Students prefer NCERT Class 4 Hindi Veena Solutions Chapter 1 चिड़िया का गीत कविता के प्रश्न उत्तर Chidiya Ka Geet Kavita Poem Question Answer Pdf that are written in simple and clear language.
Chidiya Ka Geet Class 4 Question Answer
Class 4 Hindi Chidiya Ka Geet Question Answer
कक्षा 4 हिंदी पाठ 1 प्रश्न उत्तर – Class 4 Hindi Chapter 1 Chidiya Ka Geet Poem Question Answer
बातचीत के लिए
प्रश्न 1.
पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है या नहीं ? कारण भी बताइए।
उत्तर:
पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है, क्योंकि यह उन्हें सर्दी, गरमी और बरसात से सुरक्षा करता है।
प्रश्न 2.
आपके परिवार के सदस्य घर से बाहर क्यों जाते हैं?
उत्तर:
हमारे परिवार के सदस्य किसी आवश्यक कार्य या जीविको पार्जन हेतु घर से बाहर जाते हैं।
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प्रश्न 3.
जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं या बाहर से आते हैं तो आपको कैसा लगता है और क्यों ?
उत्तर:
जब परिवार के सदस्य घर से बाहर जाते या आते हैं, तो अच्छा लगता है क्योंकि इससे अपनत्व झलकता है।

प्रश्न 4.
जब कोई अतिथि आपके घर आता है या आप किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो आपको कैसा लगता है?
उत्तर:
अतिथि के आने और संबंधियों के घर जाने से अच्छा लगता है क्योंकि इससे रिश्तों में जुड़ाव आता है।
प्रश्न 5.
क्या आपको लगता है कि पक्षियों की तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं और फिर उनकी तरह ही संसार देखते हैं? अपने अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
पक्षियों की तरह धीरे-धीरे बड़े होने पर और हमें संसार देखने पर किसी के अच्छे या बुरे होने का अनुभव प्राप्त होता है, जो अच्छा ही नहीं बल्कि समझदार भी बनाता है।
कविता की बात
प्रश्न 1.
नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प दिए गए हैं। प्रश्नों के उत्तर सही हो सकते हैं-
(क) घोंसले से संबंधित उपयुक्त वाक्य को चिह्नित कीजिए-
- घोंसला पक्षियों का घर होता है।
- घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
- पक्षियों का घोंसला केवल पेड़ों पर होता है।
- कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।
उत्तर:
- घोंसला पक्षियों का घर होता है।
- घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
(ख) कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया है-

उत्तर:
कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ घोंसले के लिए कहा गया है।
(ग) ‘तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार’
इन पंक्तियों में ‘इतना सा’ का अर्थ है-
- बहुत छोटा
- बहुत बड़ा
- बहुत लंबा
- रंग-बिरंगा
उत्तर:
‘इतना – सा’ का अर्थ है- बहुत छोटा ।
प्रश्न 2.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए-

उत्तर:

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सोचिए और लिखिए
प्रश्न 1.
चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?
उत्तर:
जब चिड़िया घोंसले में थी और फिर शाखाओं पर बैठने लगी तो चिड़िया को यह संसार छोटा लगा।
प्रश्न 2.
खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा जिससे उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है?
उत्तर:
खुले आकाश में चिड़िया जब पंख फैलाकर उड़ने लगी तो उसे लगा कि यह संसार बहुत बड़ा है।
प्रश्न 3.
प्राय: सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट (कलरव) सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
प्रायः सूर्योदय से पहले और शाम को पक्षियों की चहचहाहट होना दिन और रात होने का संकेत देता है।
समझ और अनुभव
प्रश्न 1.
जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों ?
उत्तर:
जब कोई शिशु (चिड़िया का हो या मानव का) घोंसले या घर से बाहर निकलता है तो संसार उसे बड़ा ही नजर आता है, क्योंकि वह संसार की सुंदरता को देखकर अनुभव करता है।
प्रश्न 2.
एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए-
- शारीरिक परिवर्तन
- खान-पान में परिवर्तन
- गीत-संगीत
- रुचियों में परिवर्तन
- चित्रकारी
- पढ़ना-लिखना
- समझ में परिवर्तन
- खेल
- नृत्य और अभिनय
इनके अतिरिक्त यदि आपको किसी अन्य परिवर्तन की अनुभूति होती है तो उसे भी कक्षा में साझा कीजिए ।
उत्तर:
- शारीरिक परिवर्तन
- समझ में परिवर्तन
- रुचियों में परिवर्तन
- खान-पान में परिवर्तन
प्रश्न 3.
पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी । उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा-
- रेलगाड़ी
- मॉल
- पहाड़
- जलयान
- चार या छह वीथियों वाली सड़कें
- रेगिस्तान या मरुस्थल
- मेट्रो ट्रेन
- समुद्र
- वायुयान
- जंगल
- खेत
- नदी
इनके अतिरिक्त, आपके कुछ और अनुभव हो सकते हैं, उन्हें भी कक्षा में अवश्य साझा कीजिए ।
उत्तर:
पहाड़ः जब मैंने पहाड़ी वादियों को दूर तक फैले हुए देखा तो प्रकृति के निर्मित सौंदर्य में खो गया और सोचा कि यह संसार छोटा ही नहीं बल्कि मनोहर भी है।
इसके अतिरिक्त विद्यालय में हम अनेक सहपाठियों के साथ अपने विचार साझा करते हैं और अपनत्व का एहसास होता है। अतः शिक्षा प्रत्येक बच्चों के लिए जरूरी है।
चित्रों की भाषा
नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए । चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

उत्तर:
सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1.
कविता की पंक्ति है- “आखिर जब मैं आसमान में, उड़ी दूर तक पंख पसार ।” चिड़िया ने अंततः इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी ?
उत्तर:
जब उसने संसार को जानने की कोशिश की तो उड़ान भर कर दूर तक उड़ी, तब समझ में आया कि आसमान की तरह ये दुनिया भी बड़ी है।
प्रश्न 2.
पक्षी खुले आकाश में बहुत दूर तक उड़ते हैं। लंबी दूरी, हजारों पेड़ों और सैकड़ों घोंसलों के बीच पक्षी अपना घोंसला कैसे ढूँढ़ते होंगे?
उत्तर:
‘ममत्व’ एक स्वाभाविक स्नेह है, जिसके कारण पक्षी खुले आकाश में उड़ने और सैकड़ों घोंसलों के बावजूद भी अपना घोंसला ढूँढ़ लेते हैं।
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प्रश्न 3.
पक्षियों ने आकाश में उड़कर जाना कि संसार बहुत बड़ा है। हमारे पूर्वजों को यह बात कैसे पता चली होगी?
उत्तर:
हमारे पूर्वज भी पैदल चलकर जाने होंगे कि यह संसार बहुत ही बड़ा है। वर्तमान में तो कई साधन भी उपलब्ध हैं, फिर भी हम एहसास करते हैं कि दुनिया बहुत बड़ी है ।
प्रश्न 4.
जब आप कहीं बाहर जाते हैं तो घर के बड़े-बूढ़े आपको कुछ निर्देश देकर भेजते हैं। क्या पक्षियों के माता-पिता भी उन्हें उड़ने के पूर्व कुछ निर्देश देते होंगे? यदि हाँ, तो वे निर्देश क्या-क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, जब पक्षियों के बच्चे उड़ने के काबिल हो जाते हैं तब उनको साथ में लेकर भोजन की तलाश में उड़ते हैं, क्योंकि अनुभव ही सबसे बड़ा गुण है, जो हमें खुद पर निर्भर होना सिखाता है।
कल्पना की उड़ान
हर कोई पक्षी बनकर आकाश में उड़ना चाहता है। कल्पना कीजिए कि आप सभी खुले आकाश में पंख फैलाकर उड़ रहे हैं। कोई पहाड़ों के ऊपर उड़ रहा है, कोई समुद्र के ऊपर, कोई क्रिकेट मैच देखते हुए उड़ रहा है तो कोई विवाह के भोज का आनंद लेते हुए उड़ रहा है। आपको कल्पना करके कक्षा को बताना है कि आप ऊपर से नीचे क्या- क्या देख रहे हैं।

आप अपनी प्रस्तुति को उसी तरह सुना सकते हैं जैसे खेलों में आँखों देखा हाल सुनाया जाता है, यथा- मैं पहाड़ों के ऊपर से उड़ रहा / रही हूँ। मुझे चारों ओर ऊँचे पेड़, झरने और सरोवर दिखाई दे रहे हैं। ठंडी हवा अच्छी लग रही है। अरे वाह! अब तो बर्फ भी दिखने लगी है। यह एक सफेद चादर की तरह लग रही है। मैं इसका भरपूर आनंद ले रहा / रही हूँ आदि ।

उड़ान की परिस्थितियाँ, जैसे- पहाड़, समुद्र और उसका किनारा, जंगल, रेगिस्तान, मैदान, गाँव, नगर, बरात, विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ, विद्यालय, मेला, बाज़ार, चिकित्सालय, चिड़ियाघर, स्थानीय त्योहार आदि हो सकती हैं। शिक्षक बच्चों को उनके पिछले अनुभव और स्थानीयता को ध्यान में रखते हुए अन्य परिस्थितियाँ भी दे सकते हैं।
उत्तर:
सही मायने में शिक्षक वह होता है, जो कक्षा के सभी शिष्यों को अच्छे-बुरे की पहचान कराते हुए हमेशा आगे बढ़ने को उत्साहित करता है। क्योंकि परिस्थितियाँ सदैव एक समान नहीं रहती, अतः सूझ-बूझ से प्रगति करना आवश्यक है।
आकार-प्रकार
कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ का उल्लेख है। नीचे कुछ और चित्र दिए गए हैं जो अलग-अलग आकृतियों के हैं। चित्रों के नीचे उनके नाम लिखिए। इस कार्य में आप अपने शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर:

भाषा की बात
प्रश्न 1.
“ फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”, कविता की इस पंक्ति में ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह ‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है – कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए ।

उत्तर:

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं-
(क) सूखा और ……… कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।
(ख) दिल्ली मेरे घर से ……… है लेकिन गुवाहाटी पास में है।
(ग) अनवर कब ……… और कब गया, पता ही नहीं चला।
(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही ….
उत्तर:
(क) गीला
(ख) दूर
(ग) आया
(घ) छोटा
प्रश्न 3.
आइए, अब एक रोचक संवाद पढ़ते हैं-

इतना-सा, उतना-सा, जितना – सा और कितना-सा का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी समझाइए । फिर आपको राजू जितने रुपये मिल जाएँगे ।
अब नीचे दिए गए शब्दों से वाक्य बनाकर सलमा की सहायता कीजिए-
इतना – ………………………..
उतना – ………………………..
जितना – ………………………..
कितना – ………………………..
उत्तर:
इतना-सा – मुझे इतना सा सामान लेना है।
उतना – सा – उतना-सा सामान लेकर क्या करोगे?
जितना – सा – जितना – सा सामान जरूरी है, उतना लेना होगा।
कितना – सा – फिर कितना – सा ?
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पाठ से आगे (पृष्ठ 11-15)
पक्षी भोजन की खोज में घोंसले से बाहर उड़ते हैं। यह जानना रोचक होगा कि कौन – सा पक्षी क्या खाता है। नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। पता कीजिए कि वे क्या खाते हैं-


कलाकारी
चित्र बनाना, गाना और नृत्य करना सभी को पसंद होता है। घोंसले से झाँकता हुआ शिशु पक्षी, हरे-भरे पेड़ की शाखाओं पर बैठा पक्षी, नीले आकाश में पंख फैलाकर उड़ता पक्षी आदि बहुत प्यारे लगते हैं। अब आप भी नीले आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का चित्र बनाइए । जब चित्र तैयार हो जाए तो आप चित्र को पकड़कर एकल या सामूहिक नृत्य कर सकते हैं या अपने मनभावन गीत पर भाव नृत्य कर सकते हैं। आप सभी इन चित्रों को कक्षा या गलियारे में प्रदर्शित कर सकते हैं।
अभिभावकों/शिक्षकों/मित्रों की सहायता से नीचे दिए गए गीत को खोजिए और समूह में गाइए ।

सूरज एक, चंदा एक, तारे अनेक,
एक तितली, अनेक तितलियाँ,
एक गिलहरी, अनेक गिलहरियाँ.
एक चिड़िया, अनेक चिड़ियाँ…
उत्तर:
सही गीत-
तितली एक, तितलियाँ अनेक
गिलहरी एक, गिलहरियाँ अनेक
चिड़िया एक चिड़ियाँ अनेक….
आनंदमयी गतिविधि
प्रश्न 1.
नीचे दिए गए अक्षर जाल में पक्षियों के नाम खोजिए और उनके बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए।

उत्तर:
मैना
बतख
कबूतर
चील
गौरैया
बुलबुल
बाज
सारस
प्रश्न 2.
जब शिशु पक्षी चहचहाते हैं तो एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है। आइए, हम भी शिशु पक्षियों की तरह चहचहाएँ ।
उत्तर:
सभी बच्चे अपनी एक हथेली अपने होठों पर रखें। सभी मिलकर चीं-चीं की ध्वनि निकालें। आपको लगेगा कि आप ही पेड़ की शाखाओं से शिशु पक्षी बनकर यह ध्वनि निकाल रहे हैं। बस पक्षियों की चहचहाहट सुनिए और आनंद लीजिए।

पक्षियों की ध्वनियों को निकालना और सुनना सभी को रुचिकर लगता है। आइए, अब हम बारी-बारी से किसी भी पक्षी की ध्वनि निकालें और तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत करें।
प्रश्न 3.
नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेलियों का उपयुक्त चित्रों से मिलान कीजिए-


उत्तर:
- चमगादड़
- तोता
- कोयल
- उल्लू।
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बोलिए फटाफट
नीचे कुछ रोचक और चुनौतीपूर्ण पहेलियाँ दी गई हैं, शीघ्रता से उनका उत्तर दीजिए-


उत्तर:
- मटर,
- गन्ना,
- मोर,
- अनार,
- सड़क ।
मति की उड़ान
आइए मिलते हैं भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल से । इन्हें प्यार से ‘मति’ कहा जाता था। इनका जन्म सन् 1914 में दिल्ली में हुआ था। सरला ठकराल मात्र 21 वर्ष की आयु में पायलट का लाइसेंस पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने सन् 1936 में पहली बार लाहौर में जिप्सी मॉथ नाम का दो सीट वाला विमान अकेले उड़ाया था। वे साड़ी पहनकर विमान उड़ाने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने वायुयान का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 1,000 घंटे की उड़ान का कठिन अभ्यास किया था।
