यह कविता कक्षा 4 की पाठ्यपुस्तक वीणा में शामिल है। प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने उस समय की बात कही है, जब चाचा एक नया कैमरा लाते हैं और होकर छोटू को बुलाते हैं, ताकि उसकी फोटो खींच सकें।
व्याख्या – प्रस्तुत काव्यांश में कवि कहता है कि चाचा एक नया कैमरा लेकर आते हैं और जैसे ही दरवाज़े पर पहुँचते हैं, ज़ोर से आवाज लगाते हैं- “छोटू कहाँ है, जल्दी आओ, मैं तुम्हारी फोटो खींचूँगा !” छोटू बहुत हैरान होता है और सोचता है कि यह कैसी मशीन है, क्या इसके अंदर कोई पेंटर छिपा है, जो तस्वीर बनाता है? क्योंकि यह कैमरा किसी भी चीज की तस्वीर बिल्कुल वैसी ही बना देता है जैसी वह असल में है-मोटा हो या पतला, जैसा भी हो। इस काव्यांश में कवि ने बच्चों की सोच और सवालों को बहुत सुंदर ढंग से दिखाया है और यह भी बताया है कि विज्ञान की चीजें बच्चों को कितनी रोचक लगती हैं।

काव्यांश 2
हँसकर बोले चाचा- छोटू,
वही रहा बुद्ध का बुद्ध !
है प्रकाश छाया का खेल,
बना उसी से सुंदर मेला
कागज पर आ जाता रूप,
मन कह उठता – क्या ही खूब!
फूलों की सुंदर फूलवारी,
हँसती खिल-खिल क्यारी- क्यारी ।
शब्दार्थ :
प्रकाश – रोशनी
छाया – अँधेरा या परछाई
मेल – एक साथ मिलना;
फूलवारी – फूलों का बगीचा;
क्यारी – फूल या पौधे लगाने की छोटी जगह।
प्रसंग – इस काव्यांश में चाचा छोटू को समझाते हैं कि कैमरा कैसे काम करता है और उसकी विशेषता क्या है।
व्याख्या – जब छोटू ने पूछा कि कैमरा कैसे तस्वीर बनाता है, तो चाचा हँसते हुए बोले कि छोटू तो अभी भी नहीं समझा। चाचा ने कहा कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकाश (रोपनी) और छाया का खेल है। इन्हीं के मेल से कैमरा तस्वीर बनाता है। जब किसी चीज की फोटो ली जाती है, तो उसका रूप (शक्ल-सूरत) कागज पर आ जाता है। वह तस्वीर इतनी सुंदर लगती है कि मन कह उठता है- “वाह! क्या हा अच्छी फोटो है।” चाचा कहते हैं कि जैसे फूलों की बगिया (फूलवारी) सुंदर लगती हैं और फूलों की क्यारी हँसती-खिलखिलाती हैं, वैसे ही कैमरा भी हर चीज को सुंदर तरीके से पकड़ लेता है।
काव्यांश 3
कोयल, कौआ या गौरैया,
दादी, अम्मा, बड़के भैया ।
क्लिक करते ही खिंच आएँगे,
अपनी छाप दिखा जाएँगे।
खोटा – खरा जहाँ भी जैसा,
चित्र आएगा बिल्कुल वैसा ।
चाहे कह लो इसको नकली,
मात करेगा लेकिन असली ।
जैसी शक्ल, हू-ब-हू चित्र,
समझो इसको अपना मित्र !
शब्दार्थ :
गौरैया – एक छोटी चिड़िया;
खोटा-खरा-गलत-सही या जैसा भी हो;
नकली – असली जैसा दिखने वाला पर असली नहीं;
मात करना – पीछे छोड़ देना, बेहतर होना;
हू-ब-हू – बिल्कुल वैसा ही; पूरी तरह समान;
मित्र – दोस्त:
छाप – असर, प्रभाव या पहचान।
प्रसंग – इस काव्यांश में चाचा यह समझा रहे हैं कि कैमरा किसी भी चीज की फोटो कैसे खींचता है और वह फोटो कितनी सच्ची होती है।
व्याख्या – चाचा कहते हैं कि चाहे कोयल, कौआ, गौरैया जैसे पक्षी हों या फिर दादी अम्मा और बड़े भैया कैमरे से उनकी फोटो एक क्लिक में खींची जा सकती है। जैसे ही फोटो खींची जाती है, वह सब की असली छवि (छाप) दिखा देता है। चाहे कोई अच्छा हो या बुरा, जैसा भी हो, कैमरा उसकी सच्ची तस्वीर बनाता है। लोग इसे नकली चित्र कह सकते हैं, क्योंकि यह हाथ से नहीं बनाया गया, लेकिन यह असली को भी पीछे छोड़ सकता है। आखिर में चाचा कहते हैं कि कैमरे से जो तस्वीर बनती है, वह हमारी असली शक्ल जैसी होती है। इसलिए कैमरे को अपना मित्र समझना चाहिए, क्योंकि यह सच्चाई को दिखाता है।