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NCERT Class 8th Hindi Chapter 4 हरिद्वार Question Answer
हरिद्वार Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 4 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi हरिद्वार Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए । कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?
- लेखक के अनुसार सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
- लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
- लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
- लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।
उत्तर:
- लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
प्रश्न 2.
“वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है ?
- शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
- आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
- सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम
उत्तर:
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
प्रश्न 3.
“पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था ” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?
- संतुष्टि में सुख होता है।
- सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
- लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी ।
- पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है।
उत्तर:
- संतुष्टि में सुख होता है।

प्रश्न 4.
“एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया ।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
- अंधविश्वास और लालच
- मानवता और देशप्रेम
- सादगी और आत्मनिर्भरता
- स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
उत्तर:
- सादगी और आत्मनिर्भरता
- स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
प्रश्न 5.
लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?
- राजनीतिक
- आध्यात्मिक
- सामाजिक
- प्राकृतिक
उत्तर:
- आध्यात्मिक
- प्राकृतिक
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प्रश्न 6.
पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?
- कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
- मुहावरों का अधिक प्रयोग
- सरलता और चित्रात्मकता
- जटिलता और संक्षिप्तता
उत्तर:
- जटिलता और संक्षिप्तता

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
- मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि पाठ में लेखक ने फलदार वृक्षों की तुलना सज्जन व्यक्तियों से की है। फलदार वृक्ष भी सज्जन व्यक्ति की तरह हमेशा उदारता दिखाते हैं। वे पत्थर मारने पर भी फल देते हैं।
- इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि हरिद्वार में लेखक को मानसिक और आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। इसी के कारण वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।
- इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि लेखक द्वारा हरिद्वार में पत्थर पर रखकर भोजन करने के सुख को सोने की थाल से बढ़कर कहा गया क्योंकि उस भोजन को करने पर उन्हें जो संतुष्टि और सुख मिला था, वह और कहीं नहीं मिला। इस संतुष्टि में अपूर्व सुख व्याप्त था।
- इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि लेखक द्वारा गंगा के तट पर खाना बनाकर पत्थर पर ही रखकर उसे खाया गया। इस संदर्भ में सादगी और… आत्मनिर्भरता के साथ स्वच्छता और प्रकृति प्रेम का भाव व्यक्त होता है, क्योंकि इसमें दिखावा न होकर सादगी थी।
- इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि लेखक का हरिद्वार का अनुभव मुख्य रूप से आध्यात्मिक और प्राकृतिक था क्योंकि उन्हें वहाँ मानसिक शांति और प्रकृति का प्रेम मिला था।
- इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे गए इस पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण कठिन शब्दों के प्रयोग द्वारा विस्तृत विवरण को संक्षिप्त किया गया है। इस कारण इसमें जटिलता और संक्षिप्तता का समावेश हो गया है।
मिलकर करें चयन
पाठ से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आपस में चर्चा कीजिए और इनके उपयुक्त संदर्भों से इनका मिलान कीजिए—

उत्तर:
1. – 3
2. – 5
3. – 6
4. – 1
5. – 2
6. – 4
मिलकर करें चयन
• पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं – एक सही और एक भ्रामक । अपने समूह में इन पर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।

उत्तर:
| पंक्ति | निष्कर्ष |
| 1. पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है। |
|
| 2. बड़े – बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं। |
|
| 3. इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं। |
|
| 4. जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है। |
|
| 5. एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया। |
|
| 6. निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा। |
|
पंक्तियों पर चर्चा
• पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
उत्तर:
हरिद्वार एक ऐसी अनोखी पुण्यभूमि है कि यहाँ जन्मी कुशा भी अपूर्व और सुगंधमय है। उसमें से दालचीनी और जावित्री की अच्छी सुगंध आती है, जिससे यह परिलक्षित होता है कि यह स्थान अद्भुत और पवित्र है, जिसका कण-कण स्वयं में सुगंधित है।
(ख) “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं । फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
उत्तर:
यहाँ लेखक ने इस पुण्य धरा के पर्वत और वृक्षों की उदारता को देखकर इनके जन्म को धन्य कहा है जो सभी की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। ये सबको फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़ तो प्रदान करते ही हैं, अपितु जलने के बाद भी कोयले और राख तक से लोगों के मनोरथ को पूरा करते हैं।
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सोच-विचार के लिए

• पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए ।
(क) “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…”
लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है? कब-कब ?
(संकेत- किसी स्थान से लौटने के बाद भी उसी के विषय में सोचते रहना)
उत्तर:
लेखक का यह वाक्य दर्शाता है कि वह शरीर से तो वहाँ से वापस लौट आए हैं लेकिन उनका मन अभी भी वहीं रहता है। हाँ, मैंने भी ऐसा अनुभव किया है। जब हम ग्रीष्म अवकाश में अपने ननिहाल जाते हैं तो वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और सादगी का दृश्य मन में बस जाता है वहाँ से वापस आने का मन नहीं करता। हम सब तो वापस लौट आते हैं, परंतु मन वहीं रह जाता है।
(ख) “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।”
लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है? क्या अब भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए ।
उत्तर:
आज के समाज में यह कथन आंशिक रूप से सच है। आजकल तीर्थ-स्थलों पर इस प्रकार की प्रवृत्ति कम पाई जाती है। हाँ, अब भी ऐसे लोग मिलते हैं लेकिन उनकी संख्या पहले से कम हो गई है। उदाहरण के लिए, गाँव में आज भी कई बुजुर्ग और किसान ऐसे हैं जो अपनी सादगी और संतोष के लिए जाने जाते हैं। वे अपनी छोटी-सी आय में भी खुश रहते हैं और प्रकृति के करीब रहते हुए जीवन का आनंद लेते हैं। लोगों में लोभ और धन की इच्छा प्रबल है, लेकिन कुछ लोग अभी भी एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं और उसमें संतुष्ट हो जाते हैं। वे संताषी स्वभाव के होते हैं और बहुत अधिक धन-संपदा की अपेक्षा नहीं करते।
(ग) “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है ।” आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है? उस स्थान में कौन-कौन सी विशेषताएँ होंगी जो उसे ‘टिकने योग्य’ बनाती होंगी?
(संकेत- केवल आराम, सुविधा या कोई और कारण भी)
उत्तर:
लेखक ने उस स्थान को टिकने योग्य इसलिए कहा है क्योंकि वहाँ आराम और सुविधाओं के साथ-साथ चारों ओर से शीतल पवन आती थी और वहाँ लोग भी धार्मिक प्रवृत्ति के ही थे। लेखक ने दिन में श्री भागवत का पाठ भी किया। लेखक वहाँ बड़े ही आनंद से रह रहे थे। वह स्थान लेखक की ज़रूरतों और अपेक्षाओं को पूरा करता था ।
(घ) “ फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं ।”
इस वाक्य के माध्यम से आपको वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझ रही हैं?
उत्तर:
यह वाक्य वृक्षों के अत्यंत परोपकारी स्वभाव और उनके समग्र महत्व को दर्शाता है, जो जीवन के हर पहलू में हमारे लिए अत्यंत लाभकारी है। वृक्ष अत्यंत परोपकारी होते हैं। वे अपने संपूर्ण जीवनकाल में निःस्वार्थ भाव से अपना सर्वस्व अर्पित कर देते हैं। उनकी एक – एक चीज़ समस्त जीवों के लिए उपयोगी होती हैं; जैसे- फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी, जड़, कोयला और राख आदि। वृक्ष जैसा उदार कोई नहीं हो सकता। ये प्रकृति की अमूल्य निधि हैं।
अनुमान और कल्पना से

(क) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।”
कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में है। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?
उत्तर:
मैं हरिद्वार में प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेता। वहाँ के पहाड़ों और मंदिरों को देखने जाता । पवित्र गंगा नदी में स्नान करता और गंगा जी की संध्या आरती में शामिल होता। वहाँ की प्रकृति में अपना समय बिताता। मैं वहाँ के आस-पास के मंदिरों, जैसे मनसा देवी और चंडी देवी के दर्शन करता।
(ख) “जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे।”
कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर:
गंगा जी के तट पर ठंडे-ठंडे जल के छींटे मेरे मुँह पर आते हैं जो कि मेरे शरीर के कण-कण को शीतलता प्रदान करते हैं। मेरे तन और मन को अपार सुख और शांति की अनुभूति कराते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे गंगा माँ मुझे अपने पास बुला रही हैं। वह अनुभव मुझे प्रकृति के करीब और मन को शांत महसूस कराता है।
(ग) “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।”
यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा ?
उत्तर:
यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो धरती पर जीवन ही असंभव हो जाएगा। संपूर्ण जगत का संतुलन बिगड़ जाएगा। मनुष्य पेड़-पौधे जैसा उदार नहीं हैं कि बिना स्वार्थ के अपना सर्वस्व न्योछावर करें। यदि पेड़-पौधे स्वार्थी हो गए तो हमारे समक्ष भोजन की समस्या खड़ी हो जाएगी। पेड़-पौधों के अभाव में ऑक्सीजन की कमी से हमारा जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा।
(घ) “यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं- एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी के ही नाम से । ” इस पाठ में ‘गंगा’ शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?
उत्तर:
पाठ में गंगा शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाना सम्मान श्रद्धा और पवित्रता को दर्शाता है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि गंगा कोई सामान्य नदी नहीं है। यह भारत की धार्मिक-आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक आस्था एवं विश्वास का प्रतीक पवित्र पावन नदी है जो पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या के फलस्वरूप पृथ्वी लोक पर प्रकट हुई है। लेखक के लिए गंगा पूजनीय और नमनीय नदी है। इसलिए इन्हें सम्मान सूचक ‘श्री’ और ‘जी’ के साथ संबोधित किया जाता है। यह साक्षात् देवी स्वरूपा और मोक्षदायिनी है।
(ङ) कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए ।
उत्तर:
एक श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए हरिद्वार की यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं-
- उन्हें हर चीज़ को महसूस करने में मदद करेंगे, जैसे हर की पौड़ी पर आरती के समय भक्तों की भीड़ और पुजारी की गतिविधियों का वर्णन करना ।
- उनके साथ तस्वीरें लेंगे ताकि वे अपनी यादें सँजो सकें।
- हमेशा उनके सामने खड़े होकर धीरे, छोटे और सरल वाक्य बोलेंगे।
- उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान करेंगे भीड़भाड़ वाली जगहों या सीढ़ियों पर उनका पूरा ध्यान रखेंगे ।
लिखें सवाद

(क) “मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।”
लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
उत्तर:
लेखक – कल्लू जी, हरिद्वार की यह यात्रा सचमुच अद्भुत है! गंगा का यह नज़ारा मन मोह लेता है।
कल्लू जी – आपने सही कहा । यहाँ आकर मन को बड़ी शांति मिलती है।
लेखक – इस पवित्र वातावरण के हर कोने में एक कहानी छिपी है।
कल्लू जी – यहाँ आपको लिखने के लिए, हर जगह कुछ-न-कुछ विषय मिल ही जाता है।
लेखक – बिलकुल! आपके संग यह यात्रा और भी सुखद हो गई है।
(ख) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है ।”
लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए – जैसे पर्वत बोल रहे हों।
उत्तर:
लेखक – हे प्रकृति, इन पर्वतों की शांति में क्या छिपा है।
प्रकृति (पर्वत) – (धीमी आवाज़ में) मैं वही भूमि हूँ जो तीन ओर से हरे-भरे, सुंदर पर्वतों से घिरी है।
लेखक – तो क्या तुम बोल सकती हो?
प्रकृति – मैं हमेशा से बोलती हूँ। मेरे अंदर ज्ञान, लाखों जीवों का जीवन और कई कहानियाँ, समाई हैं। मेरी नदियाँ और झरने गीत गाते हैं और हवाएँ फुसफुसाती हैं, लेकिन तुम सब मुझे सिर्फ़ देखने आते हो सुनने नहीं।
लेखक – अद्भुत! मुझे क्षमा करना प्रकृति, अब से मैं तुम्हें देखने के साथ सुनने भी आया – कँरूँगा।
‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
- विशेष आश्चर्य का विषय यह है कि यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं।
- यों तो वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैं।
आप जानते ही हैं कि एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘है’ का प्रयोग किया जाता है और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का। सोचिए, ‘गंगा’ शब्द एकवचन है, फिर भी इसके साथ ‘हैं’ क्यों लिखा गया है ?
इसका कारण यह है कि कभी-कभी हम आदर-सम्मान प्रदर्शित करने के लिए एकवचन संज्ञा शब्दों को भी बहुवचन के रूप में प्रयोग करते हैं।
इसे ‘आदरार्थ बहुवचन’ प्रयोग कहते हैं। उदाहरण के लिए-
- मेरे पिता जी सो रहे हैं।
- भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं।
- अब ‘आदरार्थ बहुवचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

प्रश्न 1.
प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं ………….., वे अभी सभा में उपस्थित ………….।
उत्तर:
हैं, हैं
प्रश्न 2.
माता – पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते …………… हमें, उनका कहना मानना चाहिए।
उत्तर:
हैं
प्रश्न 3.
मेरी बहन बाज़ार जा रही ……….. वहाँ से किताबें ले आएगी।
उत्तर:
है
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प्रश्न 4.
बाहर फेरीवाला …………. ………….। ……….. बुला लाओ
उत्तर:
आया, है, उसे
प्रश्न 5.
डाकिया जी आए …………..। उन्हें भी बुला लाओ।
उत्तर:
हैं
प्रश्न 6.
आप तो बहुत दिन बाद …………. ……….. का स्वागत है।
उत्तर:
आए, आप
प्रश्न 7.
डॉक्टर साहब बहुत विद्वान …………, ………….. से परामर्श लेना चाहिए ।
उत्तर:
हैं, उन
प्रश्न 8.
आपके माता-पिता कहाँ ……….. ? क्यो मैं ………. से मिल से सकता हूँ?
उत्तर:
हैं, उन
प्रश्न 9.
ये हमारे हिंदी के अध्यापक ………, हम ……….. से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
उत्तर:
हैं, इन
प्रश्न 10.
बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर ……………… ………..।
उत्तर:
रहा, है
भावों की पहचान

• नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। सोचिए कि इनमें कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है? पहचानिए और चुनकर लिखिए-
प्रश्न 1.
उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था ।
उत्तर:
संतोष
प्रश्न 2.
चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।
उत्तर:
वैराग्य, भक्ति, शांति
प्रश्न 3.
पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।
उत्तर:
संतोष, आश्चर्य
प्रश्न 4.
हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी ।
उत्तर:
प्रेम, शांति
प्रश्न 5.
सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
उत्तर:
परोपकार, करुणा

काल की पहचान
• “यहाँ हरि की पैड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है।”
• आप जानते ही होंगे कि काल के तीन भेद होते हैं- भूत काल, वर्तमान काल और भविष्य काल । परस्पर चर्चा करके पता लगाइए कि ऊपर दिए गए वाक्य में कौन- -सा काल प्रदर्शित हो रहा है? सही पहचाना, यह वाक्य वर्तमान काल को प्रदर्शित कर रहा है।
(क) नीचे दी गई पाठ की इन पंक्तियों को पढ़कर बताइए, इनमें क्रिया कौन-से काल को प्रदर्शित कर रही है? (भूत काल / / वर्तमान / भविष्य)
- निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा । ……………………..
- यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है। ……………………..
- वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं। ……………………..
- चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था । ……………………..
- मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था । ……………………..
उत्तर:
- निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा । भविष्य काल
- यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है। वर्तमान काल
- वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं। वर्तमान काल
- चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था । भूत काल
- मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था । भूत काल
(ख) अब इन वाक्यों के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए और नए वाक्य बनाइए ।
उत्तर:
- वर्तमान काल – निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दें।
भूत काल – निश्चित था कि आप इस पत्र को स्थानदान देते। - भूत काल – यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी थी।
भविष्य काल – यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी होगी। - भूत काल – वृक्ष ऐसे थे कि पत्थर मारने से फल देते थे।
भविष्य काल – वृक्ष ऐसे होंगे कि पत्थर मारने से फल देंगे। - भविष्य काल – चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।
वर्तमान काल – चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होगा । - भविष्य काल – मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिकूँगा।
वर्तमान काल – मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका हूँ।
पत्र की रचना
- “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…”
- इस पंक्ति में लेखक संपादक महोदय को संबोधित करके अपनी बात लिख रहे हैं। आप जानते ही होंगे कि पत्र जिस व्यक्ति के लिए लिखा जाता है, उसे संबोधित किया जाता है। पत्र के अंत में अपना नाम लिखा जाता है ताकि पत्र पाने वाले को पता चल सके कि पत्र किसने लिखा है।

नीचे इस पत्र की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं से जुड़े वाक्यों से इनका मिलान कीजिए-

आप एक विशेषता को एक से अधिक वाक्यों से भी जोड़ सकते हैं।
उत्तर:
| पत्र से उदाहरण | पत्र की विशेषताएँ |
| 1. व्यक्तिपरकता पत्र लेखन में लेखक के विचार, अनुभव और भावनाएँ प्रमुख होते हैं। | मुझे हरिद्वार का समाचार लिखने में बड़ा आनंद होता है… |
| 2. संवादात्मकता- पत्र संवाद का रूप है; पाठक से सीधा संवाद होता है। | और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ… |
| 3. स्वाभाविक शैली- भाषा कृत्रिम नहीं होती; भावनाओं के अनुरूप होती है। | एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके….. |
| 4. व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन जहाँ लेखक अपने वास्तविक अनुभव को साझा करता है। | ‘ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया…. |
| 5. अभिवादन या संबोधन- पत्र का आरंभ, जिसमें संबोधित व्यक्ति को आदरपूर्वक संबोधित किया जाता है। | श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु ! |
| 6. हस्ताक्षर – लेखक अपने नाम या संबंध से पत्र को समाप्त करता है। | आपका मित्र – यात्री |
| 7. उपसंहार और निवेदन लेखक पत्र समाप्त करता है और अपनी इच्छा या निवेदन प्रकट करता है। | और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ… निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा । |
| 8. मुख्य विषय – वस्तु | हरिद्वार की प्राकृतिक सुदंरता, धार्मिकता, साधु-संन्यासियों का जीवन, नदी, पर्वत, जल, गंगा स्नान आदि का अत्यंत विस्तार से वर्णन । जैसे- “ यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है…” |
पत्र
• आपने जो यात्रा-वर्णन पढ़ा है, इसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक संपादक को पत्र के रूप में लिखकर भेजा था। आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए |
उत्तर:
प्रिय मित्र अमन,
कैसे हो तुम? मुझे उम्मीद है कि तुम ठीक होगे। मैं तुम्हें अपनी हाल की ही केदारनाथ यात्रा के बारे में बताने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। कुछ हफ़्ते पहले मैंने केदारनाथ की यात्रा की और यह सचमुच मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव था। यह सिर्फ़ एक यात्रा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक और रोमांचक सफ़र था। हरिद्वार से हम सोनप्रयाग होते हुए गौरीकुंड तक टैक्सी से गए।
गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक का रास्ता काफ़ी चुनौतीपूर्ण था परंतु प्राकृतिक दृश्य अद्भुत थे। पहाड़ बर्फ़ से ढके हुए थे। हवा में पवित्रता थी । जैसे-जैसे हम ऊपर चढ़ते गए, मौसम ठंडा होता गया। मंदिर परिसर में पहुँचकर हमें बहुत अच्छा लगा। इतनी ऊँचाई पर इस तरह के एक प्राचीन मंदिर को देखना विस्मयकारी था। हमने बाबा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। वहाँ की शांति और सुंदरता अद्भुत है। यदि तुम्हें कभी मौका मिले, तो मैं तुझे केदारनाथ जाने की सलाह दूँगा, जिसे तुम कभी नहीं भूलोगे ।
मुझे जल्द ही जवाब देना और अपने बारे में बताना।
तुम्हारा मित्र
अगम
शब्द से जुड़े शब्द
• नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘हरिद्वार’ से जुड़े शब्द अपने मन से या पाठ से चुनकर लिखिए-

उत्तर:

लेखन के अनोखे तरीके
(क) “हरिद्वार’ पाठ में लेखक ने हरिद्वार के अपने अनुभवों को बहुत ही साहित्यिक और कल्पनाशील भाषा में प्रस्तुत किया है जिसमें कई स्थानों पर उन्होंने तुलनात्मक वाक्यों के माध्यम से दृश्यों का वर्णन किया है। जैसे- हरी-भरी लताओं की तुलना सज्जनों से इस प्रकार की गई है-
“ पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।”
नीचे कुछ तुलनात्मक वाक्य दिए गए हैं । पाठ में ढूँढ़िए कि इन तुलनात्मक वाक्यों को लेखक ने किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा है यानी विशिष्टता प्रदान की है ?

प्रश्न 1.
वृक्षों की तुलना साधुओं से की गई है।
उत्तर:
बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।
प्रश्न 2.
गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से की गई है।
उत्तर:
जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।
प्रश्न 3.
हरियाली की तुलना गलीचे से की गई है।
उत्तर:
वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दिखाई पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।
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प्रश्न 4.
नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश (कीर्ति ) से की गई है।
उत्तर:
एक ओर त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता- सी दिखाई देती है।
(ख) “मैं उस पुण्य भूमि का वर्णन करता हूँ जहाँ प्रवेश करने ही से मन शुद्ध हो जाता है ।”
“पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।”
उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यान से देखिए, ये आज की हिंदी की तरह नहीं लिखी गई हैं। इसे लेखक ने न केवल अपनी शैली में लिखा है, अपितु इसमें प्राचीन हिंदी भाषा की छवि भी दिखाई देती है। नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं आप इन्हें आज की हिंदी में लिखिए ।
प्रश्न 1.
“ इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।”
उत्तर:
इन पेड़ों पर अनेक रंग-बिरंगे पक्षी चहचहाते हैं और शहर के दुष्ट शिकारियों से बिना भय के चहचहाते और विचरण करते हैं।
प्रश्न 2.
“वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी ।”
उत्तर:
वर्षा के कारण चारों ओर इतनी हरियाली छा गई थी कि ऐसा लग रहा था मानो यात्रियों के लिए कोई सुंदर बिछौना— बिछा दिया गया हो ।
प्रश्न 3.
“यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं ।”
उत्तर:
यह ऐसा अनोखा तीर्थ है जहाँ इच्छा और क्रोध वाले मनुष्य रहते ही नहीं हैं।
प्रश्न 4.
‘मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।”
उत्तर:
मेरा मन वहाँ जाते ही इतना प्रसन्न और निर्मल हुआ कि इसके बारे में बताना असंभव है।
प्रश्न 5.
“यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया ।”
उत्तर:
यहाँ रात में ग्रहण लगा और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पाठ भी किया।
प्रश्न 6.
“उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था ।”
उत्तर:
उस समय पत्थर पर किया साधारण भोजन भी सोने की थाली में परोसे गए भोजन से कहीं श्रेष्ठ था।
प्रश्न 7.
“निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा ।”
उत्तर:
निश्चत रूप से आप इस पत्र को सुरक्षित रखिएगा।
(ग) इस रचना में हरिश्चंद्र जी ने कहीं-कहीं प्राचीन वर्तनी का प्रयोग किया है, जैसे- शिखर के लिए शिषर, यात्रियों के लिए जात्रियों । ऐसे शब्दों की सूची बनाइए । आप इन शब्दों को कैसे लिखते हैं? कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
- घाम – धूप
- अर्थी – याचक
- खानि (खान) – स्त्रोत, भंडार
- मनोर्थ – मनोरथ
- कनो – कणों
(अन्य शब्दों पर विद्यार्थी स्वयं चर्चा करें।)
पाठ से आगे
आपकी बात

(क) “मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके… भोजन किया।” क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था ?
उत्तर:
हाँ, मैंने खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है। यह अनुभव घर पर खाने से बहुत अलग था। खुले आकाश के नीचे भोजन ग्रहण करने से ताज़ी हवा मिलती है, प्रकृति की सुंदरता मन को मोह लेती है और भोजन का स्वाद भी बेहतर लगता है। घर की तुलना में यह एक शांतिपूर्ण और अनूठा अनुभव होता है।
(ख) “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था ।”
आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए |
उत्तर:
हाँ, मेरे जीवन में ऐसा क्षण आया है। एक बार मुझे बहुत भूख लगी थी परंतु उस दिन मैं विद्यालय में विलंब होने के कारण भोजन नहीं लाया था और न ही मेरे पास पैसे थे। फिर मुझे अपने बैग में एक साधारण-सा बिस्किट का पैकेट मिला। जिसे खाकर मेरी भूख शांत हुई और मुझे गहरे सुख की अनुभूति हुई। कभी-कभी मनुष्यों को महँगी और मनचाही वस्तुएँ ही नहीं अपितु साधारण – सी ज़रूरी चीज़ भी गहरा सुख दे जाती है।
(ग) “हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी ।”
आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो? उस स्थान की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं ?
उत्तर:
मुझे पहाड़ों में, नदियों और झरनों के पास पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है। मैं केदारनाथ गया था जहाँ मेरा मन पूरी तरी शांत हो गया । वहाँ की सादगी और पहाड़ों का सौंदर्य अद्भुत था। वहाँ किसी प्रकार का कोई शोर नहीं था, बस प्रकृति की अपनी धुन थी । इस स्थान की यही बातें मुझे अच्छी लगी।
(घ) पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष “फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।” क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं ?
उत्तर:
हाँ, मेरे जीवन में एक पुराना आम का पेड़ है जिससे मेरा विशेष जुड़ाव है। यह पेड़ मेरे नाना-नानी के घर के आँगन में है और हम हर साल ग्रीष्म अवकाश में वहाँ रहने जाते हैं। इसकी छाँव में खेलते और बैठते हैं। इसके मीठे-मीठे आम खाते हैं और इसकी डालियों पर रस्सी लटकाकर झूला भी झूलते हैं। ये मेरे जीवन की सबसे सुखद यादें हैं।
प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण

• “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है…” आपने पत्र में पढ़ा कि हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इस सौंदर्य को बनाए रखने में प्रत्येक मानव की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विषय में अपने समूह में चर्चा कीजिए। इसके विषय अपने समूह के साथ मिलकर “ तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो !” विषय पर जन-जागरूकता पोस्टर बनाइए ।
उत्तर:
विद्यार्थी दिए गए विषय पर अपने समूह में चर्चा करें तथा स्वयं पोस्टर बनाएँ।
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स्वास्थ्य और योग
• चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था ।”
अनेक लोग आज भी मन की शांति, स्वास्थ्य – लाभ और भक्ति के लिए तीर्थ और पर्वतीय स्थानों की यात्रा करते हैं। मन की शांति और स्वास्थ्य के लिए हमारे देश में हज़ारों वर्षों से योग भी किया जाता रहा है।
(क) 5 मिनट ध्यान लगाकर या मौन बैठकर अपने आस-पास की ध्वनियों को सुनिए, अपनी श्वास पर ध्यान दीजिए तथा ध्यान को केंद्रित करने का प्रयास कीजिए। इस अनुभव के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं के अनुभव के आधार पर अनुच्छेद लिख सकते हैं क्योंकि सबके अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं।
(ख) अंतरर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अपने विद्यालय के कार्यक्रमों को बताने के लिए एक सूचना लिखिए जिसे सूचना – पट पर लगाया जा सके।
उत्तर:
महात्मा गांधी उच्च विद्यालय, दिल्ली
उत्कर्ष योगा संस्थान
दिनांक : 20/06/20XX (समस्त विद्यालय परिवार)
सूचना
विषय – विश्व योगा दिवस के संदर्भ में सभी छात्रों एवं शिक्षकों को सूचित किया जाता है कि कल दिनांक 21/06/20XX को प्रातः 7 बजे विद्यालय परिसर में अंतर्राष्टीय योग दिवस पर योग का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। आप सभी की उपस्थिति अपेक्षित है।
अमर सिंह (प्राचार्य)
सज्जन वृक्ष

सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
आप जानते ही हैं कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। किंतु हमारे ही कार्यों के कारण कम होते जा रहे हैं। आइए, पेड़-पौधों को अपना मित्र बनाएँ।
(क) एक पौधा लगाइए और उसकी देखभाल कीजिए ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके। उसे एक नाम दीजिए और उसका मित्र बनिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें
(ख) उसके बारे में अपनी दैनंदिनी में नियमित रूप से लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें
अपने शब्द

“शीतल वायु… स्पर्श ही से पावन करता हुआ संचार करता है।”
आइए, एक रोचक गतिविधि करते हैं। ‘शीतल’ शब्द को केंद्र में रखिए और उसके चारों ओर ये चार बातें लिखिए-

उत्तर:

• अब इसी प्रकार आपके समूह का प्रत्येक सदस्य इस पत्र से एक-एक शब्द चुनकर उसके लिए ऐसा ही शब्द-चित्र बनाएँ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
यात्रा के व्यय की गणना
• इस पत्र में अपने हरिद्वार की एक यात्रा का वर्णन पढ़ा है। मान लीजिए कि आपको अपने मित्रों या अभिभावकों के साथ अपनी रुचि के किसी स्थान की यात्रा करनी
है। उस स्थान को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको ₹1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
उत्तर:
विवरण – व्यय
स्थान – मनाली
बजट – 1000
बस का किराया – 400 ₹ (आना-जाना)
खाना – 400 ₹ (दोपहर + रात)
बचत – 200 ₹ (अन्य)
(ख) मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेगे और क्यों?
(संकेत- सोचिए, क्या वह आवश्यक है? बजट कैसे संभालेंगे?)
उत्तर:
मनाली में लकड़ी के हस्तशिल्प मिलते है । मैं वहाँ से एक छोटा लकड़ी का स्मृति चिह्न खरीदूँगा । उसे अपने घर में सजाऊँगा, जिससे यात्रा की यादें ताज़ा होंगी। यह आसानी से मेरे बजट में आ जाएगा।
(छात्र स्वयं के अनुभव के आधार पर लिख सकते हैं ।)
यात्रा सबके लिए
(क) कल्पना कीजिए कि कुछ मित्रों का समूह एक यात्रा पर जा रहा है। आप एक मार्गदर्शक या टूरिस्ट गाइड हैं। आप इन सबकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे ?

(चित्र के लिए पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या 60 देखें)
उपर्युक्त चित्र में सबकी अलग-अलग आवश्यकताएँ हो सकती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए सोचिए कि वहाँ पहुँचने, घूमने, भोजन आदि में आप कैसे सहायता करेंगे?
उत्तर:
उपर्युक्त चित्र में दिखाए गए विविध लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, मैं निम्नलिखित तरीकों से उनकी सहायता करूँगा–
- असमर्थ या कमज़ोर लोगों वे लिए पहुँचने और घूमने में सहायता – मैं उनके लिए रैंप खोजने या लिफ्ट तक पहुँचने में मदद करूँगा और उनकी व्हीलचेयर धकेलने में भी सहायता करूँगा।
बुजुर्गों के लिए – यदि वे धीरे चल रहे हैं तो मैं भी उनके साथ धीरे चलूँगा और यदि वे थककर कहीं थोड़ी देर विश्राम करना चाहेंगे, तो मैं उनके लिए उचित स्थान ढूँढ़ेगा।
बच्चों के लिए – भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बच्चों का हाथ पकड़कर चलूँगा। - भोजन आदि में सहायता
- व्हीलचेयर वाले व्यक्ति के लिए – मैं उनके लिए भोजन लाने में सहायता करूँगा और उनके अनुकूल स्थान पर ही उन्हें बैठाऊँगा।
- बुजुर्गों और बच्चों के लिए – मैं उन्हें भोजन चुनने में मदद करूँगा, खासकर यदि उन्हें कोई विशेष आहार संबंधी आवश्यकता हो ।
- पानी और अन्य आवश्यकताओं के लिए – मैं सभी को पानी या अन्य आवश्यक चीजें प्राप्त करने में मदद करूँगा।
(ख) अपने किसी मित्र के साथ बिना बोले संवाद कीजिए- संकेतों से। अब सोचिए कि यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए क्या-क्या आवश्यक होगा?
उत्तर:
यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए आवश्यक बातें-
- साइन लैंग्वेज जानने वाला साथी या गाइड उनके साथ हों, जो संवाद कर सके।
- फ्लैश लाइट या बाइब्रेशन वाले अलार्म हों ताकि आपातकालीन स्थिति या किसी महत्वपूर्ण सूचना के समय वे इनका प्रयोग कर सकें।
- मोबाइल फ़ोन पर टेक्स्ट-टू-स्पीच और स्पीच -टू-टेक्स्ट ऐप हों।
- सांकेतिक भाषा के पोस्टर हों ।
- नोटपैड और पेन हों।
- उनके पास एक आपातकालीन संपर्क नंबर लिखा हो ।
- सहायक श्रवण उपकरण और उनके अतिरिक्त बैटरी हो ।
(ग) यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे ?
उत्तर:
यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए हम निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेंगे-
- वहाँ साफ़-सफाई का ध्यान रखेंगे तथा कूड़ा नहीं फैलाएँगे।
- दीवारों पर न ही कुछ लिखेंगे न ही खरोंचेगे।
- संरचना के किसी भी हिस्से को नुकसान नहीं पहुचाएँगे।
- जहाँ मना हो, वहाँ फोटोग्राफ़ी / वीडियोग्राफ़ी का उपयोग नहीं करेंगे।
- उस जगह के नियमों का सख्ती से पालन करेंगे।
- प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग नहीं करेंगे।
- पौधे और वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।
- गाइड की बातों को ध्यान से सुनेंगे।
- धरोहरो की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करेंगे।
आज की पहेली
• पाठ में से शब्द खोजिए और नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए-
प्रश्न 1.
एक मसाले का नाम …………………
उत्तर:
दालचीनी
प्रश्न 2.
कपास से जुड़ा एक शब्द ……………..
उत्तर:
जनेऊ
प्रश्न 3.
जहाँ स्नान होता है ………………….
उत्तर:
हर की पौड़ी (घाट)
प्रश्न 4.
वृक्ष के किसी अंग का नाम ………….
उत्तर:
जड़
प्रश्न 5.
एक नगर या तीर्थ का नाम ……………
उत्तर:
हरिद्वार
प्रश्न 6.
व्यापार से जुड़ा स्थान …………..
उत्तर:
दुकान
प्रश्न 7.
एक नदी का नाम ………….
उत्तर:
गंगा
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प्रश्न 8.
एक पर्वत का नाम …………..
उत्तर:
विल्व पर्वत
प्रश्न 9.
एक धार्मिक ग्रंथ का नाम ………….
उत्तर:
श्री भागवत झरोखे से
झरोखे से
भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे एक और पत्र का एक अंश नीचे दिया गया है। इसे पढ़िए और आपस में विचार कीजिए।
हरिद्वार के मार्ग में
हरिद्वार के मार्ग में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखने में आए। एक पीले रंग का पक्षी छोटा बहुत मनोहर देखा गया। बया एक छोटी चिड़िया है उसके घोंसले बहुत मिले। ये घोंसले सूखे बबूल काँटे के वृक्ष में हैं और एक-एक डाल में लड़ी की भाँति बीस-बीस, तीस-तीस लटकते हैं। इन पक्षियों की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही | है, लिखने का कुछ काम नहीं है। इसी से इनका सब चातुर्य प्रगट है कि सब वृक्ष छोड़ के काँटे के वृक्ष में घर बनाया है। इसके आगे | ज्वालापुर और कनखल और हरिद्वार हैं, जिसका वृत्तांत | अगले नंबरों में लिखूँगा।

• (इससे संबंधित अंश पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या-61 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं पढ़ें।
खोजबीन के लिए
• भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है- अंधेर नगरी। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए ।

उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं खोजकर पढ़ें।