Reading Class 6 Hindi Notes Malhar Chapter 10 परीक्षा Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
परीक्षा Class 6 Summary in Hindi
परीक्षा Class 6 Hindi Summary
परीक्षा कविता का सारांश
‘प्रेमचंद’ द्वारा रचित ‘परीक्षा’ कहानी के माध्यम से लेखक ने यह बताने का प्रयास किया है कि मनुष्य की असली पहचान उसकी योग्यताएँ एवं शिक्षा मात्र नहीं होती हैं। दीवान सुजान सिंह बुढ़ापे में अपना बाकी का जीवन प्रभु स्मरण करके गुजारना चाहते थे, इसलिए वे अपने सेवानिवृत्त होने की प्रार्थना महाराज से करते हैं, किंतु वह इस बात पर असहमति व्यक्त करते हैं। बाद में वे यह शर्त रखकर उनका आवेदन स्वीकार करते हैं कि नए दीवान की नियुक्ति वे स्वयं करके जाएँगे, जिसके लिए वह प्रसिद्ध समाचार-पत्रों में विज्ञापन छपवाते हैं। विज्ञापन में कई गुणों को प्राथमिकता देने की बात कही गई । इसके लिए कई लोग अपना भाग्य आजमाने तरह-तरह के कपड़े पहनकर आते हैं तथा स्वयं को हर तरीके से अच्छा प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं।
दीवान पद के लिए आए ये लोग एक दिन हॉकी का खेल खेलने का निर्णय करते हैं। खेल शुरू हो जाता है, किंतु हार-जीत का निर्णय नहीं हो पाता । उसी बीच एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी नाले में फँस जाती है। उस विपत्ति में कोई भी उसकी सहायता के लिए नहीं आता, किंतु हॉकी के दौरान पाँव में चोट लगे एक व्यक्ति ने दया, हिम्मत व साहस के साथ किसान की सहायता करके गाड़ी को नाले से निकलवा दिया। दीवान के चयन के दिन दीवान सुजान सिंह ने पंडित जानकीनाथ जैसे दीवान की घोषणा की, जिसने स्वयं जख्मी होते हुए भी किसान की सहायता में अपने धर्म का पूर्ण निर्वाह किया ।
परीक्षा Class 6 Summary in Hindi
देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजानसिंह की उम्र जब ढल गई, तो उन्हें परमात्मा की शरण में अपना जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई। उन्होंने अपनी इच्छा महाराज के समक्ष व्यक्त की। उन्होंने महाराज से कहा कि अब उनकी उम्र राज-काज सँभालने की नहीं रही। बुढ़ापे में यदि उनसे कोई भूल-चूक हो गई, तो अपयश झेलना पड़ेगा। राजा साहब अपने अनुभवी और नीतिकुशल दीवान का बहुत आदर करते थे। उन्होंने सुजानसिंह को बहुत समझाया, किंतु वे नहीं माने। अंततः राजा साहब ने दीवान जी की बात मान ली, किंतु यह शर्त रखी कि नया दीवान उन्हें ही खोजना होगा।
अगले दिन नए दीवान की नियुक्ति हेतु समाचार-पत्रों में विज्ञापन निकला । योग्य उम्मीदवारों को सुजानसिंह से संपर्क करने को कहा गया। दीवान के पद हेतु निर्धारित योग्यता में ग्रेजुएट के बजाय उम्मीदवार का स्वस्थ एवं कर्तव्यनिष्ठ होना महत्वपूर्ण माना गया ।
इस विज्ञापन ने समस्त राज्य में तहलका मचा दिया। सैकड़ों उम्मीदवार अपना-अपना भाग्य आजमाने देवगढ़ की ओर चल पड़े। मन में रंग-बिरंगे सँपए संजोये और विविध प्रकार के परिधानों से सुसज्जित उम्मीदवारों का मेला – सा देवगढ़ में लग गया।

सरदार सुजानसिंह ने सभी उम्मीदवारों के आदर-सत्कार का कुशल प्रबंध किया था। हर उम्मीदवार चयन के मापदंडों पर खरा उतरने की भपूर कोशिश कर रहा था। जो व्यक्ति अपने वास्तविक जीवन मे नौ बजे तक सोता था, वह प्रात: काल भ्रमण कर रहा था। जिस व्यक्ति से उसके नौकर-चाकर परेशान रहते थे, वह आजकल ‘आप’ और ‘जनाब’ के साथ नौकरों से पेश आ रहा था। जिन्हें ताउम्र पुस्तकों से घृणा थी, वे किताबों में डूबे रहते थे। सभी यही सोच रहे थे कि परीक्षा की एक महीने की अवधि किसी तरह छद्म आचार-व्यवहार से पार कर जाएँ। फिर कौन पूछता है? किंतु उम्मीदवारों के संपूर्ण क्रियाकलापों का सूक्ष्म अवलोकन दीवान सुजानसिंह द्वारा किया जा रह था। उम्मीदवारों के चयन के मापदंडों में खेलकूद भी शामिल था। हॉकी जैसे विशिष्ट ऊर्जा की दरकार वाले खेल खेलने के बाद सभी खिलाड़ी पस्त से हो गए थे। थके-हारे खिलाड़ी खेल खत्म होने के बाद दम ले रहे थे। खेल के मैदान से थोड़ी दूरी पर एक नाला था। उस नाले पर कोई पुल नहीं था। पथिकों को नाले में से चलकर आना पड़ता था । एक किसान अनाज से भरी हुई गाड़ी लिए उस नाले में आया। किंतु नाले की ऊँचाई और कीचड़ के कारण गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी। किसान कभी बैलों को ललकारता तो को भी पहियों से हाथ ढकेलता, किंतु गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ती। बहुत प्रयास करने के बावजूद गाड़ी आगे नहीं बढ़ी, तो किसान लाचार सा इधर-उधर ताकने लगा। खेल – समाप्ति के बाद खिलाड़ी उस रास्ते से गुज़रते हुए बेबश किसान तथा उसकी गाड़ी की तरफ़ देखते और आगे बढ़ जाते। किसी ने उसकी मदद नहीं की।
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एक व्यक्ति, जिसे खेल के दौरान पैरों में चोट लग गई थी, लँगड़ाता हुआ उस रास्ते से गुज़र रहा था। उसकी दृष्टि हताश और मायूस किसान और उसकी गाड़ी पर पड़ी। उसे माजरा समझते देर न लगी। उसने किसान की सहायता की पेशकश की। किसान कृतज्ञता से भर उठा। युवक ने किसान को बैलों को साधने के लिए कहा तथा स्वयं पहियों को ढकेलते हुए गाड़ी को ऊपर चढ़ाने लगा। काफ़ी मेहनत-मशक्कत करने के बाद गाड़ी ऊपर चढ़ गई । कृतज्ञ किसान युवक के समक्ष हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। उसने युवक से कहा कि यदि आप नहीं होते तो मुझे रातभर यहाँ बैठना पड़ता। इस पर युवक ने हँसते हुए कहा कि आप मुझे इसका क्या पारितोषिक देंगे। प्रत्युत्तर में किसान ने कहा कि यदि नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी। दरअसल वह किसान और कोई नहीं, बल्कि सुजानसिंह थे।
देवगढ़ रियासत के दीवान हेतु ली गई परीक्षा के परिणाम का दिन आ गया। राजा साहब का दरबार सजाया गया। सभी गणमान्य लोग दरबार में उपस्थित थे। सरदार सुजानसिंह ने सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दीवान का चयन कर लिया गया है। इस पद के लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जिसमें साहस तथा आत्मबल के साथ-साथ दया और उदारता भी हो। सौभाग्यवश हमें पंडित जानकीनाथ के रूप में ऐसा गुणवान व्यक्ति मिल गया है। जो व्यक्ति स्वयं जख्मी होकर भी एक किसान की मदद करता है, वह गरीबों को कभी नहीं सताएगा। वह अपने दृढ़ संकल्प और दया – धर्म से कभी विमुख नहीं होगा ।
शब्दार्थ- पृष्ठ संख्या – 105: रियासत – राज्य, ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय शासकों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से शासित राज्य । दीवान – किसी राज्य के शाही फ़रमानों के कार्यान्वयन, राजस्व, कर प्रबंधन और न्यायिक कार्यों को अंजाम देने वाला अधिकारी । दीनबंधु -दुखियों का सहायक । नेकनामी – ख्याति, यश।

पृष्ठ संख्या – 106 : मंदाग्नि – अपच, रोग जिसमें पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है । अंगरखा – एक परंपरागत मरंद्राना पहनावा जो लंबी बाँहों वाला और ढीला-ढाला होता है। कंटोप- कान तक ढकने वाली टोपी । सनद – प्रमाण-पत्र, प्रमाणिक कथन या बात। ऊषा – प्रातःकाल, भोर ।
पृष्ठ संख्या – 107 : जौहरी – पारखी, बहुमूल्य रत्न परखने या बेचने वाला व्यापारी । प्रस्ताव – सुझाव । अप्रेंटिस – प्रशिक्षु । पृष्ठ संख्या – 108: पथिक- राही, बटोही ।
पृष्ठ संख्या-109: मद- अहंकार, उन्माद । वात्सल्य – प्रेम, स्नेह, माता-पिता का प्रेम | सूरत – चेहरा । उबारना – छुटकारा पाना, बचना। नारायण – भगवान विष्णु । पैठना – घुसना, गहरे स्थान के अंदर जाना ।
पृष्ठ संख्या – 110: नसीब – भाग्य । रईस – संपन्न और प्रतिष्ठित व्यक्ति । धनाढ्य – धनी, संपन्न । विराजना – उपस्थित होना, बैठना । कीर्ति – यश, ख्याति ।