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Class 7 Hindi चिड़िया Extra Question Answer
Class 7 Hindi Chapter 9 Extra Question Answer चिड़िया
NCERT Class 7 Hindi Chapter 9 Extra Questions अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कविता में चिड़िया को किस पेड़ पर बैठा बताया गया है?
उत्तर :
कविता में चिड़िया को पीपल के पेड़ पर बैठा बताया गया है।
प्रश्न 2.
चिड़िया हमें क्या देती है?
उत्तर :
चिड़िया हमें संदेश देती है।
प्रश्न 3.
वन में पशु-पक्षी किस प्रकार रहते हैं?
उत्तर :
वन में पक्षी आपस में मिल -जुलकर रहते हैं।
प्रश्न 4.
कवि ने पक्षियों का घर किसे बताया है?
उत्तर :
कवि ने आसमान को पक्षियों का घर बताया है।
प्रश्न 5.
चिड़िया कौन-सा मंत्र बताती है?
उत्तर :
चिड़िया हमें मुक्ति – मंत्र बताती हैं।
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प्रश्न 6.
पक्षी रात को कहाँ चले जाते हैं?
उत्तर :
पक्षी रात को पेड़ों पर चले जाते हैं।
प्रश्न 7.
पक्षियों के मन में क्या नहीं है?
उत्तर :
पक्षियों के मन में लोभ नहीं है।
प्रश्न 8.
गगन को कवि ने कैसा बताया है?
उत्तर :
गगन को कवि ने सीमाहीन बताया है।
प्रश्न 9.
पक्षी कैसे घूमते हैं ?
उत्तर :
पक्षी स्वच्छंद घूमते हैं।
प्रश्न 10.
मनुष्य किन कड़ियों में अटका है?
उत्तर :
मनुष्य लोभ-लालच की कड़ियों में अटका है।
प्रश्न 11.
‘चिड़िया’ कविता की रचना किसने की है?
उत्तर:
‘चिड़िया’ कविता की रचना कवि आरसी प्रसाद सिंह ने की है।
प्रश्न 12.
‘चिड़िया’ हमें कौनसी रीति सिखलाती है?
उत्तर:
चिड़िया हमें प्रेम-रीति सिखलाती है।
प्रश्न 13.
कविता में मुक्ति-मंत्र का क्या आशय है?
उत्तर:
कविता में मुक्ति-मंत्र का आशय स्वतन्त्रतापूर्वक जीवन जीने का संदेश है।
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प्रश्न 14.
कविता में पक्षियों का जीवन कैसा बताया गया है?
उत्तर:
कविता में पक्षियों का जीवन सरल, स्वार्थरहित और संतोषी बताया गया है।
प्रश्न 15.
वन में कौन-कौन से पक्षी हिल-मिलकर निवास करते हैं?
उत्तर:
वन प्रदेश में खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक आदि हिलमिल कर निवास करते हैं।
प्रश्न 16.
पक्षी कहाँ अपनी दुनिया बसाते हैं?
उत्तर:
पक्षी स्वतन्त्र हैं वे जहाँ रहते हैं वहीं अपनी दुनिया बसा लेते हैं।
प्रश्न 17.
पक्षी किसकी कमाई से अपना घर नहीं भरते हैं?
उत्तर:
पक्षी परिश्रम की कमाई से ही घर भरते हैं, दूसरों के परिश्रम का फल नहीं लेते हैं।
प्रश्न 18.
पक्षियों की क्या चाह नहीं है?
उत्तर:
पक्षियों की जग का सारा माल हड़पने की चाह नहीं है।
चिड़िया Class 7 Hindi Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
चिड़िया ने हमें कौन-सा पाठ पढ़ाया है?
उत्तर :
चिड़िया ने हमें मेल-मिलाप का पाठ पढ़ाया है। उसके अनुसार जिस प्रकार वन में अनेक पशु-पक्षी आपस में मिल- -जुलकर रहते हैं, उसी प्रकार हमें भी आपस में प्यार, भाईचारा तथा परस्पर सहयोग से रहना चाहिए। अनेकता में एकता दिखानी चाहिए।
प्रश्न 2.
पक्षियों की दिनचर्या कैसी होती है?
उत्तर :
पक्षी बहुत मेहनती तथा लगन से काम करने वाले होते हैं। दिन-भर दाना – दुनका इकट्ठा करने के लिए परिश्रम करते हैं। वे मेहनत से नहीं घबराते। शाम होने पर पेड़ों पर बने अपने घोंसलों में वापिस आकर सो जाते हैं। वे परिश्रमी होते हैं। तिनका-तिनका जोड़कर अपना घर बनाते हैं।
प्रश्न 3.
कवि ने मनुष्य को बंदी क्यों बताया है?
उत्तर :
मनुष्य आजीवन धन एकत्रित करने में लगा रहता है। उसकी लालसा कभी समाप्त नहीं होती। लोभ लालच के बंधन में जकड़ा रहता है। वह इन ज़ंजीरों को तोड़ नहीं पाता, इसलिए ही कवि ने मनुष्य को बंदी बताया है। हम मानव-जाति अधिक से अधिक पाने की इच्छा करते हैं, इसलिए बंधन से मुक्त नहीं हो पाते।
प्रश्न 4.
चिड़िया के माध्यम से बन्दी मानव को क्या प्रेरणा दी गई?
उत्तर:
चिड़िया के माध्यम से बन्दी मानव को प्रेम से रहने की प्रेरणा दी गई है, इसके साथ ही कहा गया है कि हमें सांसारिक बन्धनों से मुक्त रहना चाहिए। इसके स्थान पर हमें पारस्परिक सौहार्द्र भावना से रहने की प्रेरणा दी गई है।
प्रश्न 5.
वन प्रदेश में पक्षी कैसे रहते हैं?
उत्तर:
वन प्रदेश में जितने भी पक्षी हैं वे आपस में हिलमिल कर रहते हैं। सभी मिल-जुलकर खाते हैं। आसमान ही उनका घर है इसलिए स्वतन्त्रता से जहाँ चाहते हैं वहीं चले जाते हैं और अपना घर बसा लेते हैं।
प्रश्न 6.
‘उनके मन में लोभ नहीं है’ पंक्ति के माध्यम से पक्षियों की किस मनोवृत्ति पर प्रकाश डाला गया है।
उत्तर:
पक्षियों के मन में लोभ का भाव नहीं है। वे उसे पाप समझते हैं। इसलिए संसार के सारे माल को हड़पना नहीं चाहते हैं। अपितु वे परिश्रम से जो फल प्राप्त होता है उतना ही लेते हैं और शेष दूसरों के लिए छोड़ देते हैं।
प्रश्न 7.
‘नहीं कमाई से औरों की अपना घर वे भरते हैं’ इस पंक्ति से मानव क्या प्रेरणा ले सकते हैं?
उत्तर:
प्रश्नोक्त पंक्ति का तात्पर्य यह है कि पक्षी अपने ही परिश्रम का फल उपभोग करते हैं दूसरों के परिश्रम के फल का उपभोग नहीं करते हैं। इससे हम यह प्रेरणा ले सकते हैं कि हमें दूसरों के परिश्रम का फल प्राप्त करने का भ्रष्टाचार नहीं करना चाहिए। अपने परिश्रम से ही अपना घर भरना चाहिए।
चिड़िया Extra Questions दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘चिड़िया’ कविता का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों में ‘आरसी प्रसाद सिंह’ का नाम प्रमुख रूप से आता है । ‘चिड़िया’ कविता के माध्यम से वह संपूर्ण मानव जाति को यह संदेश देना चाहते हैं कि इस मनुष्य जीवन को सार्थक बनाओ। -जुलकर प्रेम-प्यार से रहो। आपसी भाईचारा तथा सच्ची मित्रता निभाओ । कवि के अनुसार हम लोग सांसारिक मोह-माया के बंधनों में बँधे हैं। हम उनसे मुक्त नहीं हो पाते क्योंकि हमारी लालसा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अधिक से अधिक पाना चाहते हैं। यदि हमारा बस चले तो दूसरों का भी हड़प लें। कवि हमें मुक्ति मंत्र सिखाकर इस लोभ लालच के बंधन से मुक्त करना चाहते हैं । वे चाहते हैं कि जिस प्रकार पक्षी स्वच्छंद निर्भय विचरण करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी इन बंधनों से आज़ाद होना है। यही सच्ची मानवता है । आपसी वैर-विरोध को समाप्त करना होगा। ईर्ष्या व द्वेष को जीवन से हटाना होगा। यही इस कविता का मुख्य भाव है।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
जो मिलता है अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं;
उत्तर :
उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि पक्षी एवं पशु मानव की तरह लालची नहीं होते; अपतु वे मेहनती होते हैं। वे परिश्रम करना जानते हैं। मकड़ी जाला बुनती है; पक्षी तिनके जोड़कर अपने घोंसले स्वयं बनाते हैं। इस सच्चाई को कौन नहीं जानता । एक नन्ही चींटी अपने मुँह में एक कतरा उठाकर चलती है; बार-बार यही प्रक्रिया करती है। सभी जीव परिश्रम करके अपना पेट भरते हैं। दूसरों का हड़पना वे नहीं जानते। अपने हिस्से का पाकर ही संतुष्ट हो जाते हैं। पशु-पक्षी मनुष्य के समान लालची नहीं होते। न ही दूसरे के हक का लेना चाहते हैं।
प्रश्न 3.
‘स्वच्छंद निर्भय विचार विचरण’ से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
स्वच्छंद का अर्थ है – आज़ादी। निर्भय का अर्थ है-निडरता। विचरण का अर्थ है – घूमना । स्वच्छंद, निर्भय, विचरण, शब्दों का प्रयोग कवि ने पक्षियों के लिए किया है। पक्षी सीमाहीन आकाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर उड़ते रहते हैं। वे अपनी मर्जी के मालिक हैं। जहाँ जाना चाहें, चले जाते हैं। उनके मन में किसी प्रकार का भय या संकोच नहीं होता। वे निर्भीक विचरण करते हैं। जब शाम होने लगती है तो उड़ान भरकर उन पेड़ों पर वापिस आ जाते हैं; जहाँ इनके घोंसले होते हैं। रात को आराम से अपने घोंसलों में सो जाते हैं। यही है – स्वच्छंद निर्भय विचरण।
प्रश्न 4.
पग में बेड़ी किसके पड़ी है और क्यों?
उत्तर :
मनुष्य के पैरों में लोभ तथा लालच की बेड़ी पड़ी है क्योंकि वह अधिक से अधिक पाने की होड़ में लगा है। । वह इस बंधन से मुक्त नहीं हो पाता। इन लोभ – लालसा की ज़ंजीरों को तो तोड़ नहीं पाता। जब तक हम लालची रहेंगे, इस संसार के बंधन से मुक्त नहीं हो पाएँगें। मनुष्य का यह स्वभाव बन गया है कि उसे जितना मिलता है, उतना ही वह और पाने की इच्छा करता है। उसके पास संतोष रूपी धन की कमी है। इसलिए सांसरिक मोह-माया के जाल में फँसा है। इस जाल को ही कवि ने बेड़ी कहा है।
प्रश्न 5.
मनुष्य जन्म सभी जन्मों में श्रेष्ठ कहा गया है । हमें इस मानव जीवन का सदुपयोग किस प्रकार करना है?
उत्तर :
- भारतीय संस्कृति की महानता यानी ‘अनेकता में एकता’ को अपनाना है।
- प्रेम – प्यार व भाईचारा फैलाना है।
- आपसी ईर्ष्या-द्वेष को मिटाना है।
- लालसा की ज़ंजीरों को तोड़ना है ।
- मुक्ति – मंत्र को प्राप्त करना है।
- जीवन में उन्नति के पथ पर अग्रसर होना है।
- मानवता को अपनाना है।
- झूठ – फ़रेब, धोखाधड़ी, चालबाज़ी से दूर रहना है।
- परिश्रम से जो मिलें, उसी से संतुष्ट होना है।
- सच्चाई और ईमानदारी को अपनाना है ।
प्रश्न 6.
“सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण हैं” पंक्ति में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पक्षी सीमा-हीन आसमान में निडरता से विचरण करते रहते हैं उसी प्रकार हमें भी इस संसार के. सांसारिक बन्धनों से मुक्त होकर निडरता से स्वतन्त्र होकर आसमान की ऊँचाइयों को छूते रहने चाहिए। मानव अपने बनाए हुए सामाजिक, मानसिक एवं आर्थिक बंधनों में जकड़ा हुआ है, जबकि पक्षी स्वतन्त्र जीवन जीते हैं। हम भी पक्षियों से प्रेरणा लेकर अनावश्यक बंधनों को तोड़कर स्वतन्त्र, निर्भय और साहसी हो सकते हैं।
प्रश्न 7.
“ओ मानव! तुम मानवता से द्रोह-भावना को छोड़ो!” मानव की मानवता से ‘द्रोह भावना’ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चिड़िया कविता में चिड़िया मानव को द्रोह भावना त्यागने की प्रेरणा देते हुए कहती है कि मानव ने स्वयं को अनेक सांसारिक बन्धनों में बांध रखा है, ये बंधन मानव के मानवीय मूल्यों की प्राप्ति में बाधा डालते हैं जिससे मानव की स्वतन्त्रता प्रभावित होती है। मानव, मानव का शत्रु बना हुआ है। अतः शत्रुता का भाव त्याग कर एक-दूसरे का सहायक बनना चाहिए।
प्रश्न 8.
आजकल पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है, इसे रोकने के लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?
उत्तर:
पक्षियों की संख्या कम होने का कारण प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और शोरगुल है। हमें पेड़ नहीं काटने चाहिए क्योंकि वे पक्षियों के आश्रय स्थल होते हैं। प्लास्टिक एवं रासायनिक वस्तुओं का उपयोग कम करना चाहिए, जल, वायु और ध्वनि, प्रदूषण को रोकने हेतु नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए। इनके लिए दाना-पानी रखना भी एक अच्छा तरीका है। हम प्रकृति सौन्दर्य का ध्यान रखेंगे तो इनकी संख्या निश्चित बढ़ेगी।
Class 7 Hindi Chapter 9 Extra Questions and Answers
प्रश्न 1.
कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) पक्षी कैसे रहते हैं?
(ख) आपसी सहयोग से क्या होता है?
(ग) क्या आप अपने मित्र को सहयोग देते हैं?
(घ) मिल-जुलकर रहने का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
(क) पक्षी आपस में मिल-जुलकर प्रेम-प्यार से रहते हैं। उन्हें मित्रता निभानी आती है।
(ख) आपसी सहयोग से आप एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं। यदि आप कभी मुसीबत में हैं तो दूसरे आपकी सहायता कर सकते हैं। किसी ने सच ही कहा है- एक और एक ग्यारह होते हैं।
(ग) मैं अपने मित्र का सदैव साथ देता हूँ। यदि उसे कभी भी मेरी आवश्यकता पड़े तो मदद करने से पीछे नहीं हटता ।
(घ) मिल-जुलकर रहना अत्यंत लाभदायक होता है। हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बन जाते हैं। आपसी प्रेम-प्यार की भावना विकसित होती है।
प्रश्न 2.
(i) पक्षी श्रम से क्या पाते हैं?
(ii) मनुष्य का स्वभाव कैसा है?
उत्तर :
(i) पक्षियों में श्रम की भावना बहुत अधिक होती है। वे तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाते हैं और अपनी चोंच से खाना इकट्ठा करके अपना पेट भरते हैं।
(ii) मनुष्य के स्वभाव में लोभ व लालच की भावना होती है। वह अधिक से अधिक हड़पना चाहता है और अधिक पाने की इच्छा उसकी कभी समाप्त नहीं होती ।
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प्रश्न 3.
(i) मनुष्य किन बेड़ियों में जकड़ा है।
(ii) पक्षियों को स्वच्छंद क्यों कहा गया है?
उत्तर :
(i) हम मनुष्य लोभ व लालच की ज़ंजीरों में जकड़े हैं। हमारी लालसा कभी समाप्त नहीं होती । जितना मिलता है उससे और अधिक पाना चाहते हैं। ये लालच की भावना ही हमारी बेडियाँ हैं।
(ii) पक्षियों को स्वच्छंद इसलिए कहा गया है क्योंकि वे किसी बंधन में नहीं बँधे हैं। निर्भय होकर सीमाहीन आकाश में घूमते हैं।