Our free Class 7 Hindi Malhar Worksheet and Class 7 Hindi अपठित बोध गद्यांश काव्यांश Apathit Bodh Gadyansh Kavyansh Worksheet with Answers make learning easier and fun.
Class 7 Hindi अपठित बोध Worksheet with Answers
वर्कशीट 1
निर्देश निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।
गद्यांश 1
मुसकान में एक विचित्र सम्मोहन होता है, जिसकी समानता किसी अन्य से नहीं की जा सकती है। एक पुस्तक में लिखा था—नाराज़ होइए तो भी मुसकुराकर । बात विरोधाभास जैसी प्रतीत होती है, पर इसका आशय यही है कि जब क्रोध प्रकट करना अनिवार्य हो तब भी उसे भयानक न बनने दीजिए। क्रोध की भयंकरता उसे विध्वंसकारी बना देती है । कुछ अधिकारी स्तर के व्यक्ति अपने चेहरे पर अनावश्यक गंभीरता बनाए रखना प्रशासनिक सफलता का सूत्र समझते हैं। किसी विशेष परिस्थिति में; जैसे— अपराधी से पूछताछ करते समय, गंभीरता भले ही आवश्यक हो, किंतु वह हमारी आदत नहीं बननी चाहिए। याद रखिए, जो अनुशासन प्यार से किसी का हृदय जीतकर बनाया जा सकता है, वह क्रोधपूर्ण, तनावग्रस्त अथवा चौबीस घंटे की गंभीर मुख-मुद्रा से उत्पन्न नहीं किया जा सकता है। इससे भय तो उत्पन्न हो सकता है, किंतु भय से उत्पन्न अनुशासन स्थायी नहीं होता है।
प्रश्न 1.
मुसकान के सम्मोहन को विचित्र क्यों कहा गया है?
______________________________
प्रश्न 2.
कुछ अधिकारी अपनी सफलता का सूत्र किसे समझ बैठते हैं?
______________________________
प्रश्न 3.
स्थायी अनुशासन कैसे बनाया जा सकता है?
______________________________
प्रश्न 4.
विपरीतार्थक (विलोम) शब्द लिखिए ।
(क) विध्वंस ______________________________
(ख) स्थायी ______________________________
उत्तर :
(क) निर्माण
(ख) अस्थायी
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प्रश्न 5.
इन शब्दों के मूल शब्द और प्रत्यय अलग कर लिखिए ।
(क) समानता ______________________________
(ख) प्रशासनिक ______________________________
उत्तर :
(क) मूल शब्द – मान तथा प्रत्यय-ता
(ख) मूल शब्द – प्रशासन तथा प्रत्यय – इक
गद्यांश 2
मुंशी प्रेमचंद अनुशासित जीवन जीते थे। वे प्रात:काल जल्दी उठ जाते थे और दैनिक कार्यों से मुक्त होकर एक घंटा खुले मैदान में घूमते थे। घर लौटकर वे अपने अधिकांश कार्य स्वयं करते थे । वे नौकरों से काम लेकर अपनी आदत बिगाड़ना नहीं चाहते थे। उनका मानना था कि जिस आदमी के हाथ में काम करने से घट्टे (निशान) न पड़े हों, उसे रोटी खाने का अधिकार नहीं है। वे अपने सारे काम निपटाकर नाश्ता करते थे। लिखने के लिए उन्हें प्रात: काल का समय पसंद था। वे वक्त के बड़े पाबंद थे। वे खुद समय पर स्कूल पहुँचकर छात्रों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते थे। समय की बर्बादी को वे गुनाह मानते थे । उनका मानना था कि समय की पाबंदी के बिना कोई जाति या देश उन्नति नहीं कर सकता है। उन्हें छात्रों से बहुत उम्मीदें थीं। वे चाहते थे कि शिक्षा संस्थानों से ही छात्रों को त्याग, साहस, देश-प्रेम और देश सेवा का मंत्र दिया जाना चाहिए।
प्रश्न 1.
प्रेमचंद के अनुसार रोटी खाने का अधिकार किसे नहीं है ?
______________________________
प्रश्न 2.
प्रेमचंद समय की बर्बादी को गुनाह क्यों मानते थे ?
______________________________
प्रश्न 3.
प्रेमचंद छात्रों में कौन – कौन से मानवीय मूल्य देखना चाहते थे?
______________________________
प्रश्न 4.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) गुनाह ______________________________
(ख) शिक्षा ______________________________
उत्तर :
(क) बेगुनाह
(ख) अशिक्षा
प्रश्न 5.
‘वे समय की बर्बादी को गुनाह मानते थे।’ रचना के आधार पर यह कैसा वाक्य है?
______________________________
उत्तर :
सरल वाक्य
वर्कशीट 2
निर्देश निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।
गद्यांश 1
आजकल विश्व को ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। वायुमंडल में प्रदूषित गैसों के इकट्ठा हो जाने से यह समस्या बढ़ती जा रही है। इससे प्राणियों के जीवन का सुरक्षा कवच कहलाने वाली ओज़ोन परत में छिद्र हो गया है। बढ़ते तापक्रम के कारण उत्तरी ध्रुव पर जमे हिमनद पिघलने लगे हैं। इन हिमनदों को ग्लेशियर भी कहा जाता है। ये जल आपूर्ति के सबसे बड़े स्रोत हैं। जलवायु चक्र को संतुलित करने में इनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। पहाड़ों की चोटियों पर जमी बर्फ़ की मोटी-मोटी चट्टानें ग्लेशियर कहलाती हैं। इन बर्फ़ीली चट्टानों को छूकर जब हवा गुज़रती है, तो तापमान में कमी आती है । जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, ये ग्लेशियर पानी में बदलकर धरती के प्राणियों की प्यास बुझाकर जीवनदायी बन जाते हैं।
प्रश्न 1.
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का क्या कारण है?
______________________________
प्रश्न 2.
ग्लेशियर जलवायु-चक्र को कैसे संतुलित करते हैं?
______________________________
प्रश्न 3.
हिमनदों को जीवनदायी क्यों कहा गया है ?
______________________________
प्रश्न 4.
प्रत्येक के दो-दो पर्यायवाची लिखिए ।
(क) छिद्र, ______________________________
(ख) ग्लेशियर ______________________________
उत्तर :
(क) छेद, सुराख
(ख) हिमनद, तुषारनदी
प्रश्न 5.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए ।
(क) संतुलित ______________________________
(ख) उत्तरी ______________________________
उत्तर :
(क) असंतुलित
(ख) दक्षिणी
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गद्यांश 2
हमारे जीवन में नदियों की विशेष महत्ता है। नदियों के कारण ही हमारा जीवन संभव हो सका है। भारतीय संस्कृति में नदियाँ पूजनीय मानी गई हैं। नदियों से हमें अमृत तुल्य जल प्राप्त होता है। इसका उपयोग हम खेतों की सिंचाई करने, अपनी प्यास बुझाने, बिजली बनाने, घरेलू काम करने के अलावा और भी बहुत से कार्यों में करते हैं। नदियाँ आवागमन का साधन बनकर जलमार्ग उपलब्ध कराती हैं। प्राचीनकाल में अधिकांश व्यापार इसी मार्ग से होता था। लोग नावों द्वारा आते-जाते और व्यापार करते थे । भारतीय संस्कृति में अनेक धार्मिक क्रियाकलाप नदियों के किनारे किए जाते हैं। शहरों में पेयजल का मुख्य स्रोत नदियाँ ही हैं। दुर्भाग्य से मनुष्य अपने स्वार्थपूर्ण व्यवहार से नदियों को दूषित कर रहा है। नदियों में जानवरों को नहलाने, कपड़े धोने, पूजा-पाठ की अवशिष्ट सामग्री फेंकने. नदियों में लाशें प्रवाहित करने या उनके किनारे पर अंत्येष्टि क्रिया करने से नदियों का प्रदूषण बढ़ा है। हमें नदियों को बचाने का पूरा प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न 1.
नदियाँ हमारे लिए किस प्रकार लाभकारी हैं?
______________________________
प्रश्न 2.
व्यापार बढ़ाने में नदियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए ।
______________________________
प्रश्न 3.
नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए आप क्या – क्या सुझाव देंगे ? लिखिए ।
______________________________
प्रश्न 4.
संधि-विच्छेद कीजिए ।
(क) दुर्भाग्य ______________________________
(ख) व्यवहार ______________________________
उत्तर :
(क) दु: + भाग्य
(ख) वि + अव + हार
प्रश्न 5.
‘आवागमन’ का समानार्थी शब्द लिखिए ।
______________________________
उत्तर :
आना-जाना
वर्कशीट 3
निर्देश निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।
गद्यांश 1
किसी जंगल में बरगद के पेड़ के नीचे घनी झाड़ियों के बीच एक तीतर अपने छोटे से बिलनुमा घोंसले में रहता था। वह अपने आस-पास के पक्षियों के साथ मिल-जुलकर रहता था। उधर क्वार बीतते-बीतते धान की बालियाँ पककर सुनहरी हो चली थीं। इनमें से निकलने वाला चावल तीतर का प्रिय भोजन था। एक दिन तीतर धान के खेत में गया। पके धान को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। उसने स्वादिष्ट चावल खाए और वहीं खेत में फसल के बीच सो गया। तीतर को बड़ा आनंद आया । इस तरह जब वह दस दिन बाद अपने घोंसलेनुमा बिल की ओर आया, तो उसमें खरगोश को सोते पाया। उसने खरगोश को भगाना चाहा पर खरगोश न गया। अंत में उसने पंचायत बुलाई और बंदर को सरपंच बनाकर सारी बात सुनाई । सारी बात जानकर बंदर ने दूध-का – दूध और पानी – का – पानी कर दिया और तीतर को उसका घर दिलाया।
प्रश्न 1.
तीतर का घोंसला कहाँ पर था ?
______________________________
प्रश्न 2.
तीतर धान के खेत में क्यों गया?
______________________________
प्रश्न 3.
तीतर को उसका घर वापस कैसे मिला?
______________________________
प्रश्न 4.
पर्यायवाची शब्द लिखिए।
(क) जंगल ______________________________
(ख) भोजन ______________________________
उत्तर :
(क) वन
(ख) आहार
प्रश्न 5.
प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए ।
(क) दिन + इक ______________________________
(ख) आनंद + इत ______________________________
उत्तर :
(क) दैनिक
(ख) आनंदित
गद्यांश 2
बहुत पुराने समय की बात है । तब यातायात के साधन बहुत कम थे। लोग पैदल और बैलगाड़ियों से यात्रा करते थे। रास्ते में चोर डाकुओं का भय बना रहता था। इनसे बचने के लिए लोग समूह में यात्रा करते थे । बालक अब्दुल कादिर की माँ ने उससे कहा कि वह अपनी नानी के पास कुछ अशर्फियाँ लेकर चला जाए। उसने उन अशर्फियों को उसकी सदरी के अस्तर में सिलकर उसे भी व्यापारियों के साथ रवाना कर दिया। सुनसान रेगिस्तान में डाकू यात्रियों को लूटने लगे। एक डाकू के पूछने पर अब्दुल कादिर ने बताया कि उसके पास अशर्फियाँ हैं। उसने डाकुओं के सरदार के सामने सदरी का अस्तर फाड़कर अशर्फियाँ दिखा दीं। डाकुओं को बड़ा आश्चर्य हुआ । उन्होंने उससे पूछा, “तुमने ऐसा क्यों किया ? तुमने हमें अशर्फियाँ क्यों दिखा दीं? हम तो इन अशर्फियों को खोज भी न पाते।” बालक ने कहा, “चलते समय मेरी माँ ने कहा था, बेटा! कभी झूठ न बोलना।” डाकुओं पर बालक की बात का असर हुआ। उन्होंने लूटा गया माल वापस कर दिया।
प्रश्न 1.
पहले यात्री चोर-डाकुओं से बचने के लिए क्या उपाय अपनाते थे ?
______________________________
प्रश्न 2.
कादिर की माँ ने अशर्फियाँ भेजने के लिए क्या किया ?
______________________________
प्रश्न 3.
बालक ने डाकुओं को अशर्फियाँ क्यों दिखा दी ?
______________________________
प्रश्न 4.
‘आश्चर्य’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।
(क) ______________________________
(ख) ______________________________
उत्तर :
(क) अचंभा
(ख) विस्मय
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प्रश्न 5.
वचन बदलिए ।
(क) अशर्फियाँ ______________________________
(ख) यात्री ______________________________
उत्तर :
(क) अशर्फी
(ख) यात्रीगण
अपठित काव्यांश
वर्कशीट 1
निर्देश निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए।
काव्यांश 1
वह खून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं ।
वह खून कहो किस मतलब का, आ सके देश के काम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का, जिसमें जीवन है न रवानी है।
जो परवश होकर बहता है, वह खून नहीं है, पानी है।
उस दिन लोगों ने सही-सही, खूँ की कीमत पहचानी थी।
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में, माँगी उनसे कुर्बानी थी।
बोले “स्वतंत्रता की खातिर बलिदान तुम्हें करना होगा।
तुम बहुत जी चुके हो जग में, लेकिन आगे मरना होगा “।
आज़ादी के चरणों में जो, जयमाल चढ़ाई जाएगी।
सुनो, तुम्हारे शीशों के, फूलों से गूँथी जाएगी।
प्रश्न 1.
‘देश के काम आने’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
______________________________
प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस ने लोगों से कुर्बानी क्यों माँगी थी ?
______________________________
प्रश्न 3.
आज़ादी के चरणों में चढ़ाई जाने वाली जयमाल की विशेषता बताइए ।
______________________________
प्रश्न 4.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) परवश ______________________________
(ख) आज़ादी ______________________________
उत्तर :
(क) स्ववश
(ख) गुलामी
प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
(क) फूल ______________________________
(ख) पानी ______________________________
उत्तर :
(क) पुष्प, सुमन
(ख) जल, अंबु
काव्यांश 2
इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी।
जलकर जिसने स्वतंत्रता की दिव्य आरती फेरी ॥
यह समाधि, यह लघु समाधि, है झाँसी की रानी की।
अंतिम लीला स्थली यही है लक्ष्मी मर्दानी की ।।
यहीं कहीं पर बिखर गई, वह भग्न विजय – माला सी।
उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति – शाला सी।। – सी ।
सहे वार पर वार अंत तक लड़ी वीर बाला- आहुति-सी
गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला – सी ॥
बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से।
मूल्यवती होती सोने की भस्म यथा सोने से ।।
रानी से भी अधिक हमें अब यह समाधि है प्यारी ।
यहाँ निहित है स्वतंत्रता की आशा की चिनगारी ।।
प्रश्न 1.
अंतिम लीला स्थली किसे कहा गया है और क्यों ?
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प्रश्न 2.
कवयित्री को यह समाधि अधिक प्रिय क्यों लगती है ?
______________________________
प्रश्न 3.
रानी की समाधि और अन्य समाधियों में क्या अंतर है?
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प्रश्न 4.
(क) प्रस्तुत शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए – ढेरी, ज्वाला।
___________ ___________
उत्तर :
ढेरियाँ, ज्वालाएँ
(ख) प्रस्तुत शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखिए — वीर, कवि ।
___________ ___________
उत्तर :
वीरांगना, कवयित्री
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प्रश्न 5.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) लघु ___________
(ख) विजय ___________
उत्तर :
(क) दीर्घ
(ख) पराजय
वर्कशीट 2
निर्देश निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।
काव्यांश 1
पीत – पाँवड़े पड़े हुए थे, वृक्षों के मधु बंदनवार ।
उससे चलकर ही कौशल – सुत आए थे कुटिया के द्वार ।
खड़ा गगन का द्वीप स्वयं ही लिए सूर्य की ज्योति महान् ।
ताराओं के पुष्प अलक्षित, धूप – आरती का भगवान।।
द्विजगण शंखोच्चार सुनाते शुभागमन में रघुवर के ।
शबरी अकचक देख रही थी, आज उन्हें जी भर-भर के ।
स्याम स्वर्ण कमल नयन थे, जटा मुकुट सिर पर अभिराम ।
धनुष-बाण तरकश को धारे, सुंदरता को कोटि ललाम ।।
प्रश्न 1.
शबरी की कुटिया में कौन आए थे?
______________________________
प्रश्न 2.
राम की धूप – आरती किसने और किस तरह उतारी ?
______________________________
प्रश्न 3.
राम के रूप सौंदर्य का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
______________________________
प्रश्न 4.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) अलक्षित ___________
(ख) स्याम ___________
उत्तर :
(क) लक्षित
(ख) श्वेत
प्रश्न 5.
‘शंख’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।
______________________________
उत्तर :
कंबु, कंबुक
काव्यांश 2
देखकर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं। रह भरोसे भाग वे दुःख भोग पछताते नहीं । । काम कितना ही कठिन हो, किंतु उकताते नहीं । भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं । । हो गए इक आन में उनके बुरे दिन भी भले । सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले – फले ।। व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर । वे घने जंगल जहाँ, तम रहता है आठों पहर ।। गरजती जलराशि की उठती हुई ऊँची लहर। आग की भयदायिनी फैली दिशाओं में लवर ।।
प्रश्न 1.
कविता में कर्मवीर की क्या – क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
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प्रश्न 2.
कर्मवीरों को किन-किन स्थानों पर कार्य करते हुए देखा जा सकता है ?
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प्रश्न 3.
‘व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ।
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प्रश्न 4.
पर्यायवाची शब्द लिखिए।
(क) विघ्न ___________
(ख) चंचल ___________
उत्तर :
(क) बाधा
(ख) अस्थिर
प्रश्न 5.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) दुर्गम ___________
(ख) शिखर ___________
उत्तर :
(क) सुगम
(ख) तलहटी
वर्कशीट 3
निर्देश निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।
काव्यांश 1
उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई।
नई उमंगें, नई तरंगें, नई आस है, साँस नई |
युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुसकान भरो।
उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो ।
डाल-डाल पर बैठ विहग, कुछ नए स्वरों में गाते हैं,
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौरे, मस्त हुए मँडराते हैं।
नव युग की नूतन वीणा में, नया राग नवगान भरो।
उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो ।
प्रश्न 1.
कवि भारतवासियों से क्या आह्वान कर रहा है?
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प्रश्न 2.
‘युग-युग के मुरझे सुमनों में यहाँ सुमन किनके प्रतीक हैं ? कवि उन्हें किस रूप में देखना चाहता है ?
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प्रश्न 3.
कवि नव युग की वीणा में किस प्रकार का राग भरना चाहता है ?
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प्रश्न 4.
(क) ‘विहग’ के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
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उत्तर :
नभचर, खग
(ख) ‘अमर’ शब्द के दो अर्थ लिखिए।
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उत्तर :
कभी न मरने वाला, देवता
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प्रश्न 5.
‘नूतन’ और ‘निर्माण’ शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए।
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उत्तर :
पुरातन, विध्वंस
काव्यांश 2
अनमने मन से एक दिन गोलू जा रहा था अपने स्कूल ।
देखकर बंदर पेड़ से लटके अपना गंतव्य गया वह भूल ।।
उछल-कूद करते थे बंदर फल खाते थे जी भर कर ।
सोचा इन-साथ मैं भी खेलूँ क्या बनना है पढ़-लिखकर ।।
बैठ गया वह पेड़ के नीचे बस्ता अपना दिया उतार।
शीतल हवा के झोंके उसको ले चले निद्रा के संसार ।
बंदर आए डाल छोड़कर बस्ता लेकर झटपट भागे ।
एक-एक पुस्तक हाथ में लेकर पढ़ने लगे जरा दूर जाके ||
‘इ’ से इमली ‘आ’ से आम ‘भ’ से भालू ‘म’ से मकान ।
एक कलम के तीन रुपये पाँच कलम के बोलो दाम ||
गुजरा जब ‘प्रमोद’ उस रस्ते देखा, बंदर मिलकर पढ़ते थे।
कुछ पढ़ते थे ए बी सी डी कुछ याद पहाड़े करते थे । ।
जाकर उसने पूछा उनसे, “क्या करते हो तुम सब मिलकर ।
” वे बोले, “हम बनेंगे आदमी मेहनत से पढ़-लिखकर ।। “
प्रश्न 1.
गोलू स्कूल जाना क्यों भूल गया ?
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प्रश्न 2.
हवा के झोंकों का गोलू पर क्या असर हुआ ?
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प्रश्न 3.
बंदर क्या-क्या पढ़ रहे थे और क्यों ?
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प्रश्न 4.
(क) ‘मेहनत’ के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
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उत्तर :
परिश्रम, श्रम
(ख) ‘शीतल’ शब्द के दो अर्थ लिखिए।
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उत्तर :
ठंडा, शीत
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प्रश्न 5.
विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
(क) निद्रा ___________
(ख) प्रमोद ___________
उत्तर :
(क) अनिद्रा
(ख) आमोद